गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

Gand Ki Fatfati Part 4 – Hindi Sex Story

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैं नीचे बैठ गया और जोर जोर से चाची की चूत में उंगली करने लगा…….जैसे ही मेरी उंगलिया पूरी अन्दर तक ऊतर जाती मेरा हाथ चाची के नितम्बो से टकरा जाता और वो ऐसे हिल जाते जैसे जेल्ली हो…..

चाची की पूरी चूत पनिया चुकी थी……..

चाची अब भी कोमल भाभी की बातें सुनने की कोशिश कर रही थी…….

बेचारी चाची फंस गयी थी…..अगर मुझे कुछ बोलती तो कोमल भाभी को शक हो जाता और नहीं बोलती तो मैं तो मस्त मुनिया में दो दो उँगलियाँ फ़साये हुए था.

नीचे से कोमल भाभी फिर बोली, ” अरे नीलू चाची……वो जिस्म २ आने वाली है……सुना हैं उसकी हिरोइन कोई सनी लियोनि है…..अमेरिका में गंदे गंदे रोल करती थी……

चाची ने कराहते आह भरकर पुछा, ” गंदे मतलब………”

कोमल भाभी बोली, ” अरे चाची…..वो गन्दी गन्दी फिल्मो में काम करती है वहां पर…. ” 

मैंने जोर से अपनी उंगली मुनिया में डाली तो बेचारी चाची के मुंह से फिर हाय निकल गयी…….कोमल भाभी समझी की चाची को उनकी बातों से मज़ा आ रहा है.

कोमल भाभी बोली, “राम चाची…….आप को तो दिनभर यह ही सब सूझता रहता है……..आप ना सच्ची में बहुत ही बेकार हो……..”

चाची क्या बोलती…………चाची ने फिर मुझे पीछे मुडकर देखा और ऑंखें तरेरी……..

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

फिर धीरे से बोली ” साले हरामी……मरवाएगा तू आज…….”

यह बोलकर उस हरामन ने मेरे बाबुराव को, जो की अंडरवियर से आधा बाहर झांक रहा था, को पकड़ा और चड्डी से बाहर खिंच लिया……मेरी आह निकल गयी.

चाची ने मेरे बाबुराव को सुपाड़े के नीचे से पकड़ा जैसे कसाई मुर्गे को गर्दन से पकड़ता है. वो अभी भी झुकी तो मुंडेर पर ही थी मगर मुड़ कर मेरे बाबुराव की जान निकाले जा रही थी……ठंडी ठंडी हवा चाची के बालो को बिखरा रही थी और मेरे नंगे कुल्हो पर गुदगुदी कर रही थी.

सच ही है…..सावन का महीना ही मादक होता है……इंसान तो इंसान…..कुत्ते कुतिया भी इस मौसम में हर गली में चोदते चुदाते मिल जाते है.

मैंने कचकचा कर चाची की मुनिया में उंगली करने की स्पीड बड़ा दी…..तुरंत ही चाची ने भी मेरे बाबुराव पर अपनी पकड़ मजबूत की और कड़क कड़क हाथ से मेरी मुठ मारने लगी. चाची मुंडेर पर झुकी झुकी ही पीछे मुड़ कर मुझे देख रही थी….उनका मुंह उत्तेजना से खुला हुआ था . और ….मेरे दांत भींचे हुए थे और मेरी ऑंखें चाची की आँखों में लोक हो गयी थी.

अचानक नीचे से कोमल भाभी चिल्लाई, “अरे नीलू चाची…….क्या कर रही हो यार………”

चाची ने हडबडा कर नीचे देखा मगर मेरा लंड नहीं छोड़ा, ” अरे यार……वो कपडे निचोड़ रही हूँ……..बोल ना………….”

चाची सच में मेरे बाबुराव को कपडे जैसे निचोड़ रही थी…..उनके छोटे छोटे नाज़ुक हाथों में बला की ताकत थी……..उन्होंने मेरे बाबुराव को इस मजबूती से पकड़ रखा था की कोई मुझे छत से लटका देता तो भी उनकी पकड़ ढीली नहीं होती.

कोमल भाभी बोली, “चाची…….यह मौसम में……कितना अच्छा लगता है ना………मैंने तो इनसे कहा था की आज ऑफिस मत जाओ……..दिन भर…….घर में ही रहेंगे……..मगर इनको तो एक साल में ही कंपनी का मालिक बनना है…………मालूम है मुझसे ढंग से बाय बोले बिना ही चले गए…….”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

चाची बेचारी क्या बोलती, एक औरत जो अपनी चूत में दो दो उंगलिया फंस्वाए खुले आम अपनी छत पर नंगी खड़ी हो, उसके हाथ में एक लपलपाता हुआ लौड़ा हो तो क्या बोलेगी……

नीचे से बेचारी कोमल भाभी अपने दुखड़ा सुनाये जा रही थी…….

“अरे चाची……कल रात को हमने वो वाली DVD देखी थी…………ये भी न इतने बेशरम है……….मैं तो समझी की मजाक कर रहे है……मगर इन्होने तो सच में DVD दिखा दी………..काले आदमी गोरी लड़कियों के साथ……….राम राम…….मुझे नहीं पता था की इतना बड़ा भी होता है………….पता है……आधे आधे घंटे तक कर रहे थे…….बिना रुके………जरुर कुछ खाते होंगे………….वर्ना कोई इतनी देर तक थोड़ी कर सकता है…………ये तो……दो तीन मिनट में ही…………अरे चाची आपका ध्यान कहाँ है….???? “

चाची बेचारी अपनी मुनिया के हाल चाल समझने में लगी थी……मैंने अपना दूसरा हाथ बड़ा कर उनके मम्मो को भी ब्लाउस के ऊपर से ही दबोच लिया था……..

चाची बोली, ” हें……हाँ…….क्या बोली………कोमल भाभी………..हाँ हाँ…….बहुत बड़े होते है इन मरे कालो के………..आह…….”

कोमल भाभी ने शक की टोन से पूछा, ” क्यों चाची……सच्ची सच्ची बताओ कौन है आपके साथ………..जरुर चाचा जी है……..क्या कर रहे हो……..दोनों….”

चाची घबरा गयी, ” अरे नहीं…….क…..क…..कोई नहीं है…….” 

यह बोलकर उन्होंने मेरा लौड़ा छोड़ा और थोडा और आगे झुक कर कोमल भाभी को सफाई देने लगी…..

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

“अरे वो तो मैं कपडे निचोड़ रही थी…..और मेरी कमर दुःख रही थी न…….इसीलिए………. आआआआआआहहहहहहहहहहहहह”

चाची के झुकने से उनकी टपकती हुयी चूत खुल कर मेरे सामने आ गयी थी……मैंने आव देखा न ताव और अपने लौड़ा सीधा चाची के छेद पर निशाना मार के ठोक दिया, कामरस से भीगी चूत ने कोई विरोध नहीं किया और लपक कर बाबुराव को पूरा अपने अन्दर समां लिया.

चाची की कराह और आह सुनकर कोमल भाभी का शक यकीं में बदल गया………..

वो बोली, “हाय राम……चाची……..आप तो बिन्दासों की रानी निकली…….चाचा के साथ खुल्ले आम………”

चाची क्या बोलती……मैं कचकचा कर इतने जोर जोर से ठोक रहा था की मेरे जांघ की चाची की जांघ से टकराने की ठाप कोमल भाभी को भी सुनाई दे रही होगी. और चाची बेचारी मुंडेर को सहारे के लिए पकडे हुए उसी पर अपने सर टिका कर बड़े प्रेम से ले रही थी.

कोमल भाभी की ऑंखें फ़ैल गयी थी, वो बोली, ” च च चाची…….आप एन्जाय करो….मैं जाती हूँ……..”

तभी मैंने चाची के मम्मो को मसल दिया…..चाची चिल्लाई, ” न न न नहीं………”

कोमल भाभी पलटी और उनके चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गए……..वो बोली, “आ आ आप का मतलब है चाची की मैं रुकू…….????” 

मैंने अपने पूरा लंड चाची की भीगी भागी चूत से बहार खिंचा और धप्प से अन्दर पेल दिया……चाची बोली, ” य य यस………हाँ……..”

कोमल भाभी समझी की चाची ने उनको रुकने के लिए बोल दिया है…….वो वही की वही अपनी गर्दन ऊँची किये अपनी सहेली को ठुकवाते हुए देखने लगी.

कोमल भाभी की ऑंखें फ़ैल गयी थी, वो बोली, ” च च चाची…….आप एन्जाय करो….मैं जाती हूँ……..”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

तभी मैंने चाची के मम्मो को मसल दिया…..चाची चिल्लाई, ” न न न नहीं………”

कोमल भाभी पलटी और उनके चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गए……..वो बोली, “आ आ आप का मतलब है चाची की मैं रुकू…….????” 

मैंने अपने पूरा लंड चाची की भीगी भागी चूत से बहार खिंचा और धप्प से अन्दर पेल दिया……चाची बोली, ” य य यस………हाँ……..”

कोमल भाभी समझी की चाची ने उनको रुकने के लिए बोल दिया है…….वो वही की वही अपनी गर्दन ऊँची किये अपनी सहेली को ठुकवाते हुए देखने लगी.

सावन की ठंडी ठंडी हवा चल रही थी………….हलकी हलकी रिम झिम बारिश भी होने लगी थी……..ठंडी हवा मेरे नंगे नितम्बो से टकरा कर मेरी ठरक और बड़ा रही थी.
अब मैं अपना बाबुराव बाहर खिंच कर धप्प से चाची की लपलपाती मुनिया में पेल रहा था…..मेरे हर धक्के पर चाची इस कदर सिसिया रही थी मानो उनकी चूत में लंड नहीं मिर्ची फंसी हो…..

और बेचारी कोमल भाभी……..अपने खुल्ले मुंह पर हाथ रखे अपनी सहेली नीलू चाची की तूफानी चुदाई देख रही थी……उनकी ऑंखें कंचो जैसी गोल गोल हो गयी थी.
चाची की ऑंखें तो आनंद के अतिरेक से बंद थी और उन्होंने कोमल भाभी की कोई बात सुनी ही नहीं थी.

यूँ भी अगर किसी औरत की खुले आम नीले गगन के तले हलकी हलकी बारिश में चुदाई हो रही हो तो वो ट्रेन का होर्न भी नहीं सुन पाए……और फिर कोमल भाभी की आवाज़ तो कोयल जैसी सुरीली थी. मैं जैसे ही अपना बाबुराव चाची की मुनिया से बाहर खींचता और धक्का मारता चाची भी अपनी गांड से मेरे लंड पर धक्का मार देती. जैसे ही हम दोनों की जांघें टकराती तो फटाक की आवाज़ पूरी छत पर गूंज जाती. 

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

चाची ने चुदते चुदते ही अपनी ऑंखें खोली और उनकी नज़रे सीधे पास वाली छत पर निचे मुंह फाड़े खड़ी कोमल भाभी से जा टकराई…..

“हाय राम………क्या द द देख रही है……….क क कोमल……….आह……..धीरे…….आह……..ज ज जा यहाँ से……..आह…..” चाची ने कराहते हुए कहा. 

एक सेकण्ड तो बेचारी कोमल भाभी को कुछ समझ ही नहीं आया…..आखिर बेचारी पहली बार लाइव टेलीकास्ट देख रही थी. चाची ने फिर चिल्लाया तो अचानक कोमल भाभी की होश आया…..

” अरे चाची…..मैं तो जा रही थी…..आपने ही तो बोला की रुक……मैंने फिर से पूछा तो था आपसे की मैं रुकू क्या……आप बोली हाँ तो मैं रुक गयी….”

चाची ने अपनी मुनिया पर मेरे लौड़े की चोट खाते खाते ही फिर कहा, ” न न नहीं……ऊह.,………तू…….ज ज जा……..”

कोमल भाभी के चेहरे पर शरारत के भाव तैर गए…..वो ऑंखें नचा कर बोली, ” ओ नीलू चाची………अब तो मैं पूरा मेच देख कर ही जाउंगी……ही ही ही…..
आप बहुत ही बेकार हो……….और चाचा जी तो और भी……….बेकार है.”

चाची ने पीछे पलट कर मुझे देखा……..उनके चेहरे पर बाल बिखर गए थे और उनके बालों की एक लट उनके चिकने गालों पर लटक रही थी……मेरे हर धक्के पर वो लट भी इठला कर हिल रही थी. चाची ने दांत पिंस कर कहा,

“साले हरामी………..आह……..मरवाएगा तू……….आह………………..जल्दी कर ले…..वो कोमल मरी निचे खड़ी खड़ी बेशरम जैसे देख रही है…..आअह…”

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बोलो अब…….कोमल भाभी चाची को चुदते देखले तो बेशरम और चाची बिंदास अपनी छत पर साड़ी ऊँची कर ले चुदवा तो ठीक……..

मैंने चाची की कमर पर इकठ्ठी हुयी साड़ी को घोड़े की लगाम जैसा पकड़ा और कुत्ते जैसी स्पीड में चाची को चोदना शुरू कर दिया……चाची कुछ और भी बोलना चाह रही थी मगर उनके शब्द उनके गले में ही रह गए और शब्दों के बदले उनके मुंह से वासनाभरी ऐसी आह निकली की मेरे रौंगटे खड़े हो गए और मैंने अपनी कमर को थोडा सा और झुका कर जोर जोर से अपने बाबुराव को उनकी रस टपकाती चूत में पेलना शुरू कर दिया.

चाची का मुंह आनंद से खुल गया था मगर शर्म लिहाज से उन्होंने अपनी आवाज़ रोक रखी थी …मगर जैसे ही उनकी मुनिया की बेदर्द ठुकाई होने लगी उनसे रुकना मुश्किल हो गया………उनके मुंह से कामुक सिस्कारियां निकलने लगी…

“आह……आह……..म म म म मार डाला…रे……..हाय अम्मा………..आह…………हाँ……… हाँ ………..हाँ………….कूट दे इसको……आह…….”

नीचे खड़ी कोमल भाभी मुंह खोले यह देसी चुदाई का नज़ारा देख रही थी……उसकी समझ में नहीं आ रहा था की रुके या चली जाये………रात को अपनी पति के साथ ब्लू फिल्म में काले लोगों के लम्बे लौड़े देख कर वो पहले से ही मस्ताई हुयी थी ऊपर से नीलू चाची की यह चुदाई उसके भेजे को हिला रही थी.

चाची ने तो अब लाज शर्म सब छोड़ दी थी…….वो इस कदर चिल्ला चिल्ला कर मेरे बाबुराव पर पलट कर धक्के मार रही थी की मानो इस चुदाई की जंग में आज उसको ओलंपिक का गोल्ड मेडल चाहिए. मगर जीतना इतना आसान नहीं था. मुकाबला टक्कर का था…

मैंने आगे हाथ बड़ा कर चाची के झूलते हुए मम्मो को पकड़ा और उनके निप्पलों को अपनी उंगली के बीच में लाकर रेडियो के बटन जैसा घुमा दिया. चाची की सिसकारी चीखों में बदलने लगी…….साली ठरकी…….उनके निप्पल उनकी कमजोरी थे यह मुझे पता था और इसीलिए मैंने सीधा हमला उनके विक स्पोट पर किया था.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

आखिर जंग और चुदाई में सब जायज़ है.

अचानक चाची के पाँव लड़खड़ाने लगे और उन्होंने धक्के मारना बंद कर दिया. बहुत धीमे से से उनके मुंह से एक आवाज़ निकली जो ट्रेन की सिटी जैसे धीरे धीरे बढती गयी….

“आ….आ……आ……..आ……..आ……….उई……..म म म्माँ .आ आ आ …………..आ…….आह……….” 

जैसे ही चाची ढीली पड़ी मैंने उनकी चोटी पीछे से पकड़ी और धमाधम बाबुराव को उनकी झरने जैसे बहती चूत में ठोकना शुरू कर दिया. चाची ने आगे होकर बचने की कोशिश की मगर मैंने उनकी चोटी को लगाम जैसे पकड़ा हुआ था आखिर बच कर कहाँ जाती…….उन्होंने अपना हाथ मुंह पर ढँक लिया और अपने सिस्कारियों को दबाने की कोशिश करने लगी……

चाची की गांड मेरे हर धक्के पर इस तरह हिल रही थी मानो भूकंप आया हुआ हो……उनकी हिलती गांड देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने धीरे से एक चपत उनकी गांड पर मार दी…..चाची के मुंह से सिसकारी और आह दोनों निकल गयी….

वो सिसियते हुए बोली, ” आआह……मार डालेगा क्या हरामी………जल्दी कर ले………क..क..कोई आ गया तो…..आह……..जानवर………..आह……छोड़ मुझे……..”

मैंने दांत पिंस कर अपने बाबुराव उनकी मुनिया में से बाहर निकाला…….सुपाडा इस कदर लाल होकर सूज गया था मानो गुस्से में पागल हो रहा हो.

चाची ने चैन की सांस ली ही थी की मैंने तुरंत अपने लपलपाता हुआ बाबुराव उनकी मुनिया में पेल दिया. चाची की तो आवाज़ ही गले में घुट गयी…….. 

अब मैंने ट्रेन फुल स्पीड में छोड़ दी थी……पकापक पकापक बाबुराव चाची की मुनिया में पेले जा रहा था और चाची फिर से अपनी गांड से धक्के मारने लगी थी. 

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

इरादा तो मेरा कुछ और था मगर चाची ने नीचे हाथ डाले और मेरे गोटों पर अपने नाख़ून रगड़ने लगी…..भेन्चोद आखिर साली को मेरी कमजोरी भी पता थी. 

मेरे गोटों में तुरंत सुरसुरी होने लगी, मैंने अपनी स्पीड स्लो करने की कोशिश की ताकि पानी न निकले मगर चाची पुरानी खिलाडी थी, उन्होंने मेरे बाबुराव पर पलट के अपने गांड से वो धक्के मारने शुरू कर दिए की मेरा दी एंड मुझे दिख गया. 

चाची ने अपना हाथ और आगे बड़ा कर मेरे गोटों के पीछे वाली नाज़ुक जगह पर लगाया ही था की मेरे दिमाग में पानी छुटने की अनाऊँस्मेन्ट हो गयी. 

मैंने अपने नितम्बो को सिकोडा और जोरदार धक्के के साथ अपना लौदा चाची की मुनिया में जड़ तक फंसा दिया. और तभी एक के बाद एक मेरे बाबुराव से पिचकारी की तरह पानी निकल कर चाची की मुनिया में उतरने लगा……मेरे होश ही गुम हो गए थे……..एक सेकंड के लिया पूरा शारीर कमान जैसा तन गया और अचानक ही मेरे पैर जवाब दे गए और मैं चाची के ऊपर ही झुक गया और जोर जोर से साँसें लेने लगा. मेरा पूरा बदन पसीने और बारिश के पानी से भीग चूका था. चाची के मुंह से भी मम्म मम्म मम्म करके संतोष भरी आवाज़े निकल रही थी. 

अचानक……….छत के दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आई. मैं और चाची दोनों चौंक गए, हम कुछ बोलते इसके पहले बल्लू चाचा की आवाज़ छत पर गूंज गयी………

“नीलू………….अरे…..नीलू…….कहाँ हो तुम……..आधे घंटे से नीचे भाभी तुम्हे आवाज़ लगा रही है……..नीलू……”

गांड की फटफटी सेल्फ स्टार्ट हो गयी.

मैं और चाची दरवाजे की पीछे की और थे इसीलिए बल्लू चाचा को दिखे नहीं मगर वो लौडू कभी भी आ सकता था. चाची ने फटाफट अपनी साड़ी नीचे कर ली और अपना पल्लू सर पर ले लिया मगर मेरी तो जींस नीचे थी और मस्ती के माहोल में न जाने कब टी शर्ट भी मैंने खोल कर फ़ेंक दिया था. मेरी गांड की फटफटी फुल स्पीड पकड़ चुकी थी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करू………

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

इस हालत में मुझे चाची के साथ देखकर बल्लू चाचा एक सेकंड में सब समझ जायेगा. और उसके बाद …………हे भगवान….

मैंने इधर उधर देखा. कोमल भाभी की छत वैसे तो काफी नीचे थी मगर दिवार में गेप होंने से वहां पैर रखने की जगह थी. मैंने आव देखा न ताव अपने पैर मुंडेर पर दाल कर कोमल भाभी छत की तरफ उतरने लगा. मैंने दोनों हाथों से मुंडेर को पकड़ा और धीरे धीरे दिवार में पैर टिकने की जगह देख कर उतरने लगा. थोड़ी ही देर में मैं कोमल भाभी की छत से थोडा ही ऊपर था…..मैंने अपने हाथ छोड़े और कोमल भाभी की छत पर कूद गया.

बिलकुल सेफ लैंडिंग थी. जरा भी नहीं लगी. मैंने बड़ी शान से मुस्कुराते हुए अपने हाथ मलते हुए ताली मारी और नीचे जाने के लिया मुडा.

कोमल भाभी मेरे ठीक सामने खड़ी थी…..उनके मुंह पूरा गोल खुला हुआ था और उनके चेहरे पर घनघोर आश्चर्य के भाव थे. वो ऑंखें सिकोड़े मुझे घुर रही थी.

मैं जहाँ था जैसा था वैसा ही फ्रिज हो गया.

कोमल भाभी ने कांपती हुयी आवाज़ में कहा , ” च च चाची के स स साथ त त तुम थे………..??????”

फटफटी गेयर में हो तो स्टार्ट नहीं होती.

इसकी माँ का……..

आसमान से गिरे और खजूर में अटके.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मुझे तो अपने आप पर ही दया आने लगी. टी-शर्ट जल्दी में पहना नहीं था बस कमर पर बांध लिया था…..सलमान स्टायल……और जींस बस ऊपर खिंच ली थी. बटन लगाने का समय कहाँ था. भोसड़ी की जींस भी मानो समझ गयी की मेरी गांड फट रही है……और धीरे धीरे से थोड़ी नीचे सरकने लगी.

बाबुराव अभी अभी मैदान-ऐ-जंग से जीत हासिल कर के आया था इसीलिए अभी भी अकड़ के साथ खड़ा था. जैसे ही जींस ने जगह दी भाईसाहब ने तुरंत अपनी मुंडी जींस से बाहर निकाल कर कोमल भाभी को सलाम कर दिया.

कोमल भाभी की पहले से ही फटी हुयी ऑंखें अब तो बस बाहर ही निकाल आई. उनका पूरा मुंह लाल सुर्ख हो गया……..एक भरपूर नज़र उन्होंने बाबुराव पर डाली और अचानक सकपका कर इधर उधर देखने लगी.

मुझे समझ नहीं आया की यह क्या कर रही है………

उधर वो बेचारी अपनी गर्दन दूसरी और मोड़े हुए भी कनखियों से मेरे लाल को अपनी नज़रो से दुलार रही थी. मैंने उनकी नज़रो का टार्गेट देखने के लिए अपनी गर्दन निचे की तो अपने सिपाही ने अपुन को ही सलाम ठोक दिया.

भेन्चोद………शर्म के मारे मेरे कान गरम हो गए. मैंने तुरंत जींस को ऊपर खिंचा और बटन लगा लिया. कोमल भाभी ने देखा की मेरा खतरनाक जानवर पिंजरे में कैद हो चूका है तो वो भी सीधी हो गयी.

बड़ा अजीब केस हो गया था. हम दोनों शरमा रहे थे और चूतियों जैसे इधर उधर देख रहे थे. मेरा शरमाना तो समझ आता है मगर वो बेचारी क्यों शर्म से लाल हुयी जा रही थी, यह मेरे समझ से बाहर था.

मैंने सोचा की बोस अब यहाँ से निकल लो…….मैं आगे बड़ा तो वो बेचारी एक दम घबरा के पीछे हो गयी. इसकी माँ का……..साली का रेप थोड़ी करने जा रहा था जो इतना डर गयी. मैं सर झटकते हुए उसकी छत ने निचे जाने के लिए सीड़ियों की तरफ गया. वहां पर गेट था जो की बंद था. मैंने गेट को खिंचा……वो हिला भी नहीं.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मेरा दिमाग गरम हो रहा था……साली ये कोमल भाभी मुझे समझती क्या है………मैंने गेट को जोर से खिंचा तो भी नहीं खुला….भेन्चोद…..इसकी तो मैं……

तभी मेरे कानों में कोमल भाभी की जल तरंग जैसी आवाज़ आई…..

“शील भैया……..वो गेट बाहर की तरफ नहीं अन्दर की तरफ खुलता है……..धक्का दो……”

लंड…..इतनी देर से धक्के ही तो दे रहा था. मगर गेट में नहीं……चाची में…….

मेरा गुस्सा एकदम उड़नछु हो गया. मैं मुस्कुरा दिया…….गेट को धक्का देकर खोला और निचे जाने लगा……देखा तो कोमल भाभी भी हौले हौले मुस्कुरा रही थी.

हाय…….जालिम की एक मुस्कान ने फिर से मूड बना दिया. मैंने निचे उतरते उतरते टी शर्ट पहना और सीधा अपने घर की तरफ निकल लिया.

मैं जब कोमल भाभी के घर से बाहर निकल कर आया और उनका गेट बंद करने लगा तब तक वो भी नीचे आ गयी थी, मेरी उनकी नज़र मिली और वो फिर से शरमाते हुए मुस्कुराने लगी. मैंने वहीँ रुक कर उनके इस लाजवंती ड्रामे को देखने लगा. तभी किसी ने मेरे कंधे पर हाथ मारा.

मैं झटके से पलटा, देखा तो मेरी सांस ही रुक गयी.

कोमल भाभी के पतिदेव रिषभ भैया मेरे कंधे पर हाथ रखे मुस्कुरा रहे थे.

“और भाई शील, क्या हाल है…? आजकल तो तुम दीखते ही नहीं…….कैसे आना हुआ……..”, रिषभ भैया ने पूछा.

मैं क्या लंड बोलता की कैसे आना हुआ…….वो रिषभ भैया आपकी बीवी मेरी और चाची की चुदाई का सीधा प्रसारण देख रही थी….तभी चाचा आ गया इसीलिए मैं अधनंगा आपके घर की छत पर कूद गया……बस इसीलिए आना हुआ.

मैंने कहा, “न न न नहीं भैया…….म म म मैं तो अ ऐसे ही…….व.व.व.वो…………म.म म म. मैं………”

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तभी कोमल भाभी ने बात संभाली, “अरे आप भी……..आते ही सवालों में लग गए….. .शील भैया नीलू चाची का पूछने आये थे………चाची काफी देर से गायब थी इसीलिए…..”

ये बोलकर उसने वो तिरछी मुस्कान मारी की मेरे दिल और लंड दोनों पर एक साथ चोट लग गयी. साली……यह भी कम हरामन नहीं है.

रिषभ भैया और कोमल भाभी तो अन्दर चले गए, मैंने भी अपनी किस्मत की खैर मनाई और घर की तरफ चल पड़ा.

फिर से वो फोन की घंटी………इच्छा हुयी की इस भेन्चोद फोन को गधे की गांड में घुसा दू……साला बजे ही जा रहा था.

मैंने उठाया, “हेल्लो……..”

“अरे तुम कभी लाइफ में कुछ सीखोगे की नहीं……..? १२ बजे ही सो जाते हो क्या ? अभी तो १२ भी नहीं बजे. तुम हो कहाँ ? न तुम्हारा कोई फोन आता है न मेसेज करते हो……..बातें तो बड़ी बड़ी करते हो बस…….आज तो मैंने सोच लिया था की जब तक तुम्हारा फोन या मेसेज नहीं आएगा मैं भी तुम्हसे बात नहीं करुँगी….मगर तुम्हे तो कोई फरक पढता ही नहीं है……u just dont care ……कहाँ थे दिन भर……?”

भेन्चोद शायद सांस लेने के लिए ही रुकी थी……वर्ना आधा घंटा और बोल लेती……..

मैं उठा कर बैठ गया, ” हाय पिया………अरे सोरी यार……मेरे घर मेहमान आये थे…….मैंने तुम्हे फोन लगाया था मगर आउट ऑफ़ कवरेज था……..फिर क्या हुआ

…..वो सांड को………अ अ अ आई मीन तुम्हारे भाई को शक तो नहीं हुआ ???? “

“नहीं……भैया को मैंने कंफ्युस कर दिया……की मैं तो वहां थी ही नहीं……और हेल्लो……तुमने अभी मेरे भाई को क्या कहा ???? “, उसने पूछा.

मैंने बात संभाली….” अरे न न नहीं….व.व…व.वो……..क.क.कुछ नहीं……..अच्छा तुम क्या कर रही हो……? “

“मूवी देख रही हूँ…….”

मैंने पूछा, ” कोनसी मूवी……”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

वो बोली, “अरे……वो….. XXX ……… “

इसकी माँ की……….साली ये तो ब्लू फिल्म देख रही है……..बोस……क्या बिंदास लौंडिया है……….

मैंने पूछा, “क क क क्या बात है……….सची में……?”

वो बोली, “हाँ……तो क्या हुआ……मैं तो दूसरी बार देख रही हूँ…….अभी थोड़ी देर पहले तो मम्मा भी देख रही थी……फिर उनको नींद आई तो वो सोने चली गयी…..मस्त मूवी है……”

भेन्चोद…..ये लौंडिया तो अपनी माँ के साथ xxx मतलब ब्लू फिल्म देखती है…….गज़ब…….

मैंने कहा, “तुम्हारा मतलब तुम्हारी मोम को भी पसंद है क्या……..??”

वो बोली, “हाँ……पसंद तो क्या…..मगर देख तो रही थी…….”

मैंने फुसफुसा कर पूछा, “वैसे मूवी का नाम क्या है……..?”

वो बोली, “अरे बताया तो सही……..xxx ……….”

मैंने फिर कहा, “अरे……मेरा मतलब है की टाइटल क्या है……”

वो बोली, “शील…..क्यों पका रहे हो……मूवी का नाम है xxx ….अरे हालीवुड मूवी है न…..विन डीज़ल की….. एक मिनट तुम क्या समझे……की मैं…….xxx मतलब वो गन्दी वाली मूवीज की बात कर रही थी ?????………………हेल्लो…….हेल्लो……..शील जवाब दो. “

शील अब क्या लंड जवाब देगा………

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मेरी तो सांस रुक गयी……..सची यार आखिर अब क्या बोलता……….उधर से पिया फिर चिल्लाई, ” अरे बोलो न……..शील तुमसे यह उम्मीद नहीं थी……………बाय”

फ़ोन कट गया. भेन्चोद…….किस्मत से इतनी ज़ोरदार लौंडियाँ से दोस्ती हो गयी थी……..सीन भी जमने लगा था और यह माँ चुदाई हो गयी. मैं तो वैसे ही गांडफट हूँ…..जिंदगी में कभी ऐसी हरकत नहीं कर पाता…….साला मूवी के नाम से चुतिया बन गया और जमी जमाई सेटिंग की माँ भेन हो गयी.

मैंने हिम्मत करके पिया को फिर से फोन लगाया………..२ घंटी गयी और उसने फोन काट दिया. बोस……पूरी माँ चुद चुकी थी. मैंने उसको मेसेज किया

“आय एम् सोरी” और सेंड करके फोन स्विच आफ करके सो गया.

सुबह जल्दी नींद खुल गयी. ढीले ढाले मन से तैयार हुआ, नाश्ता करके के लिए बैठा था. चाची ने घी में डुबो डुबो कर पराठे बनाये थे………बेमन से खाए. चाची आई और ऑंखें नचा कर बोली, “हाय राम……लल्ला…….अरे २ पराठे तो खा……..बड़ा हो गया है…….इतनी मेहनत करता है……….घी नहीं खायेगा तो क्या करेगा……”

तभी बल्लू चाचा भी आकर बैठ गया, “अरे मेहनत तो हम भी करते है…..हमें कोई घी के पराठे नहीं खिलाता……..”

चाची ने तुरंत जड़ा, “आप तो ना रहने ही दो जी………….अब तो आप घी क्या अमृत भी पी लोगे तो भी आपसे कुछ नहीं होगा “

बेचारे बल्लू चाचा का मुंह गधे के लंड जैसा लटक गया. वो मुंह निचे किये धीरे धीरे खाने लगा. मेरी हंसी नहीं रुक रही थी. मैंने फटाफट पानी पिया और वहां से भागा.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

बस में इतनी भीड़ थी की चूहा भी नहीं घुस पाता. कॉलेज पहुंचना था जैसे तैसे घुसा और इधर उधर कभी गांड कभी कंधे टेड़े मेडे कर के बस के बीच में पहुंचा. इतनी से जगह में इतने लोग खड़े थे की ढंग से सांस भी ना ले पाओ. एक सीट को पकड़ के खड़ा हो गया और खिड़की की तरफ झुक गया……थोड़ी तो हवा आई.

अचानक भीड़ और बढ़ी. मुझे बिलकुल सीधा खड़ा होना पड़ा. मैं ऊपर हाथ से पकड़ने की जगह ढूंढ़ ही रहा था की मेरे पिछवाड़े कोई आकर टिका. मैंने चिड कर पीछे देखा तो मेरी आवाज़ मेरे मुंह में ही रह गयी. जो मुजस्सिमा मेरे सामने था उसका तो बयां करना भी मुश्किल था. उस औरत का कद मेरे से भी एक दो इंच ज्यादा था. उम्र शायद 30 के आस पास होगी. वो करीब 5 फीट 11 इंच की हाईट की थी. और इतनी लम्बी होने के बाद भी उसका जिस्म इतना भरा पूरा था की उसको लिटा लो तो गद्दे की जरुरत ना पड़े. ऐसा गदराया बदन होने के बावजूद कहीं पर भी मोटापे की झलक नहीं थी. पूरा सोलिड बदन था. भरा पूरा.

ऐसी लम्बाई और ऐसे बदन का कॉम्बिनेशन मैंने पहली बार देखा था.

उसने हलके नीले रंग की साड़ी पहनी थी. जैसा की नीले रंग की खासियत है…….अन्दर का सब कुछ बाहर दिखा देता है. उसके आंचल से अन्दर गौर से देखने पर जन्नत का गलियारा साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. किसी भी औरत के मम्मो को ही घूरते रहना तो गलत है …..आखिर चेहरा मोहरा भी देखने की बनती है…….

मैंने नज़रे उठाई……..सावला रंग….हल्का गोल चेहरा…….छोटी सी नाक……मगर ऑंखें ऐसी थी मानो “नैन कटीले तेरे नैन कटीले” गाना उसकी आँखों पर ही लिखा गया था. उसने आँखों पर हल्का सा मस्कारा लगा रखा था. कसम से….इतनी नशीली ऑंखें थी की इंसान उनकी आँखों में देखते देखते ही मूठ मार ले…….शायद वो बंगालन थी……आखिर बंगाल की फसल ही अलग आती है……सावला रंग और नशीले नैनो का कोम्बिनेशन तो सिर्फ बंगाल में ही मिलता है.

मैं उसकी आँखों में ऐसा खो गया की मुझे ध्यान ही नहीं रहा की वो भी मुझे देखे जा रही थी. जैसे ही मुझे होश आया मैं सकपका कर इधर उधर देखने लगा. वो बहुत ही हलके से मुस्कुरा दी……मैंने भी सोचा की उपरवाला क्या मुजस्सिमे बनाता है……जाने किसकी किस्मत में यह डनलप का गद्दा लिखा है.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैंने बाहर झाँका……..अभी कॉलेज आने में देर थी. मैंने फिर पलट के उस सेक्स की देवी को देखा. अभी तक तो वो सीट को पकड़ के खड़ी थी मगर उसने अब बस की छत पर लगा हुआ डंडा पकड़ लिया था. उसके बोबे इस कदर तन कर ब्लाउस में से झांक रहे थे मानो बस अब निकले…….. मेरी साँसे गरम हो गयी……मैं न चाहते हुए भी उसे घूरे जा रहा था. मेरी नज़रे फिर उससे मिली……मैं फिर से सकपका कर इधर उधर देखने लगा.

थोड़ी देर बाद मैंने पलट कर फिर देखा तो सीन चेंज हो चूका था. एक मादरचोद ठरकी बुड्ढा उस औरत के ठीक पीछे चिपक कर खड़ा था. और बेशरम जैसे अपने लंड उस हसीना की फूटबाल जैसी गोल गांड पर रगड़ रहा था. पेंट में से उसका खड़ा लंड साफ़ दिख रहा था. साला बुड्ढा अनजान बन कर इधर उधर देख रहा था मगर

बुढऊ हरामी अपने लंड उस हसीना की गांड पर रगड़ने का कोई मौका नहीं छोड रहा था.

साला ताऊ………60 साल की उम्र में भी लंड खड़ा कर लिया था. जरुर भेन्चोद झंडू का चवनप्राश खाता होगा. अचानक वो पीछे पलटी और उसने बुड्ढ़े को घूरने लगी.

बुड्ढ़े ने ऐसा जताया मानो वो कुछ नहीं कर रहा है और वो मज़े से इधर उधर देखता रहा.

बेचारी……क्या करती…….थोडा सा आगे होकर खड़ी हो गयी…..बुड्ढा भी भेन्चोद तुरंत आगे आ गया……….और मज़े में अपने थके लंड को बेचारी की गोल गोल गांड पर रगड़ने लगा. न जाने क्यों……..मुझे बहुत जोर से गुस्सा आया…….वैसे तो मैं गांडफट हूँ……..मगर मुझसे से सहन नही हुआ…..

मैं थोडा आगे बड़ा और उस बुड्ढ़े को बोला, “अंकल….थोडा आगे होना…..”

बुड्ढा मादरचोद था…….मुंह में पान दबाये हुए बोला, ” बेटा…….बहुत जगह है…..जहाँ खड़े हो हो वहीँ खड़े रहो……”

मैंने हिम्मत जुटाई और दबी जुबान में कहा , ” अंकल….इज्ज़त से आगे हो जाओ……की सबको बताऊ की आप क्या कर रहे हो……”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

बुड्ढा था तो ठरकी मगर समझदार…….उसको समझ आ गया की अब उसकी दाल नहीं गलेगी……भेन्चोद ने धीरे से अपने लंड को एक बार और उस हसीना की गांड पर रगडा और भीड़ में आगे जाकर खड़ा हो गया और अपने लंड रगड़ने के लिए नयी गांड ढूंढने लगा.

तभी एक सीट खाली हुयी और वो भाभी उस सीट पर बैठ गयी. मैंने वहीँ पर खड़ा होकर बाहर देखने लगा. मुझे ऐसा लगा की कोई मुझे देख रहा है…..मैंने सर झुका कर देखा तो वो भाभी मुझे देख रही थी. जैसे ही मेरी नज़रे उस से मिली एक करंट सा मेरे शरीर में दौड़ गया. यह औरत सच में काम की देवी रति थी.

तभी उस के पास बैठ आंटी उठी और उसके पास वाली सीट खाली हो गयी……एक लौंडा बैठने लगा तो भाभी ने उस लौंडे को बैठने से मना कर दिया. मुझे हंसी आ गयी…..बेचारे का मुंह गधे के लंड जैसा लटक गया था. तभी वो भाभी मेरी और मुड़ी और बोली, “आप बैठ जाइये ना यहाँ पर……”

कहते है की सेक्स के भगवन श्री कामदेव फुल के बाण मार कर लोगों के दिल में सेक्स जगाते थे……..शायद वो ही बाण उन्होंने मेरी गांड पर मार दिया था. मैं हक्का बक्का रह गया……..वो अपनी सीट के पास वाली जगह थपथपा कर फिर से बोली, “बैठ जाइये……”

मुझे ऐसा लगा मानो करीना कपूर बिस्तर पर लेटे लेटे मुझे बोल रही हो की आइये मेरे साथ लेट जाइये….मैं तुरंत उसके पास जाकर बैठ गया……मेरा बैठना हुआ और कामदेव की मेहरबानी से सड़क पर एक गड्डे में बस जोर से हिली……मेरा पूरा बदन उसके बदन के साथ चिपक गया. हाय…….

मुझे ऐसा लगा मानो करीना कपूर बिस्तर पर लेटे लेटे मुझे बोल रही हो की आइये मेरे साथ लेट जाइये….मैं तुरंत उसके पास जाकर बैठ गया……मेरा बैठना हुआ और कामदेव की मेहरबानी से सड़क पर एक गड्डे में बस जोर से हिली……मेरा पूरा बदन उसके बदन के साथ चिपक गया. हाय…….

उसकी हाईट ज्यादा होने से मैं उसके गर्दन तक ही आ रहा था. चूँकि मैं बैठ ही रहा था मेरा हाथ सीट पर था और बस के झटका खाने से मेरा हाथ उसकी कमर जो की साडी हटने से पूरी बेपर्दा थी…..पर जा टकराया……ओये होए……कुत्तों की ना किस्मत कुत्तों जैसी ही होती है……बरसात में कोई ना कोई कुतिया मिल ही जाती है.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैंने सकपकाते हुए कहा, ” आ आ आई एम् सॉरी……” ( भेन्चोद यह हकलाना कब मेरा पीछा छोड़ेगा……)

वो मुस्कुरायी, छोटे छोटे मोती जैसे दांत चमक उठे……….और बोली, ” नहीं…..आई एम् सॉरी…..एंड थेंक यु………आप ना होते तो वो आदमी……थेंक यु सो मच….”

अब मैं क्या बोलता……की मेडम जी मेरे भी अरमान कुछ उस बुढाऊ के जैसे ही है………

मैंने कहा, “हाँ तो…….अरे कितना बेशरम था……..नहीं हटता तो मैं……..” वो बीचे में बोली, “अरे नहीं नहीं……..झगडा करना अच्छी बात नहीं है……”

अरे डार्लिंग तेरे लिए तो मैं मर्डर कर दूँ झगडा क्या चीज़ है……… मैंने कहा, ” हाँ जी…..इस उम्र में भी…..” 

यह सुनकर वो मुस्कुराने लगी……..हाय……क्या मुस्कान थी……….भइया इस की तो मुझे चाहिए भले कुछ भी हो जाए……

उसने पुचा, “स्टुडेंट हो ?”

मैंने कहा “हांजी……”

वो बोली, ” अरे वाह …..आई एम् अ टीचर…….”

साली….जरुर सेक्सोलोजी बोले तो कामशास्त्र की टीचर ही होगी. 

उसने अपने दोनों हाथ आगे वाली सीट पर रखे हुए थे, जिससे उसके साइड का पूरा बदन जो पल्लू से ढका था उस पर से साड़ी हट गयी थी. 
उसकी गोल गांड बैठने से और चौड़ी हो गयी थी. भेन्चोद इतनी पतली कमर और इतनी चौड़ी गांड का कातिल रिमिक्स मैंने पहली बाद देखा था. 

माँ कसम इसको तो डोगी बनाकर…………

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

बैठने के बाद भी वो मुझसे लम्बी थी और मैं इसी का फायदा उठाकर बाहर देखने के बहाने से उसके बदन को निहार रहा था. उस ने सच मुच बहुत ही टाईट ब्लाउस पहना था, पल्ला इस तरह सरका था की उसके ब्लाउस में से मचल मचल कर बाहर निकल रहे मम्मे बड़ी आसानी से दिख रहे थे. साला एक एक मम्मा ढाई किलो का था. ढाई किलो का हाथ तो सुना था (अरे सनी देओल का…) मगर ऐसे बदन पर ढाई किलो का मम्मा खुशनसीब ही देख पाते है 

मैं उपरवाले के इस मुज्जसिमे को देखने में इतना मगन था की मेरा ध्यान ही नहीं गया की वो कुछ कह रही है………..

मैंने बड़ी मुश्किल से उसके बदन से नजर हटा कर उस की सेक्सी आँखों में झाँका और पूछा, ” ज ज ज जी…..क्या ?”

वो मुस्कुराई और बोली , “अरे मैं पूछ रही थी की इस शहर में क्या क्या देखने लायक है………मुझे यहाँ आये ज्यादा वक़्त नहीं हुआ है ना… “

मैंने कहा, “अरे यहाँ तो स स स सब कुछ देखने लायक है……. प प प पुराना किला है………तालाब म म मेरा मतलब झील है………”

भेन्चोद हकलाना……बंद ही नहीं हो रहा था…….वो बोली, “हम्म्म…….मेरे हसबेंड तो अभी कोलकाता में ही है……….उनका ट्रान्सफर यहाँ हो गया है ना………वो आने वाले थे मगर वो वहा से रिलीव नहीं हो पाए…….वो आ जायेगे तो फिर मैं जरुर ये शहर देखूंगी………”

मेरे मन तो आया की मैं ही दिखा दूँ इसको …………शहर.

बस में भीड़ बढ गयी थी………लोग बीच में खड़े थे……..और उनके दबाव से में इस भाभी की तरफ दबा जा रहा था. एक मन तो हुआ की बाबा मजे ले लूँ…..मगर फिर लगा की साली सोचेगी की मैं भी बुढाऊ की तरह फायदा उठा रहा हूँ……………आखिर अपने भी उसूल है……सामने वाली लाइन दे तो अपुन उसकी वही मार ले……मगर किसी की मज़बूरी का फायदा उठाना तो गलत है……..

मैं भीड़ का दबाव अपने ऊपर लेता रहा मगर साले मादरचोद पुरे के पुरे मुझ पर ही पिले जा रहे थे. दो तीन झटके लगे…….मैंने अपने एक हाथ सामने वाली सीट पर रख कर दबाव झेला…..मगर भीड़ तो भीड़ थी……भेन्चोद साले मुझ पर ही टिक गए……मैंने अपना दूसरा हाथ उस भाभी के सामने से ले जाकर खिड़की की फ्रेम पर रख दिया और दबाव झेलने लगा मगर दबाव बढ़ता ही जा रहा था….आखिर सुबह का समय था…..किसी को स्कुल जाना था किसी को कोलेज…..किसी को ऑफिस….

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

वो मुझे देख रही की मैं कैसे अपने ऊपर लोड ले रहा हूँ मगर उस से नहीं चिपक रहा…….उसने कहा, “आप थोडा इधर सरक जाइये ना…….”

किसी की मर्ज़ी के बिना मजे लेना गलत है……मगर अब कोई खुद बोल दे…..और वो भी इस के जैसी आइटम तो फिर गए उसूल गधे की गांड में……

मैं उसकी तरफ थोडा सा सरका और बाकि काम भीड़ ने कर दिया…….मुझे उस से ऐसा चिपकाया की जगह तो छोड़ो हवा भी नहीं घुस पाती……मेरी जांघें उसकी मोटी मोटी जांघों से सट गयी और मेरा वो हाथ जो उसके सामने से ले जाकर मैंने खिड़की पर रखा था वो सीधा उसके मम्मो की लाइन में आ गया……भीड़ ने एक धक्का और मारा और मैं उसके नंगे पेट की गर्मी अपनी शर्ट के अन्दर ही महसूस करने लगा………….वो जगह करने के लिए सीट पर आगे सरकी और लो……उसके मम्मे मेरे कोहनी से आ टकराए………

बाबुराव अभी तक तो नन्हा मुन्ना बन के बैठा था…..जैसे ही मम्मे टकराए…….उसने लौड़े जैसे हरकत की और फटाफट खड़ा हो गया. 

साला मादरचोद…….इधर भीड़ भोसड़ी की मेरे उपर गिरे जा रही…..इधर इस गरमा गरम आइटम से मैं चिपक कर बैठा…..उधर उसके मम्मे मेरी कोहनी पर टिके हुए और इधर यह लंड खड़ा होकर अपनी औकात दिखा रहा…..

अब क्या करू……

मेरा हाथ थोडा सा मुडा और उसके मम्मे इतनी नरमाई से दब गए…….

बॉस इस खेत में बहुत हल चला हुआ था……मगर ज्यादा जुटे हुए खेत फसल भी तो अच्छी देते है .

मैंने सोचा की अपने उसूल के मुताबिक मैंने आगे बढ़ कर कोई हरकत तो की नहीं…..अब इसने खुद बोला है की आप थोडा सा सरक लो….तो मैं थोडा सा ज्यादा सरक लेता हूँ……….मैंने अपनी कोहनी से उसके मम्मे को फिर दबाया……..वाह…….ढाई ढाई किलो के तने हुए मम्मे और फिर भी इतने नर्म……..

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

यह तो ऐसा ही हुआ की दारू पियो तो नशा तो हो मगर स्मेल नहीं आये.

मैंने कनखियों से उसकी तरफ देखा…..वो खिड़की के बाहर नज़ारे देखने में व्यस्त थी. मैंने फिर से उसके मम्मे को कोहनी से दबा मारा……आह……भेन्चोद क्या माल था यार……..उसने या तो ध्यान नहीं दिया या उसे लगा की भीड़ के कारण ऐसा हो रहा है.

भीड़ भी पक्की मादरचोद थी, इतने जोर से मुझ पर पिले जा रही थी मानो मैं सलमान खान हूँ……….इधर बढ़ते दबाव से भाभी का नरम नरम शरीर मेरे गरम गरम शरीर से चिपका जा रहा था. मैंने अपने हाथ बड़े सावधानी से उसके मम्मो से थोडा सा आगे कर रखा था……सुबह सुबह का ट्राफिक था…..बस ड्रायवर बेचारा बार बार ब्रेक मारे जा रहा था और भाभी के मम्मे बड़े प्यार से मेरे हाथ पर चिपके जा रहे थे. 

उसने कुछ कहा ……मैं तो हवस की दुनिया का वर्ल्ड टूर कर रहा था…….लंड कुछ सुनाई नहीं देता……..उसने फिर कुछ कहा……

मैंने हडबडा कर पूछा, ” ज ज ज जी…..क क क क्या……”

उसने फिर कहा, “आप कहाँ पर उतरेंगे…….”

मन में तो आया की मैडम जी जहाँ तक आप पास में बैठी हो…….भले ही बस नॉनस्टाप कश्मीर से कन्याकुमारी जा रही हो.

मैंने कहा, “बस ही…..ए ए एक….द…द…..दो…….स्टाप आगे……”

“अच्छा……मुझे लल्लूभाई कॉलेज में जाना है……कोनसा स्टाप है…..?”, “उसने अपनी खनखनाती आवाज़ में पूछा. 

मैंने कहा, ” लल्लूभाई कॉलेज……..म.म.म.मैं भी तो वहीँ जा रहा हूँ………अगला स्टाप है…..”

मैंने सोचा बाबा अब यह तो निकल लेगी…..अभी अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ था………चलो कुछ इन्क्वायरी कर लेते है.

“आ आ आप……..कोनसे स्कुल में पढ़ाती है……वहां तो कोई स्कुल नहीं है…..”, मैंने दाना डाला. 

वो हँसते हुए बोली. “अरे नहीं नहीं…….मैं स्कुल टीचर नहीं हूँ……मैं तो कोल्कता में कॉलेज में लेक्चरार थी……यहाँ भी कॉलेज में ही पढ़ाने आई हूँ……”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मेरे दिमाग में कीड़ा कुलबुल कुलबुल करने लगा…. …अगर यह कॉलेज में पढ़ाने आई है……..और मेरे कॉलेज मतलब लल्लूभाई कॉलेज वाले स्टाप पर उतर रही है…….. तो……तो…….तो……..इसका……..मतलब………है……..की……

यह मुजस्सिमा मेरे ही कॉलेज का नूर बढाने वाला है………

वो बोली, “आज मेरा पहला दिन है………लल्लूभाई कॉलेज कैसा कॉलेज है वैसे….?”

लो……मेरे लंड के तो ख़ुशी के मारे आंसू निकल गए…….लल्लूभाई कॉलेज तो बहुत खुशनसीब कॉलेज है मैडम जो आप वह पर पढ़ाने आ रही है. 

मैंने कहा, “अरे…..व….व…..वाह…….म….म…..मैं भी व….व…वहीँ पढता हूँ…….”

उसने मुझे ध्यान से देखा और बोली, ” सच्ची…….लगता नहीं है…..तुम तो स्कुल गोइंग लगते हो…….”

ओ मैडम…..अभी लंड दिखा दिया तो समझ में आएगा की स्कुल गोइंग हूँ या कॉलेज गोइंग.

मैंने कहा, “हांजी…..वो……म…म…मेरी उम्र थोड़ी कम ही दिखती है…….”

मैं फिर दाना डाला, “वैसे मैडम….आ…आ….आप….कोनसा सब्जेक्ट पढ़ाती है…..?”

वो बोली, ” इकोनोमिक्स……….तुम्हे पसंद है ???? “

अब सेक्सोलोजी बोलती तो और बात थी……चलो इकोनोमिक्स से ही काम चला लेते है.

मैंने हाँ में इतनी जोर से सर हिलाया मानो मुझसे ज्यादा इकोनोमिक्स में किसी को इंटरेस्ट हैं ही नहीं………

वो मुस्कुरा कर बोली.” ओके……गुड….”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

तभी बस रुकी…..भाभी……मेरा मतलब है की मैडम के मम्मो ने एक बार फिर मेरे हाथ पर लोट पलोट कर ली. इसकी माँ की…….क्या माल है……यार.

मैंने कहा, “लल्लूभाई कॉलेज आ गया है……..”

वो बोली. “अरे तो चलो उतरो……” और जल्दी से खड़ी हो गयी 

मैंने मौका ताड़ा और उसको बोला, ” पहले आप निकल जाइये…..भीड़ बहुत है ना…..कहीं बस ना चल दे…….”

वो हाँ बोली और टेडी होकर सीट से बहर निकलने लगी………बस एक बात भूल गयी…..की उसके और बस के पैसेज के बिच में लल्ला बैठा है…….

उसने अपनी पीठ मेरी तरफ करके निकलने की कोशिश की…..चूँकि वो खड़ी हो चुकी थी और मैं बैठा था……

इसीलिए मेरी निगाहों के ठीक सामने थी……………मैडम की रसभरी गांड…….उनकी पतली कमर से जो मोड़ शुरू हो रहा था तो बस मुड़े ही जा रहा था………इतनी जबरदस्त गोल गोल भरी भरी गांड देखकर मेरे मन में आ रहा था की बस इसी में डूब जाऊ. मर्द क्यों गोल गांड वाली औरतों पर मरते है यह आज समझ आया.

वो बेचारी तो भीड़ में से बाहर निकलने का तरीका ढूंढ़ रही थी और मैं सोच रहा था की भगवान इसकी कैसे भी मिल जाए……

उसने देखा की ऐसे वो भीड़ में जगह नहीं बना पाएगी तो वो वहीँ पर खड़े खड़े मुड गयी…….

और अब मेरे सामने था उसकी कमर……..बेचारी ने बस की छत पर लगा डंडा पकड़ रखा था……जिस के कारन उस के पेट पर से साड़ी हट गयी थी…..उसका नंगा पेट मेरे चेहरे से कुछ इंच की दुरी पर था…..और आखिरकार वो बंगालन थी…..तो नाभि दर्शना साडी पहनना तो उसका कर्त्तव्य था……….उसकी नाभि इतनी सेक्सी थी……की एक ही पल में मुझे तब्बू की याद आ गयी.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

बिलकुल तब्बू के जैसा हल्का सा मांसल पेट था….और उसके बीचोबीच बिलकुल गोल और सुडोल…….किसी अंधे कुंए के जैसी उसकी नाभि……अभी तक तो मेरे अन्दर का जानवर अंगड़ाई ले रहा था मगर अब तो वो पापा रंजीत की तरह ” एएह…..” करने लगा. 

मैं मज़े से उसकी नाभि की गहराई अपनी आँखों से नापे जा रहा था की उसने छत पर डंडा छोड़ कर मेरी सीट के पीछे लगी रेलिंग पकड़ ली.. 

………भेन्चोद…….साला…..क्या नाभि थी…..उसके मम्मे मेरे सर पर हलके हलके टकरा रहे थे.

आज घर से निकलते हुए शायद उपरवाले का नाम लिया था…..इसीलिए आज वो भी मुझे पुरे मज़े करा रहा था…….

उपरवाला भी मूड में था……..बस वाले ने स्टाप पर बस रोकने के लिए ऐसा ब्रेक मारा की मेरा चेहरे सीधा मैडम के पेट से जा टकराया और अनजाने में ही उनकी नाभि पर मेरे होटों से एक चुम्मा पढ गया. उसके ढाई ढाई किलो की मम्मे मेरे सर पर आ गए. मैंने मौका ताड़ा और अपने हाथ आगे बड़ा कर उनकी गांड पर जमा दिए और ऐसा दिखाया मानो मैंने ऐसा बैलेंस बनाने के लिए किया.

बस रुकी……लोग उतरने लगे…..मगर मेरे लिए समय रुक गया था……..मैडम के मम्मे मेरे सर पर टिके हुए ……….मेरे होंट उनकी नाभि पर लगे हुए……और मेरे हाथ उनकी विशाल गुन्दाज़ गांड को पकडे हुए……..

स्वर्ग तो यहीं जमीं पर है प्यारे…….

स्वर्ग तो यहीं जमीं पर है प्यारे…….और अप्सरा मेरे पास है प्यारे…..

मैडम इतनी हट्टी कट्टी थी की मेरे हाथ जो उनकी विशाल गांड पर जमे थे पूरी तरह से खुल चुके थे…………मेरा बाँहों का घेरा पूरा खुलने के बाद ही मैडम का कटी क्षेत्र यानि कमर मेरी बाँहों में आ पाई थी. सही में ऊपर वाला जब देता है तो छप्पर फाड़ के ही देता है और आज के दिन तो शायद सेक्स के भगवन कामदेव का मूड हो गया था की लल्ला की लुल्ली को मज़े कराना है इसीलिए स्वर्ग से इस मुजस्सिमे को मेरी बाँहों में भेज दिया.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

बस पूरी तरह से रुक चुकी थी, और सटासट भीड़ उतरे जा रहा थी और मेरा पापी मन बार बार येही कह रहा था की मादरचोदो धीरे धीरे उतरो, थोड़ी देर इस हसीना का स्पर्श सुख और लेने दो मगर यह तो होना ही नहीं था……..मैडम मेरी बाँहों में कसमसाई और मैं तुरंत उनकी गांड पर से हाथ हटाकर पीछे हो गया और इधर उधर देखने लगा मानो कुछ भी नहीं हुआ……

मैडम धीरे से बस के पैसेज में सरकती हुयी गयी और मैं उनके जांघों के रगड़ मेरे कन्धों पर लेता रहा……काश की उनकी जांघों और मेरे कन्धों के बिच ये कपडे न होते तो उनकी गदराई मोटी मोटी जांघें मेरे कन्धों पर होती और उनकी …………..च……च……..च……..चूत………मेरे होटों के ठीक सामने खिले हुए फूल की तरह होती………जाने क्यों मुझे यकीं था की मैडम की मुनिया बिलकुल खिले हुए कमल के फूल जैसी होगी………….इतना सोचने में तो मेरे बाबुराव ने जंग का ऐलान कर दिया और सटाक से खड़ा हो गया……. इतना कड़क हो गया की जींस में उसका दम घुटने लगा………मैंने इधर उधर करके अडजस्ट किया तो बाबुराव के सुपाड़े पर रगड़ लग गयी, मेरे मुंह से आह निकल गयी और मैडम को बस की चिल्ल पो में भी मेरी आह सुने दे गयी…….मैंने जींस के अन्दर हाथ डाल कर बाबुराव को अडजस्ट किया और उनका निचे देखना हुआ…….. हैरानी से उनकी ऑंखें फ़ैल गयी…….मैंने फटाफट अपने हाथ बाहर निकाला मगर जींस में से भी खड़ा हुआ हमारा सिपाही नहीं चूका और उसने जींस में दबे दबे ही ठुनकी मार कर मैडम को सलाम ठोक दिया…….ओह shit …….

मैडम का चेहरा एक सेकंड के लिया तो बिलकुल लाल हो गया…मैंने गोरे रंग की लड़कियों को गुस्से और शर्म में लाल होते तो देखा था मगर किसी सावली बंगालन को लाल होते पहली बार देख रहा था……..हे कामदेव भगवान…….मैं आपको 11 रूपये का प्रसाद चड़ाउंगा…..बस इसकी एक बार दिलवा दो……… 

मैडम ने अपनी नज़रे बस के गेट की और कर ली और पासेज में आगे बढ़ गयी………उनके हर कदम पर उनकी गांड के गोले ऊँचे और निचे हो रहे थे और उसी के साथ मेरा लंड भी ऊँचा निचा हो रहा था. 

मेरी गांड की फटफटी धीरे धीरे चलने लगी थी……..मैडम मेरे ही कॉलेज में पढ़ने वाली है और उन्होंने मुझे मेरी जींस में हाथ डाले हुए देख लिया और वहां तक भी ठीक था मगर इस कमीने बाबुराव ने भी उनको ठुनकी सलाम दे दिया……….अब मैडम क्या सोचेगी..

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

यह सब सोचते सोचे भी मैं उनकी गांड से नज़रे नहीं हटा पा रहा था…..ऐसा लग रहा था मानो उनकी गांड में एक चुम्बक है जो मुझे खिंच रहा है……..फटती हुयी गांड की फटफटी पर मेने क्लच दबा रखा था………मैडम बस से निचे उतरने लगी

मगर अचानक वो पलटी और उन्होंने सीधा मेरी आँखों में देखा और धीरे से मुस्कुरा दी…….

क्लच छूट गया और लंड की डुगडुगी दौड़ पड़ी……

कामदेव भगवान………तुस्सी ग्रेट हो.

मैडम तो लंड पे सितम करके उतर गयी और मैं चूतिये जैसे उनकी गांड देखने के चक्कर में उतरना ही भूल गया और बस अपने बाप की तो थी नहीं की अपुन जब तक नहीं उतरे बस रुकी रहे……….बस चल पड़ी……मैं खड़ा होकर आगे भागा तो कंडक्टर बोला, “ओ भाई साहब बैठ जाओ गिर जाओगे…..”

अब लंड……. गिरना हीबाकि था……कॉलेज निकल गया था और यह भेन्चोद अगले स्टाप तक किसी VIP के लिए भी नहीं रुकने वाला था. मैंने दरवाजे पर खड़े खड़े बाहर देखा, बस इतनी तेज़ भी नहीं चल रही थी की कूद न पाओ……….यूँभी आजकल अपने सितारे तेज़ चल रहे थे….मैं कूद गया.

मेरे पैर ज़मीन पर टिके और अगले ही पल मैं गुलाटी खाता हुआ सड़क पर आ गिरा……….घुटने छील गए…..कोहनी पर रगड़ लग गयी…..इसकी माँ की चूत…..

भेन्चोद बस का कंडक्टर बस के दरवाजे से लटका हुआ मुझे गाली दे रहा था और आज पास खड़े लोग खी खी हँस रहे थे….इनकी माँ का भोसड़ा……गांड के बल गिरने से गांड भी दुखने लगी थी……कोहनी पर छील जाने से हल्का सा खून आ गया था……अपनी चुतियापने पर अपने आप को गाली देते देते मैंने समझ लिया की अब कोलेज को मारो गोली घर ही जाना पड़ेगा………

ऑटो किया और सीधा घर आया………घर में लंगड़ाते लंगड़ाते घुसा और माँ को आवाज़ लगाई तो चाची किचन से बाहर आई और मेरी हालत देखकर चिल्ला पड़ी, 

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

“हाय राम लल्ला…….क्या हुआ………????”

मैंने कराहते हुए कहा, “क क क कुछ नहीं च च चाची………”

“हाय राम…..कुछ नहीं……..देखो तो……कितनी लगी है…….कोहनी छील गयी……..लंगड़ा भी रहा है…….क्या हुआ रे……बताता क्यों नहीं…..?”

मैंने थोडा और कराहते हुए कहा, ” क क कुछ नहीं…..एक्सिडेंट हो गया था…….”

चाची बोली, ” झूट मत बोल……जरुर किसी से झगडा कर के आया है………बता…..”

अब लंड…….सच बोलो तो इनको झूठ लगता है……मैंने कुछ नहीं कहा……और चेयर पर बैठ कर अपना पैर दूसरी चेयर पर रख दिया……

चाची मेरे पास आई और बोली….”राम…….मुझे दिखा……खून ज्यादा तो नहीं आया……..”

एक तो भेन्चोद पूरा अंग अंग दुःख रहा था उसके ऊपर से चाची की पटर पटर बंद ही नहीं हो रही थी…….मैंने कुछ जवाब ही नहीं दिया. चाची निचे फर्श पर उकडू बैठ कर मेरी जींस ऊपर करने लगी……..जींस से मेरे छिले हुए घुटने पर रगड़ लगी और मेरे मुंह से चाची के लिए डांट निकलने वाली ही थी की मेरी आवाज़ मेरे गले में ही घुट गयी.

चाची के उकडू बैठने से उनकी साड़ी उनके घुटनों से ऊपर तक उठ कर उनकी दोनों टांगो के बिच इकट्ठी हो गयी थी और रूम की छत पर लगी लाइट का फोकस सीधा चाची की चिकनी जांघों के बिच चुप कर बैठी उनकी चिकनी चमेली पर पड़ रहा था.

भेन्चोद यह औरत चड्डी पहनना कब सीखेगी.

एक झटके में मेरा सारा दर्द गायब हो गया.
जैसे कुत्ता हड्डी देखकर लार टपकाने लगता है वैसे ही मेरा बाबुराव लार टपकाने लगा………चाची की मुनिया अभी भी चिकनी चपक थी……..चाची मेरी जींस ऊपर करने की कोशिश कर रही थी और मैं चाची की मुनिया का दीदार करने की………

कीड़ा कुलबुलाने लगा था………

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैंने धीरे से सिसकारी भरी और एक दम जोर से आह कहकर अपने पैर को झटका दिया……

चाची बोली, “हाय राम……दुख क्या लल्ला……..मरी तेरी यह पेंट भी तो इतनी टाईट है………घाव पर बार बार रगड़ मार रही है……..राम राम……घुटने पर से तो पेंट भी घिस गयी है……खून आ रहा है और घाव पर मिटटी भी लगी है……..इसको धो ले……..नहीं तो इनसेक्सशन हो जायेगा…….”

दर्द से हाय हाय करते हुए मैंने पूछा, ” क्या क्या…….क्या हो जायेगा……..”

चाची बोली, ” अरे इनसेक्सशन………”

अब मैं समझा……मैंने कहा, “अरे चाची वो इनफेक्शन होता है ना की इनसेक्सशन………..इन”सेक्स”शन का मतलब तो कुछ और ही हो गया …….”

चाची अपनी ऑंखें गोल गोल करके बोली, ” हैन…….. इनसेक्सशन का क्या मतलब है…….?”

मैंने कुलबुलाते हुए कीड़े को कंट्रोल किया और कहा, ” च च च चाची इसका मतलब है……….सेक्स करना………”

चाची गंवार थी पागल नहीं………उन्होंने हाय बोलकर अपने मुंह पर हाथ रख लिया और खी खी हंसने लगी………

मैंने भी चूतिये जैसे हंसने लगा मगर मेरी नज़रे अब भी उनकी साड़ी के बीच झांकी उनकी मुनिया पर थी……….चाची ने मेरी नज़रो का पीछा किया और जैसे से निचे देखा उई माँ बोल कर साड़ी से अपनी मुनिया को ढक लीया……

पर्दा गिर चूका था. 

किस्मत तो मेरी गधे के लंड से ही लिखी थी मगर उस मादरचोद गधे को जरुर शीघ्रपतन की बीमारी थी……..लाइफ में जैसे ही मज़ा आने लगता माँ चुद जाती.

अच्छी खासी लौंडी पटी तो माँ चूदी………..

बस में पास में आकर मैडम बैठी तो माँ चूदी…….

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

अब चाची की मस्त चिकनी मुनिया दिखी तो फिर से ………माँ चूदी.

मैंने मन ही मन सोचा की बॉस…..अब किस्मत पर भरोसा नहीं……कुछ कोशिश खुद करनी पड़ेगी.

मैंने जोर से आह भरी. चाची घबरा कर बोली, “क्या हुआ लल्ला……? जोर से दुःख रहा है क्या…..हाय राम…..कहीं हड्डी तो नहीं टूट गयी…….”

मैंने आह भरते भाते पूछा, “च च चाची…….माँ कहाँ है……..”

चाची बोली, “राम…..भाभी जी तो दोपहर से ही मंदिर गए है………..शाम को ही आये शायद……कोई माता जी आई है दिल्ली से………सत्संग है…..”

मैंने फिर हाय कर दी…….चाची बोली, “अरे राम……कहाँ दुःख रहा है बताता क्यों नहीं………..”

मैंने ना में सर हिला दिया………और उठ कर अपने रूम में जाने के कोशिश करने लगा……अब की बार तो भेन्चोद सच मुच गांड से लेकर पैर तक ऐसा दर्द हुआ की मैं लड़खड़ा गया. चाची ने झट उठ कर मुझे सहारा दिया…….मैंने भी बड़े आराम से उनके गले में हाथ डाल दिया. चाची धीरे धीरे से मुझे मेरे रूम में ले जाने लगी. मैं पूरी तरह अपने वज़न चाची पर डाल कर ही चल रहा था…….मेरा हाथ तो उनके कंधे पर था ही…..मैंने थोडा सा उसको निचे कर के उनके मम्मे के थोडा सा ऊपर टिका दिया. 

चाची धीरे से मुझे चला कर रूम में ले जा रही थी और मैं हर कदम के साथ अपने हाथ को निचे लेकर आ रहा था……..कुछ ही कदम में मेरा हाथ जन्नत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था. मेरा हाथ उनके मम्मे पर लैंड कर चूका था. अगले कदम पर मैं लड़खड़ा गया और मैंने सहारे के लिए चाची पर झुकते हुए उनके मम्मे को दबोच लिया. चाची एक दम चिंहुक गयी और बोली, “हाय राम…….हाथ थोडा ऊपर कंधे पर रख ना…….”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैंने अनसुना करके चलते चलते फिर उनके मम्मो को धीरे से मसल डाला…….एक दम तने हुए गुब्बारे थे……..भेन्चोद…..मेरा बल्लू चाचा पूरा चुतिया है…….

चाची जैसे मेरी बीवी होती तो दबा दबा कर अभी तक रुई के गोले जैसे नरम कर देता……मगर उस गंडमरे को तो दुकान पर गांड मराने से ही फुर्सत नहीं थी.

भोसड़ी का…..शादी के इतने साल बाद एक बच्चा पैदा नहीं कर पाया. 

चाची ने अपने कंधे को ऊँचा करके मेरा हाथ अपने मम्मे पर से हटाने की कोशिश की…….मगर मैं तो पूरा फार्म में था……..जैसे चुम्बक लोहे कर चिपक जाता है….वैसे ही मेरा हाथ उनके मम्मे पर चिपक गया था……उन्होंने फिर से हटाने की कोशिश की तो मैंने उनके निप्पल जो इतनी सी देर में कड़क हो गए थे……को अणि हथेली से धीरे से रगड़ दिया……चाची के मुंह से तुरंत एक सिसकारी निकल गयी

मैंने भी अनजान बनकर पूछा, “क्या हुआ चाची…….”

चाची बोली, ” हैन…….कुछ नहीं……व.,….व…..वो…….पैर में बिछिया चुभ गयी….”

हाय रे…….बिछिया……

अब तो मेरा पूरा मुड सेट था……बाबुराव घंटाघर के घंटे जैसा टनटना रहा था…..घर में कोई नहीं था…….आज तो चाची की कह के लूँगा.

अफ़सोस की सफ़र छोटा सा था……रूम में आने के बाद चाची ने मुझे बेड पर बिठा दिया…..हालाँकि मैंने बैठते बैठते भी एक बार चाची के मम्मे को अच्छे से मसल लिया मगर अब मुझे मज़बूरी में बेड पर बैठना पड़ा. 

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

चाची मुझे बेड पर बिठा कर बोली, “ला…..बता कहाँ दर्द है…….”

मैंने ना में सर हिलाया और फिर जोर से हाय हाय करने लगा.

चाची बोली, ” राम राम…..दर्द से मारा जा रहा है……मगर बता नहीं रहा……..बताता है की नहीं……बुलाऊ डाक्टर साहब को…….”

अब मैं कोई दूध पीता बच्चा तो था नहीं की ” बुलाऊ डाक्टर साहब को ” सुनके दर जाता मगर हाँ मेरी इंजेक्शन से बहुत गांड फटती थी………..मैंने सोचा अगर चाची ने डॉक्टर को बुला लिया तो भेन्चोद सीन बिगड़ जायेगा.

मैंने कहा, ” न न नहीं…..च…च….चाची…….वो…….मेरे घुटने पर और जांघ पर रगड़ लगी है ना…..”

चाची बोली, “अरे तो मरे…….वोही तो कह रही हूँ………घाव साफ़ करले…….”

मैंने कहा, ” चाची……मुझसे बैठते तो बन नहीं रहा……साफ़ क्या करूँगा……..आप जाओ मैं लेट जाता हूँ……..”

चाची झट से बोली, “अरे….राम……बगैर साफ़ करे लेटेगा तो इनसेक्सशन नहीं हो जायेगा……..??”

मैंने हाय हाय करते हुए और आहे भरते हुए कहा, ” चाची इनसेक्सशन नहीं……इन्फेक्शन, …………………….. “

चाची बोली, “फालतू बात छोड़…….अपनी पेंट उतार…….”

वाह रे भगवन कामदेव……..चल पड़ी.

मैंने कुछ नहीं कहा और धीरे से अपनी जींस का बटन खोला……….और निचे के बटन खोलने लगा…….चाची आंखे फाड़े हुए देख रही थी…

” हाय राम…….तेरी पेंट में चेन नहीं है रे…….चेन की जगह पर भी बटन लगे है…….??????”, चाची ने पूछा.

मैंने जींस नीचे करते हुए कहा, “चाची मैं चेन वाली जींस नहीं पहनता…….आपको याद है छोटी बुआ की शादी में मेरी…….चेन में फंस गयी थी.”

चाची ने ऑंखें गोल करके हैरानी से पूछा, ” क्या फंस गयी थी…….””

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैंने सकपका कर कहा, “अरे…..व…..वो……म….म…..म……मेरी…….नुन्नी………”

चाची जोर से ठहाका मारकर हंस पड़ी………मैं अपनी अंडरवियर में बेड पर बैठा था और वो मेरे सामने खड़ी थी. उनको इतनी जोर से हंसी आ रही थी की वो आगे झुक गयी थी और उनका हाथ मेरी नंगी जांघों पर टिका था………वो बेतहाशा हँसे जा रही थी…….उनका पल्लू मौका देखकर तुरंत गिर गया और उनके मम्मे ब्लाउस में से आखें फाड़ फाड़ के बाहर देखने लगे.

पता नहीं की आप लोगों को कभी यह सौभाग्य प्राप्त हुआ की नहीं……मगर कोई औरत ऐसी हालत में आप से सिर्फ कुछ इंच की दुरी पर हो तो उस के जैसा नजारा तो कुतुबमीनार की छत से भी नहीं दीखता.

चाची ने हमेशा की तरह ब्रा पहनी ही नही थी.चाची के मम्मे……..दो बेचारे बिना सहारे……..इधर उधर डोल रहे थे और मेरी गर्दन भी उनके साथ साथ इधर उधर हो रही थी मानो मैं कोई टेनिस का मेच देख रहा हूँ. 

चाची ने अपनी हंसी को कंट्रोल किया और अपना पल्लू सही करने लगी मगर पल्लू भी कामदेव बाबा के कंट्रोल में था. बार बार सरक रहा था…..आखिर चाची ने उसको अपने हाल पर छोड़ दिया और धीरे धीरे से मेरी जींस को उतारने लगी. मैंने भी पूरी एक्टिंग कर रहा था……थोड़ी थोड़ी देर में…..उह….आह…..आउच…..
मगर मेरी नज़ारे चाची के मम्मो से नहीं हट पा रही थी. ठीक ऐसे मानो अकाल का भूखा जिसने रोटी नहीं देखी हो उसके सामने रस मलाई आ जाये. चाची ने मेरी जींस मेरे पैरो से निकल कर साइड में रख दी. और मेरे घावों का मुआयना करने लगी…..और मैं तो उनके मम्मो का मुआयना कर ही रहा था…….

चाची बोली, “लल्ला…….जा के बाथरूम में तेरे घुटने और बाकि चोट की जगह धो ले……..”

मैंने चाची के मम्मो को टापते हुए कहा, “चाची……म..म..म..मुझसे तो उठा भी नहीं जायेगा…….मैंने बाद में कर लूँगा……”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

चाची बोली, “अरे राम …….इतना दुःख रहा है क्या…..रुक…….मैं बाल्टी लाती हूँ……”

यह कहकर वो उठी और बाथरूम में जाने लगी……….

चाची का पल्लू………उनके कंधे पर नहीं……ज़मीन पर उनके पीछे घिसटता हुआ जा रहा था. उनके गांड के गोले ऐसे ऊँचे नीचे हो रहे थे जैसे वर्ल्ड कप फायनल में धोनी की बीवी साक्षी बार बार कूद रही थी.

कामदेव भगवन………आप को ग्यारह का नहीं एक सौ एक का प्रसाद चढ़ाउंगा .

चाची जैसे ही बाथरूम में घुसी…मैंने फटाफट अपनी जींस को निचे सरकाया……..ठरक के मारे मेरे दिमाग को दर्द का ज़रा भी एहसास तक नहीं हुआ. जींस निकल कर मैं सिर्फ अपने अंडरवियर में ही बेड पर पीछे की तरफ हाथ टिका कर टाँगे फैला कर बेड के निकर पर बैठ गया……..आगे क्या होगा यह सोच सोच कर मेरे रोम रोम में सनन सनन हो रही थी. 

चाची बाथरूम से बाल्टी और एक टोवल ले कर आई और मेरे सामने ज़मीन पर बैठ गयी. चाची पालकी मार कर बैठी थी और उनका बेशरम पल्लू पूरी बेपरवाही से निचे ही पड़ा था और उनके गोल गोल मम्मे ब्लाउस में से टुकुर टुकुर मुझे ही देख रहे थे. चाची ने टोवल गीला किया और मेरे घुटने पर लगी चोट पर छुआया……….मेरे मुंह से आह निकल गयी….चाची को लगा की मुझे दर्द हुआ…..बेचारी ने अपने हाथ हटा कर पूछा…

“राम लल्ला……दुखा क्या…….मरी लगी भी तो ज्यादा है……मिटटी तो साफ़ करनी ही पड़ेगी……थोडा जी कट्ठा कर ले…..”

अब चाची को क्या बोलता की जी कट्ठा होने की बजाये मेरा बाबुराव कट्ठा होने लगा है. चाची ने फिर से टोवल लगाया………दर्द तो हुआ मगर एक अजीब से सनसनी भी मेरे बदन में दौड़ने लगी……….मेरी नज़रे बार बार चाची के मम्मो की तरफ जा रही थी. हालाँकि मैं चाची को दो बार ठोक चूका था….मगर वो ऐसे ही जताती थी मानो कुछ भी न हुआ हो………उनके इस बर्ताव से मुझे थोडा डर भी लगता था……और उसके उपर में गांड फट तो था ही.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैं चोर नजरो से चाची के बदन को निहार रहा था. और चाची बड़े प्यार धीरे धीरे सहला सहला कर मेरे घावो को साफ़ कर रही थी. 

कीड़ा कुलबुलाने लगा ……

मैंने अपनी टांगो को और फैला लिया और चाची से कहा…..” च च चाची…..म.मम….मेरी…….जांघ पर भी लगी है……..”

चाची ने अपना ध्यान मेरी जांघ पर फोकस किया और उनकी नज़र सीधी मेरे तने हुए तम्बू पर जा पड़ी. 

चुदाई की दुनिया का दस्तूर है की ढीले लंड और सूखी चूत का कोई ग्राहक नहीं होता……..

मगर मेरा बाबुराव तो माशा अल्लाह पूरा तना हुआ था और मुझे यकीं था की बाबुराव को देखते ही चाची की मुनिया भी लार लपकने लगी होगी. 

चाची ने कुछ सेकण्ड तो मेरे खड़े बाबुराव को देखा जो अंडरवियर के अन्दर कसमसा रहा था…..फिर उन्होंने अपना ध्यान मेरी चोट की तरह लगा लिया…….

चाची आगे झुक कर मेरे घावो को साफ़ कर रही थी…….उनकी गरम गरम सांसें मेरी जांघों की संवेदनशील चमड़ी पर टकरा रही थी और उनके मम्मे सामने से दबने के कारण ब्लाउस के अन्दर से उफन उफन के बाहर आ रहे थे. मेरे दिमाग में येही कीड़ा कुलबुला रहा था की कैसे चाची की लूँ…..

चाची के मम्मे देख देख कर मेरी हालत टाईट पर टाईट होती जा रही थी…………क्या करू और कैसे करू मेरी समझ में नहीं आ रहा था……इच्छा तो हो रही थी की चाची को पकड़ के बिस्तर पर पटक के चोद डालू मगर मेरी फटती हुयी गांड का क्या इलाज…..?

मेरी परेशानी बाबुराव ने दूर कर दी…….उसने अपने मुंह अंडरवियर से थोडा सा बाहर निकल लिया. और तभी चाची ने कुछ कहने के लिए अपने मुंह ऊपर किया और अपुन के सिपाही ने अंडरवियर के इलास्टिक में से अपने मुंह बाहर निकाले हुए चाची को सलाम ठोंक दिया. 

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

चाची की ऑंखें गोल की गोल ही रह गयी. अब मेरी गांड भी फट रही थी और मुझे हंसी भी आ रही थी. चाची का मुंह बाबुराव से मुश्किल से 6 -7 इंच की दुरी पर था. चाची चाहती तो मेरी अंडरवियर को निचे कर के गप्प से बाबुराव को अपने मुंह में ले सकती थी

मगर इंसान जैसा सोचे अगर वैसा ही होने लगे तो बेचारी हर कोई अपनी पड़ोसन को ठोक ले केटरीना की चुत का भोसड़ा सेकंडो में बन जाए, अंबानी दिवालिया हो जाये और अपना पप्पु पास हो जाये 

मैने भी सोचा की चलो देखते है की होता क्या है ?

चाची ने बाबूराव को तिरछी नज़र से देखा और पूछा, “क्यो रे लल्ला…….ये तो बता की तू बस से गिरा कैसे ?? हैं…..इधर उधर छोकरियों को टाप रहा था क्या रे…….? मारी आजकल को छोरिया भी तो बेहया बन के घूमती हैं……वो सामने वाले जैन साहब की छोरी का दुपट्टा देखो जरा……सुबह झाडू लगती हैं तो पूरा गिर जाता हैं……..बेहया को कोई होश ही नही रहता……उसका पड़ोसी वो कपूर…….६० साल का होगा……अपनी बेटी की उमर की लड़की को ऐसे घूरता है जैसे की वहीं पर चो….. “

चाची एक दम से रुक गयी…….हाय चाची बोल ही देती…….

चाची ने अपना मुंह नीचे कर लिया…….

अपुन का बाबुराव तो फुल फार्म में था…..थोड़ी हिम्मत की…

“चाची……वो कपूर अंकल क्या…….कर देते…..”, मैंने धीरे से पूछा.

चाची ने टोवल पटका और गुर्राई ” अरे राम……बेहया……मेरी तो जबान फिसल गयी थी……बेशरम क्या सुनना है तुझे……तू भी भूखे कुत्ते की तरह उसको देखता हैं…..आने दे तेरी माँ को आज”

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

अपनी गांड की फटफटी चल निकली….

“म…म….म…..म……मेरा……म….म….मतलब…..व्…व्…वो नहीं था……..म……मेरा……म…..मतलब था की…….वो……..मैं………..”, मैं हकलाया. मेरी फूल फट चुकी थी.

चाची बोली, ” हाँ … हाँ…..बोल…..हरामी…..फालतू बातों के अलावा कुछ सूझता नहीं क्या…..
मुझे तो लगता है….की बस से भी किसी छोकरी तो टापते टापते गिरा होगा……”

अब मैं क्या बोलता…..की चाची छोकरी नहीं…..कुदरत का नायब नमूना था…..शानदार मुजस्सिमा था.

मैंने बात संभाली, ” न…न…..नहीं चाची……आप…..गुस्सा क्यों हो रही हो……..म…म….मैं…..तो…”

चाची ने बात काटी, “ठीक है ठीक है……वैसे भी जैन साहब की लड़की में देखने लायक कुछ है भी नहीं……, मरी लकड़ी जैसी दुबली पतली तो है……जाने अपने पति को कैसे खुश रखेगी…..पता नहीं राम…..शायद आज कल के लड़के भी ऐसी दुबली पतली लडकियों को ही पसंद करते है”

चाची ने बोल्लिंग शुरू कर दी थी….अब मुझे भी क्रिस गेल के जैसा खेलना था.

मैंने प्लेट किया, “चाची…..ऐसी नहीं है……लड़के तो भरी पूरी……म…म….म….मेरा मतलब है की तंदुरुस्त लडकिय ही पसंद करते है……”

चाची ने गुगली डाली, “छोड़ रे लल्ला…….मुझे देख…….थोड़ी सी मोटी क्या हुई …तेरे चाचा तो मुझे देखते तक नहीं…..”

ये कहकर चाची ने मेरी जांघ के जोड़ पर…….जी हाँ जनाब…..मेरे गोटों पर टोवल रगड़ दिया.

दिल की धड़कन तुरंत 200 हो गयी…….मैंने बोलने की लिया मुंह खोला…..मगर ठरक से मेरा गला सुख गया था…..भेन्चोद आवाज़ ही नहीं निकली……मैंने थूक गटका….और बल्ला घुमाया.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

“अरे….च….च….चाची……आप भी कैसी बात करती हो…….आप…..क….क….कहाँ मोटी हो…..”

चाची ने ऑंखें नचाई और बोली, “चल अब रहने दे…..मुझे सब पता है……उस दिन तो हाथ लगा लगा कर बता रहा था…..की मेरे कुल्हे मोटे है……और जाने क्या क्या “

चाची ये कहते कहते आगे झुक गयी और उनके मम्मे अपना सर ब्लौस में से निकलने लगे……
अपुन का बाबुराव तो पहले से ही थोड़ी से मुंडी अंडरवियर में से निकल चूका था.

आज तो IPL 20 -20 होके रहेगा .

चाची की नज़ारे बाबुराव पर पड़ी. 

“हाय राम…..देखो तो बेशरम……अन्दर कर इसको….”

“च…च….च….चाची अन्दर ही तो है……”, मैंने चाची को उकसाया.

चाची अपनी निगाहें बाबुराव पर जमाये हुए बोली, ” हैं….कहाँ से अन्दर है……बेशरम….लल्ला……तू बहुत बदतमीज़ हो गया है………अन्दर कर इसको”

अब तो जो होगा देखेंगे…..

“च…च…चाची……सची में और अन्दर नहीं होगा……जब यह…..ख…..ख….खड़ा होता है तो बाहर ही निकल आता है.”

चाची बाबुराव को ऐसे देख रही थी जैसे बिल्ली मलाई को देखती है.

चाची ढिठाई से बोली, “राम…..अंदर कैसे नहीं होगा……ठहर……टांगे फैला तो”

चाची बाबुराव को खुद…..अपने हाथ से…………… अंडरवियर में डालने वाली थी.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

यह सुनकर ही हरामी बाबुराव ने जो ठुनकी मारी है की क्या बताऊ ? चाची ने अपने दोनों हाथ मेरे घुटनों पर रखे और दरवाजे की तरह मेरी टांगे खोल दी. चाची का पल्लू तो गिर हुआ था ही…..उनके मम्मे छलक
छलक के बाहर आ रहे थे…..भेन्चोद इतना छोटा ब्लाउस पहनती है की ब्रा की तो जरुरत ही नहीं.

मेरी भूखी निगाहें चाची के मम्मो पर चिपकी हुयी थी……बस में बंगाली मैडम को देख कर पहले से ही माहोल बना हुआ था……..चाची ने बाबुराव का अंडरवियर के ऊपर से मुआयना किया और बोली, 

“अरे….लल्ला…….ये मरे सफ़ेद कच्चे क्यों पहनता है रे……..इतने छोटे छोटे से है……दाग धब्बे भी जल्दी दीखते है” 

मैं सकपकाया, ” च…च….चाची यह तो जोकी की अंडरवियर है………”

चाची ने ऑंखें नचाई, ” होगी मरी….जाकी फाकी…..सबसे बढ़िया तो तेरे चाचा की है……अमूल की लम्बी अंडरवियर…….भूरे नीले काले रंग की…..न दाग दिखे न धब्बे…….और उसमे से यह ऐसे दीखता भी नहीं”, कहकर उन्होंने मेरे बाबुराव को सहला दिया. 

ऐसा लगा किसी ने मेरे बाबुराव पर बिजली का नंगा तार छु दिया हो. मैं उछल पड़ा …..चाची ने ऐसे जताया मानो कुछ न हुआ हो…..वो भोली भली बनकर मेरी आँखों में देख रही थी……मगर उस हरामन का हाथ मेरी जांघ पर धीरे धीरे से सहला रहा था. 

मेरे मन में तो आ रहा था की चाची को यही पटक के साड़ी उठाऊ और भेन्चोद गाँव के सांड की तरह अपना लंड पेल के फकाफक चोद दू. थोड़ी गांड तो फटती ही थी की चाची का भरोसा नहीं……२ बार ठुकने के बाद भी वो यूँही जताती मानो कुछ न हुआ हो……

मैंने कही पढ़ा था की बिल्ली अक्सर चूहे को पकड़ के उसके साथ खेलती है…..आखिर में तो खाना है मगर बार बार छोड़ देती है….चूहा यह सोचकर भागता है की चलो जान बची…..मगर बिल्ली फिर से पकड़ लेती है और आखिर में खेल से बोर होकर चूहे को खा लेती है.

चाची भी मेरे साथ खेल रही थी…..यह चाची भी जानती थी और मैं भी….की हमारे बिच क्या हुआ था….मगर चाची का अनजान बनना……बिल्ली के खेल जैसा था…….अगर मैं अभी चाची को पकड़ने की कोशिश करता तो यक़ीनन वो सती सावित्री बन जाती….मुझे डांटती या यु कहे मेरी गांड की फटफटी चलाती……और मुझ से ऐसे चूतिये जैसे बैठते बन नहीं रहा था.

यह चूहे बिल्ली का खेल बहुत चल गया…….खून का दौरा लंड से दिमाग में जाने लगा……चाची चुदेगी मगर अब खेल चाची का नहीं लल्ला का चलेगा.

अब मेरे दिल और दिमाग में जंग होने लगी, या यूँ कहे की बाबुराव और दिमाग में जंग होने लगी. बाबुराव ठुनकी मार मार के बोल रहा था की भाई पकड़ इस भेन की लोड़ी को और इसकी मुनिया की चुनिया बना दे और दिमाग बोल रहा था की चाची बगैर नाटक नौटंकी करे मानेगी नहीं. मैंने हिम्मत बटोरी और चाची से कहा, 

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

“च….च….चाची……आप जाओ…..म…..म…..म….मैं…चोट…साफ़ कर लूँगा…….वैसे भी मुझे नहाना है”

चाची का मुंह खुला का खुला ही रह गया. चाची मुझे तड़पा कर मजे करना चाहती थी मगर चाची के खेल में लोचा हो गया था. एक दो सेकण्ड तो चाची ने मुझे देखा और फिर बाबुराव को…..अपनी नज़रों से सहलाया.

मेरा मन फिर से डोलने लगा……हाय…..इसकी……तो………..ले…….ही…….लूँ………..मगर मैंने अपने आप को संभाला. चाची मेरे पैरों के पास से उठी…..उठने से उनके दोनों मम्मे फिर से झूल गए….मेरी नज़रे उन पर ही टिकी थी…….अचानक चाची ने मुझे देखा…….और मुझे मम्मो को टापते हुए पकड़ लिया…..चाची ने तिरछी मुस्कान मारी…………हाय लौड़ा मेरा घायल हो गया.

चाची ने अपने पल्लू को ठीक किया और अपनी कमर लचकाते हुए मेरे रुम से बाहर चली गयी. 

अगर चाची को तडपाने का गेम खेलना था तो मैं अभी अब इस खेल के नियम समझ रहा था.

मेरे मोबाईल की घंटी बजी…..मैंने देखा तो माँ का फोन था.

“हल्लो……लल्लू……..तेरी चाची को बोल देना……मैं गुप्ता आंटी के यहाँ जा रही हूँ…….शाम तक आ जाउंगी”

मैं हाँ हूँ कर के फोन रख दिया……अब मैं और चाची मैदान-ए-जंग में अकेले थे.

मैंने धीरे धीरे करते करते अपनी जींस पूरी उतारी…..भोसड़ी की रगड़ से घुटना पूरा छील गया था. 
कपडे उतारते हुए येही सोच रहा था की चाची के साथ ऐसा गेम खेलु की यह बार बार की चूहा बिल्ली वाली कहानी ख़तम हो. चुल तो चाची को बहुत थी मगर खुल के न वो सामने आ रही थी और न ही मैं.

सारे कपडे खोल के टोवल बांधा और बाथरूम में घुसा. टॉवल टांगा और कमोड का ढक्कन लगा कर उस पर बैठ गया, मैंने सोचा चोट का अच्छे से मुआयना कर लूँ……भेन्चोद…..ऐसा दर्द हो रहा था की बस…….

टांगो पर जगह जगह मिटटी और कीचड़ लगा था……मैंने सोचा नल के निचे करके धोना पड़ेगा…..
अंडरवियर उतरा तो बाबुराव बिना सहारे झूल गया……मुझे हंसी भी आई और गुस्सा भी….चाची के चूहा बिल्ली की खेल में बेचारे बाबुराव के साथ KLPD हो गयी थी. मैंने बाबुराव को मुठी में लिया…और मेरा वफादार सिपाही तुरंत सर उठाने लगा….अब चाची की मुनिया मिलने का तो ठिकाना था नहीं….मैंने धीरे धीरे अपने बाबुराव के सर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया……म्मम्मम…….मज़ा आने लगा था……आनंद की अधिकता से मेरी ऑंखें बंद होने लगी…….मुझे चाची के हिलते झूलते मम्मे और लचकती गांड ही दिख रही थी. मेरा हाथ तेज़ी से चलने लगा……मद्धम सिस्कारिया मेरे मुह से निकलने लगी…..आह्ह……सस……स्स्स्स

तभी भड़क से दरवाजा खुला और चाची बोली, “लल्ला…..वाशिंग मशीन में कपड़े डालने थे और साबुन……हाय राम……क्या कर रहा है रे निर्लज्ज……..बेशरम….”

भेन्चोद….इंसान अपने बाथरूम की तन्हाई में चैन से मुठ भी नहीं मार सकता क्या ??? 

मैं तो मारे डर के उछल ही पड़ा…..गांड की फटफटी चल पड़ी 

गांड फट के गले में आ गयी.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

मैंने तुरंत बाबुराव को दोनों हाथ से छुपाया और कमोड पर ही बैठ गया. मैं हडबडाया हुआ बोल. 

“भेन……म…..म….मेरा मतलब है की च…च…चाची……दरवाजा नॉक तो कर देते…..आपको बोल के तो नहाने आया…….था………”

चाची ऑंखें नाचते हुए बोली, ” वाह वाह……बड़ा आया दरवाजा नॉक करने वाला……क्या कर रहा था रे बदमाश…….”

मैंने नज़रे नीची कर ली……चाची फिर बोली, “बाहर बैठा बैठा तो बड़ा आह ऊह कर रहा था…..और यहाँ अन्दर क्या गुल खिला रहा है”

“च…च….च…..चाची…..मुझे यहाँ पर भी लगी है शायद…..वो ही देख रहा था…..”, मैंने बात संभाली

“रहने दे रे…..बड़ा आया…..लगी….है……चल नहा ले….”

“अरे…. आ….आ….आप तो बाहर जाओ….”

“हाय राम……मैं बाहर चली गयी तो इन कपड़ो का क्या होगा ?…….रात भर से भीगे पड़े है…..बदबू मारने लगेंगे……तू तो एक घंटा नहाने में लगा देगा ……..तुझे मुझसे क्या…….मैं मेरा काम करती हूँ….तू तेरा काम कर….”

इसकी माँ का…..साकी नाका….यह साली चाहती क्या है…….???

चाची निचे झुक कर बाल्टी में से कपडे निकाल रही थी….उनकी पीठ मेरी तरफ थी…..निचे झुकने से उनके गदरायी……गोल……फुटबाल जैसी गांड उभर कर आ गयी थी और मुझसे सिर्फ एक फुट की दुरी पर थी.

हे भगवान….क्यों मेरे सब्र का इम्तेहान ले रहा है…..

बाथरूम तो छोटा सा थी था…..एक कोने में कुर्सी जैसा अंग्रेजी कमोड था जिस पर मैं विराजमान था…..और दुसरे कोने में वाशिंग मशीन रखी थी… वाशिंग मशीन और कमोड के बीच बाल्टी थी जिसपर चाची झुकी थी……..

मैं अभी तक बाबुराव को हाथों में दबाये बैठा था…..और चाची झुकी हुयी बाल्टी में कपडे निकाल रही थी, ऐसा करने से उनके विशाल चुतड जेली जैसे हिल रहे थे….और अपुन का बाबुराव भी सिग्नल केच कर रहा था.

ऐसा लग रहा था मानो चाची की गांड एक बीन है और मेरा बाबुराव सपोला….चाची की गांड हिलती और उसके साथ मेरा बाबुराव ठुनकी पे ठुनकी मारता….कभी कभी फुफकार भी देता.

मेरी नज़र चाची के कुलहो पर ही थी तभी अचानक चाची पीछे हुयी और उनके कुल्हे मेरे चेहरे से टकरा गए……..म्मम्मम्म……..क्या नरम और क्या गरम……..बाबुराव में नेटवर्क के सारे टावर आ गए थे…

चाची ओहो ओहो करके शरमा के हंसने लगी……..मेरा तो हाल बुरा हो गया था.

चाची बोली…” अरे लल्ला……नालायक नहाता क्यों नहीं रे……..यहाँ बैठा बैठा क्या कर
रहा है……जल्दी कर…..तेरी माँ आने वाली होगी……”

“म…म….मम्मी तो……गुप्ता आंटी के यहाँ गयी है…….शाम को आएगी……”

चाची धीरे से मुड़ी और मुझे देखा……मानो कुछ सोच रही हो…….बिल्ली अपने शिकार को नाप तोल रही थी.

“चलो……फिर तो सारे कपडे भी धो ही लेती हूँ…..अब पूरा दिन करुँगी क्या…….ला…..तू भी हाथ बटा……..”

मैंने धीरे से कहा, “च…च….च….चाची आप बाद में धो ले न…..म…म…मैं नहा लूँ…..??”

“अरे राम…..नहा लेना….क्या जल्दी पड़ी है…….ला….तेरी अंडरवियर दे….धो दू …..”

मेरी अंडरवियर तो नल के निचे पड़ी थी…..मगर मैं कमोड से उठ जाता तो…..चाची की मेरे टावर की लोकेशन मिल जाती……बाबुराव तो जैसे फनफना रहा था…..मैंने दोनों हाथों से अपने सामान को ढक रखा था, चड्डी उठाता तो …….पर्दा उठ जाता…….

“च…च….चाची…..आ…आ…आप ही उठा लो न…..”

चाची ने मुझे तिरछी नजर से देखा…..ऊपर से निचे तक……..उनकी नज़रे निचे जाकर कुछ पल रुकी फिर वो मेरी आँखों में देख कर धीरे से मुस्कुराई….

कसम उडान छल्ले की…….मेरा तो अंग अंग ठरक से कांप गया.

चाची मेरी अंडरवियर उठाने के लिए झुकी, सहारे के लिए उन्होंने नल पर हाथ रखा और जैसे अंडरवियर उठाया…उनके हाथ से नल घूम गया और शावर फुल स्पीड में शुरू हो गया…….

शावर की सीधी धार मुझ पर और उनके ऊपर पड़ी……पानी इतनी तेज़ी से आया की जब तक वो बंद करती तब तक चाची और मैं दोनों पुरे भीग चुके थे……..

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

“हाय……राम…….उफ़……..भीगा दिया…..रे………हाय….हाय…….सब गीला हो गया…….”

मैं तो अभी तक अपना बाबुराव हाथों से छुपाये कमोड पर बैठा था.

चाची वहां से हटी और मेरी अंडरवियर को भी बाल्टी में डाल दिया…..फिर बोली…..

“लल्ला……..सारे कपडे भीग गए…..चल….कपडे धो कर साड़ी बदल लुंगी…..यूँभी….कपडे धोने में भी भीग ही जाती……….मरी ये साड़ी तो चिपक चिपक जा रही है “

भीगने के बाद साड़ी चाची से ऐसे ही चिपक गयी थी जैसे चाची पर साडी का लेमीनेशन कर दिया हो. उनकी साड़ी कुलहो से ऐसे चिपकी थी की पूरा का पूरा शेप दिख रहा था…….चाची घूमी तो मेरा दिमाग भी घूम गया.

चाची की गांड के सल में साड़ी फँसी थी, चाची ने आज भी पेंटी नहीं पहनी थी. चाची मुझसे बाते करती जा रही थी और इधर उधर भी देख रही थी…..

मैंने पूछा, “क..क…क….क्या हुआ चाची……”

“अरे मरा…..मेरा गाउन भी नहीं दिख रहा ….ऐसी पूरी गीली साडी में कैसे कपडे धोउ ?”

ये कहते कहते चाची ने अपनी गदराई गांड के सल में फँसी साड़ी को निकाला………

सन्नी लिओनी के जिस्म की कसम मेरे कानो में से तो धुआं निकल गया….

मैंने कहा. “च…च…चाची….आप……बल्लू चाचा का शर्ट पहन लो…..”

चाची ने एक पल के लिए सोचा फिर बोली, ” हाँ रे…..धोना तो है ही…….उनकी शर्ट पहन के एक बार सारे कपडे मशीन में डाल देती हु फिर दूसरी साडी पहन लुंगी…..ये गीली साडी भी धो लुंगी…..”

यह कहकर उन्होंने अपना पल्लू कंधे पर से उतारा और मेरे सर में एम्बुलेंस की लाइट लप झप करने लगी…मेरे कानो में सायरन बजने लगा………चाची ने सफ़ेद ब्लाउस पहना था….मगर ब्रा नहीं पहनी थी…….भीगते ही ब्लाउस ने पर्दा उठा दिया था……भीगे हुए ब्लाउस में चाची के चुचुक……यानि निप्पल साफ़ दिख रहे थे.

चाची हाथ में अपने पल्लू लिए मानो पोस बना के खड़ी थी और मैं गंगुराम जैसे मुंह खोले उनका हुस्न अपनी आँखों से पी रहा था.

चाची बोली….”हाय राम….क्या देख रहा हे बेशरम….उधर मुंह कर……..”

मैंने भी आज्ञाकारी बच्चे जैसे मुंह दूसरी ओर कर लिया मगर….कनखियों से देखना जारी रखा.

चाची ने अपनी साडी खोल दी……वो सफ़ेद पारदर्शी ब्लाउस और पेटीकोट में थी…..अब चाची ने शर्ट उठाया चाची ब्लाउस और पेटीकोट के ऊपर ही शर्ट पहन लेगी….और शो ख़तम.

मैंने भी सोचा…की चाची फिर से मेरे साथ चूहे बिल्ली का खेल खेलने लगी है….पहले तो मुझे गरम किया
और अब मुझे तड़पाते हुए अपने आप को पूरा ढक लेगी और मैं कुछ भी नहीं कर पाउँगा.

मुझे भी अपने आप पर कंट्रोल रखना है…..मैं भी कुछ नहीं करूँगा.

तभी चाची अपने ब्लाउस के हुक खोलने लगी…….मेरे बैठते हुए बाबुराव ने फिर हुँकार भरी……मैं तिरछी नजर करके सब देख रहा था…..एक पल में चाची का ब्लाउस निचे था…..और ये क्या….अगले ही पल में उनका पेटीकोट भी नीचे. 

माँ चुदाने गयी बिल्ली और गधे की गांड में गया चूहा…….

चाची ने बल्लू चाचा का शर्ट उठाया और इस से पहले की मैं कुछ देख पता अपने बदन पर डाल लिया.

माँ की चूत…ये फिल्म तो शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गयी,

भले ही मैं चाची को दो बार बजा चूका था फिर भी वो ऐसे नखरे और शर्म के कसीदे दिखा रही थी जैसे की कुछ हुआ ही न हो…..मेरे अरमान थे की मैं एक बार चाची का गदराया बदन मादरजात नंगा देखू…….इस के पहले बाबुराव के तो गांडफाड़ आनंद हो गए थे मगर नैनसुख नहीं मिला था. मगर साली इस हरामन ने बल्लू चाचा के शर्ट पहन के मेरे अरमानो का शीघ्रपतन करवा दिया.

मैं टॉयलेट के कमोड पर फिर से बैठ गया….और बाबुराव को अपने हाथों के निचे फिर से छुपा लिया. चाची शर्ट के बटन लगा चुकी थी. मगर बड़ी शान से ऊपर के २ बटन नहीं लगाये थे. मतलब चाची के मम्मे अपने पूरा कटाव दिखा रहे थे.

मैंने भी सोचा चलो ग़ालिब आज बालकनी के टिकेट पर फिल्म देखेंगे. चाची मेरे सामने सिर्फ बल्लू चाचा का काला शर्ट पहने खड़ी थी.शर्ट उनकी आधी जांघों तक था……पानी से भीगी उनकी जांघें बाथरूम की रौशनी में चिलचिला रही थी. 

गुरु एक बात तो है……भारतीय नारी की गदरायी गांड और भरी भरी जांघों का तोड़ पूरी दुनिया में नहीं है.

चाची अपनी जगह पर थोडा सा घूमी और मेरा कथन सत्य साबित हो गया. 

चाची की ५ फुट ४ इंच की फ्रेम में उनकी गांड ही गांड ही दिखती थी. ये हाल तो साड़ी में था…..शर्ट में कसी हुयी गांड तो कहर थी कहर. 

गांड के दोनों गोले मुस्तेदी से अपना अपना परिचय दे रहे थे. हाय…..चाची को तो बस पकड़ के…..

“हाय राम…….क्या देख रहा है रे……..बेशर्म……नहा और निकल बहार यहाँ से.”, चाची चिल्लाई.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

“क…क….क…..क्या……म..म….म…मैं……म.मम.मेरा मतलब है की नहीं चाची…..म.मम.मैं तो “
,मैं हकलाया.

चाची ने ऑंखें नचाई, “हाँ राम…..तो और क्या फिर……नहा और बाहर जा……”

अब कोई इस फुलझड़ी को बताये की मेरा राकेट लांच मोड में है. मैं तो बैठा था मगर बाबुराव खड़ा था.

मैं फिर हकलाया, “आ…आ….आ….आप कपडे धो लो चाची……मैं फिर न…न….नहा लूँगा…”

“हाय राम…..तब तक क्या मेरे सर पे ही बैठा रहेगा क्या…..? चुप चाप नहा और निकल यहाँ से….”

भेन्चोद,,,,,किस्मत में लिखे हो लोडे तो कहाँ से मिलेंगे पकोड़े…..???

मैं गरीब…..नंगा……अपने बाबुराव को अपने हाथों से छुपाये खड़ा हुआ और शोवर के निचे खड़ा हो गया.

चाची ठीक मेरे पीछे ही थी……वो झट से स्टूल पर बैठ गयी और बाल्टी से गीले कपडे निकालने लगी.
मैंने मन ही मन सोचा चलो बेटा….मोका तो गया….नहा लो और चलो .

मेरी पीठ चाची की और थी……मैंने शोवर को चालू करने के लिए हाथ बढाया और तभी ठन्डे पानी के छींटे मेरी नंगी गांड पर पड़े. मैं एक दम चिंहुक पड़ा.

चाची खिलखिला कर हँसने लगी……वो स्टूल पर उकडू बैठी थी. शर्ट उनकी जांघों पर ऊपर तक चढ़ आया था…..शर्ट सिमट कर उनकी चिकनी जांघें के जोड़ पर इकठ्ठा हो गया था. मुझे याद आया की चाची ने पेंटी नहीं पहनी है. 

कीड़ा कुलबुलाने लगा.

गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

One thought on “गांड की फटफटी पार्ट 4 – Hindi Sex Story

  • July 22, 2020 at 5:30 am
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    Hey girl Bhabhi Jo mere sath enjoy Karna chati h to muje what’s app kre 7590091474

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