आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

Aaahhh!! Lund ka Swad – Mastram Hindi Sex Kahani

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

वैसे तो मैं बहुत सीधी सादी औरत हूँ, मेरी शादी को पाँच साल हो गए है और
मेरे पति बड़े व्यापारी हैं, उनका काम घर पर भी चलता है, अपने लैपटॉप पर
वो रात को 12-1 बजे तक काम करते रहते हैं !

तो मैं रात को देर तक अपने लैपटॉप पर ऑरकुट पर चैटिंग करती रहती हूँ।
वैसे तो मेरे प्रोफाइल में ज्यादा लड़कियों को ही ऐड किया हुआ है, उनसे
सेक्स के विषय पर बात करते हुए अपने आपको थोड़ा रिलेक्स कर लेती हूँ !

वैसे मेरे पति को मुखमैथुन का बहुत शौक है मुझे ऐसा करना होता ही है,
वैसे शुरू में तो मुझे कोई कोई परेशानी नहीं होती थी, पर मुझे नीचे की भी
शांति की जरुरत होती है, इस बारे में मेरे पति से कहती हूँ तो वो टाल
जाते हैं, कहते हैं- थोड़ा कर दो, फिर करता हूँ !

वो कभी करते भी हैं तो कम समय में ही झर जाते हैं तो कुछ हो भी नहीं पाता
है ! मुझे संतुष्टि नहीं मिलती है, मुझे और ज्यादा सेक्स की जरुरत होती
है तो थोड़ा खुद हाथ से शांत कर लेती हूँ, पर जो शांति लिंग से मिलती है
वो मुझे शादी के एक साल तक ही मिल पाई !

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मैं परेशान रहने लगी लगी कि औरत की चुदास को शांत करना बहुत मुश्किल काम
है, यह बात एक औरत के अलावा कोई नहीं जान सकता, कम से कम मर्द नहीं समझ
सकता है, उसको वीर्य पतन तक ही मतलब होता है, उसके बाद औरत का क्या हाल
है वो जाने बिना ही सो जाते हैं, यह मैंने बहुत सालों बाद अनुभव किया है
! पूरी दुनिया में ऐसे लाखों औरतें है जो इस परेशानी से जूझ रही हैं पर
कोई चारा नहीं है तो बस बर्दाश्त करके घुट घुट कर जी रही हैं !

मैं अपने बारे में बताती हूँ ! मुझे देख कर कॉलेज के ज़माने में लड़के मुझ
पर मरते थे और आज भी कई लड़के और मर्द अपनी जान देने के लिए तैयार रहते
हैं। मेरा गोरा रंग और सुंदर नयन-नक्श ! मेरे स्तन 32 आकार के हैं। मेरी
उम्र हालाँकि 28 है पर मैं आज भी 22 की लगती हूँ ! मेरे पति विनोद जो 34
साल के हैं, वैसे है वो भी काफी खूबसूरत ! पर मुझे सेक्स में शांत नहीं
कर पाते हैं और एक बात मेरे पति विनोद का कोई चक्कर भी है शायद, ऐसा मुझे
शक है ! क्यूंकि इतनी सुंदर बीवी को कोई ठीक से न चोदे तो उसको आप क्या
समझेंगे? कि या तो वो मूर्ख है या कोई चक्कर है !

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खैर, अब मैं कहानी पर आती हूँ !

विनोद का यों बार-बार बाहर जाना कभी बोम्बे, कभी देहली तो कभी विदेश,
महीने में 10 से 15 दिन दिन का टूअर होता है जो मुझे परेशान रखता है।
चाहे मुखमैथुन ही सही, पर उनका सुंदर लिंग देखने को तो मिल जाता है न !
और फिर हिंदी सेक्सी कहानियाँ और चैटिंग पर सेक्स की बात करके मेरा क्या
हाल होता होगा, मेरे सारी बहनें जो हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर आती हैं,
जान सकती हैं।

हाँ, वैसे मेरे मर्द दोस्त भी समझ सकते हैं कि हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर
क्या होता है? उसके बाद क्या हाल होता है? अगर लिंग न मिले चूसने को और
खाने को? नीचे चूत कैसे फड़कती है, बिना लिंग के चूत? यह मुझसे बेहतर कोई
नहीं जान सकता है !

कहानी की शुरुआत होती है बहुत भावुक माहौल से ! एक बार ये जयपुर गए थे और
रास्ते में बस-दुर्घटना हो गई। यह खबर देने के लिए इनका दोस्त सुनील आया,
मैं नहा रही थी, बाथरूम मैं थी,

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“भाभी ! भाभी !” आवाज दी उसने- आप कहाँ हैं?

मैंने कहा- मैं बाथरूम मैं हूँ !

उसकी आवाज मैं बहुत खौफ और दर्द था, वो रुआंसा हो रहा था।

मैंने कहा- क्या हुआ सुनील जी?

मैंने बाथरूम से ही कहा।

सुनील ने कहा- विनोद का फोन आया क्या?

मैंने कहा- नहीं !

“तुमने किया क्या?”

मैंने कहा- नहीं !

मैंने कहा- क्या हुआ? जल्दी बताओ?

“कैसे बताऊँ भाभी ! जिस वोल्वो गाड़ी से विनोद जा रहा था, वो
दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, मैंने अभी समाचार में सुना है, और बहुत बड़ा
नुकसान हुआ है ! और विनोद का फोन भी नहीं लग रहा है !”

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मैं बेहोश होने लगी, मैं नहा रही थी, बस तौलिये में थी, मेरे हाथ मैं
नाइटी लगी, और ऐसे ही बाहर आ गई, मुझे होश भी नहीं रहा कि मैं कैसे हूँ !
और रोते हुए सुनील से लिपट गई। सुनील मुझे दिलासा देने लगा- कुछ नहीं
होगा भाभी ! आप चिंता न करो !…………………………………

मैं सिर्फ पैंटी में थी और वक्ष पर तौलिया था जो आधे ही चूचों को ढक रहा था !

मेरे पीठ नंगी थी जिस पर सुनील हाथ फेर रहा था मुझे दिलासा देने के लिए !
मैं उससे चिपक कर रो रही थी, मुझे यह भी होश नहीं था कि मैं पूरी तरह से
नंगी हूँ और मेरे उरोज़ उसके जिस्म से चिपक रहे हैं, पर उस समय ऐसा नहीं
था।

इतने में मेरा फोन बजा, मैं कमरे की तरफ भागी, मेरे साथ-साथ सुनील भी था।

शुक्र है, विनोद का फोन था। मैंने जल्दी से फोन उठाया- तुम कहाँ हो
विनोद? क्या कर रहे हो? क्या हाल है?

सारे सवाल एक साथ दाग दिए मैंने !

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विनोद ने कहा- घबराना मत ! मुझे कुछ नहीं हुआ है, मुझे पता था कि तुमको
खबर जरूर लग गई होगी !

“तो तुम्हारा फोन क्यों नहीं लग रहा था?”

विनोद ने कहा- मेरा फोन ख़राब हो गया है, टूट गया है, मैं दूसरे मोबाइल
में सिम डाल कर तुमको फोन कर रहा हूँ ! और फिर से जयपुर जा रहा हूँ दूसरी
गाड़ी में ! वैसे बहुत से यात्रियों को चोट आई है और तीन तो मर भी गए हैं,
पर मुझे कुछ नहीं हुआ है।

मैंने कहा- चलो ठीक है कि तुमको कुछ नहीं हुआ यार ! सुनील ने खबर दी, मैं
मर जाती तुम्हारे बिना !

और फिर से रोने लगी। इतने में फोन कट गया लाइन की खराबी के कारण !

मुझे रोता देख सुनील फिर से मेरे पीठ पर हाथ फेरने लगा और मैं उससे लिपट
गई। अब तक मैं नंगी थी और मुझे यह अहसास भी नहीं था।

क्या आप मानेंगे मेरी बात को? पर यही सच है !

सुनील अब तक सब सुन भी चुका था, मेरे नंगे बदन को देख भी चुका था और मुझे
अपनी बाहों में लेकर मुझे अपने मर्द होने का अहसास करवा रहा था। उसके
लिंग का अहसास मुझे नीचे होने लगा था और मेरे उरोज उसके जिस्म से बहुत
जोर से जकड़े हुए थे। मैंने उससे छुटने का प्रयास किया पर छुट नहीं पाई।

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वो बोला- काफी खुबसूरत हो भाभी आप तो ! आपके क्या बूब्स हैं ! जैसे विनोद
ने कभी छुआ नहीं हो ! बहुत सख्त हैं आपके बूब्स !

मैं शरमा गई, मुझे तब अहसास हुआ कि मैं नंगी हूँ।

मैंने कहा- छोड़ो सुनील भैया, मुझे शर्म आती है !

वैसे मैं तब तक मस्त हो गई थी ! मैं नहीं चाहती थी कि सुनील मुझे छोड़े
!उसके लिंग का अहसास मेरे पूरे शरीर में हो रहा था, मुझे पता नहीं क्या
हो रहा था ! मैं पहली बार किसी अन्य मर्द की बाहों में थी, उसने मुझे कस
कर पकड़ रखा था।

“भाभी, मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ ! कई बार आपको पाना चाहा, कहना
चाहा, पर हिम्मत नहीं हुई ! आज ऐसा मौका मिला कि आप खुद मेरे बाहों में
हैं और कह रही हैं छोड़ दो ! मैं कैसे छोड़ूँ आपको !”

मैंने छुटने का प्रयास कम कर दिया, मैं उसकी बाहों में मजा करने लगी, वो
मेरे स्तनों को दबा रहा था।

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मैंने कहा- सुनील, दर्द होता है, धीरे करो ना !

यह सुन कर सुनील की हिम्मत बढ़ गई और उसने अपनी पैंट उतार दी, मेरा हाथ
उसके लिंग पर जा रहा था, मैं उसका लिंग हाथ में लेकर सहलाने लगी। अब बस
यह चाह रही थी कि वो अपनी चड्डी हटा दे और मेरी चूत में अपना लिंग डाले !

वैसे सुनील का लिंग विनोद के लिंग से कुछ छोटा ही लग रहा था।

मैंने बिस्तर पर लेटते हुए कहा- सुनील, अब देर न करो ! मैं बहुत प्यासी
हूँ, जल्दी से डालो न !

सुनील भी पूरा सेक्स में मस्त हो चुका था, उसको भी कुछ नहीं सूझा उसने
अपनी चड्डी खिसकाई, लिंग मेरी चूत के ऊपर रखा और जोर का धक्का दिया, एक
ही बार में पूरा लिंग डाल दिया मेरे अन्दर !

मैं दर्द से रो पड़ी- क्या करते हो सुनील? थोड़ा धीरे !

सुनील ने कहा- नहीं रहा जाता भाभी ! मैंने कई बार आपके नाम से हाथ से
सेक्स किया है अपने हाथ से !

और फिर वो मुझे जोर जोर से चोदने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था, ऐसे कभी
भी विनोद ने नहीं चोदा था मुझे ! वो बड़ी बेरहमी से चोद रहा था।

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मैं झड़ गई, मैंने कहा- सुनील, मैं झड़ रही हूँ !

पर वो अभी नहीं झड़ा था, वो करता रहा, मुझे मजा आ रहा था, चुदाई का सच्चा
सुख आज सुनील ने दिया था, मैं बस आह आह कर रही थी।…………………………………

सुनील ने कहा- भाभी, मैंने आज पहली बार चूत मारी है ! अब तक तो हाथ से ही
काम चल रहा था !

सुनील अभी कुंवारा था ! यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं।

मैं फिर से झड़ गई। तीन बार मुझे झाड़ने के बाद सुनील ने कहा- भाभी, मैं
अब झड़ने वाला हूँ ! वीर्य कहाँ निकालूँ?

मैंने कहा- मेरे जानू, तुमने मुझे निहाल कर दिया है, अब मेरी चूत को भी निहाल कर दे !

इतना कहते ही सुनील आह आह भाभी करते हुए मेरी चूत में ही झड़ गया और उसके
गर्म वीर्य की धार से मैं एक बार और झड़ गई। मेरे शरीर में अकड़न हो रही
थी, अलग सा मजा आ रहा था, वो मेरी चूत में लिंग डाल कर ऐसे ही पड़ा रहा
और हमारी कब आँख लग गई, पता ही नहीं लगा !

जब आँख खुली तो फिर से ऐसे ही सेक्स किया, अब मैंने उसका सारा लिंग अपनी
जुबान से चाट कर साफ किया और कहा- सुनील, फिर से चोद दो ! मजा आ गया !

वो फिर से तैयार था, फिर उसने जोर जोर से मुझे पेला, मैं दो बार झड़ गई।

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अब उसका निकलने वाला था, वो बोला- भाभी अब क्या करूँ?

मैंने कहा- आओ, मेरे मुँह में आ जाओ !

और उसने सारा वीर्य मेरे मुँह में छोड़ दिया, मैं सारा वीर्य गटक गई, क्या
अच्छा स्वाद था !

मैंने उसको बाहों में लिया और कहा- विनोद तो बस मुखचोदन करता है, मुझे तो
प्यासी रख देता है।

सुनील ने कहा- भाभी, अब तुम कभी प्यासी नहीं रहोगी, अब तुम जब भी
बुलाओगी, आपका यह सेवक हाजिर रहेगा !

सुनील ने कहा- भाभी, अब तुम कभी प्यासी नहीं रहोगी, अब तुम जब भी
बुलाओगी, आपका यह सेवक हाजिर रहेगा !


विनोद के आने के बाद जब भी वो बाहर रहता था हम दोनों यह मधुर-मिलन करते
थे ! पर उसके आने जाने से मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के सुशील को शक
हो गया। सुशील मुझसे 8 साल छोटा है वो करीब 19 साल का होगा ! उसने कहा-
भाभी, भाई जब भी बाहर जाते हैं तो सुनील भाई क्यों आते हैं आपके यहाँ और
रात भर क्या करते हैं?

मैं डर गई, मैंने कहा- तू किसी को नहीं कहना !

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वो बोला- क्या आप मेरे साथ भी वो सब कुछ करोगी जो सुनील भाई के साथ करती हो?

मैंने कहा- तू अभी छोटा है !

वो बोला- नहीं भाभी, मैं छोटा नहीं हूँ। कभी आप मेरा लिंग देखना, तब
कहना, नहीं तो विनोद भैया को सब बता दूंगा।

मैं डर गई- अच्छा बाबा, मैं करुँगी, कल तुम्हारे विनोद भैया जा रहे हैं,

तू आ जाना !
बस वो खुश हो गया।
विनोद चार बजे निकल गया, मुझे ऐसा उम्मीद थी कि सुशील ये सब जरूर देख रहा
होगा, उसको विनोद के जाने का इन्तजार था ! जैसे ही विनोद गया, थोड़ी देर
में घंटी बजी, मुझे लगा कि सुशील ही होगा।
मैंने दरवाजा खोला।
“हेल्लो भाभी, मैं आ गया !”
“अरे सुशील? तुम बड़ी जल्दी आ गए? अभी ही तो वो गए हैं।”

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“हाँ, मैं सब देख रहा था और इन्तजार भी कर रहा था कि कब विनोद भैया जायें
और मैं आपके पास आऊँ।”
मैंने कहा- अरे सुशील, यह सब ठीक नहीं है, तुम बहुत छोटे हो इस काम के
लिए ! वैसे क्या उम्र है तुम्हारी?
सुशील ने कहा- मैं अभी 18 का हुआ हूँ !
मैंने कहा- बस? मैं तो तुमको 19-20 का समझती थी, तुम तो और भी छोटे हो
यार ! कैसे मैं तुमको बिगाड़ूँ?
“नहीं भाभी, मैं पहले से बिगड़ा हुआ हूँ, मैंने ऐसे सेक्स नहीं किया है
पर आपके नाम से कई बार हस्तमैथुन किया हुआ है, एक बार मेरा लंड देख लो,
अगर पसंद न आये तो मना कर देना !” यह कहते ही उसने अपना पजामा उतार दिया
और सिर्फ चड्डी में आ गया और उसका लिंग तम्बू बना हुआ था।
मैंने कहा- यार, तुम्हारा तो बड़ा लगता है विनोद से और सुनील से दोनों से
! तुम तो मर्द हो ! यह भी उतार कर दिखा अपना लिंग !वो बोला- खुद ही उतारो
ना भाभी !
मैंने हाथ लगा कर देखा, उसका बहुत बड़ा था। मैंने उसकी चड्डी उतार दी,

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मैं उसका लिंग देख कर दंग रह गई, उसका लिंग बड़ा और बहुत सुंदर था। एकदम
गोरा ! मेरे मुँह से निकल गया- वाह, क्या लौड़ा है सुशील तुम्हारा !
और मेरे अंदर बेचैनी होने लगी ! मुझसे रहा नहीं गया, मैंने जल्दी से उसका
लिंग अपने मुँह में ले लिया।
क्या अच्छा लिंग था उसका !
मैंने एक बार और कहा- सुशील बहुत सुंदर लिंग है तुम्हारा ! आई लव यू
सुशील ! यार तुमने जन्नत दिखा दी !
और जोर जोर से उसका लिंग मुँह में लेने लगी, वो मेरे कबूतर दबाने लगा था !
मुझे आज बहुत अलग अहसास हो रहा था, मैं आपको अपने मुँह से बयान नहीं कर
सकती हूँ, मुझे एक नशा सा हो रहा था, मैंने उसके लिंग को इतना चूसा कि वो
किनारे आ गया।
“अरे भाभी ! मैं तो गया, बस रुको रुको !”
मैं कहाँ मानने वाली थी, और वो मेरे मुँह में ही झड़ गया। मैं उसका बहुत
स्वाद वीर्य पी गई।
“क्या बात है सुशील ! तुम बहुत नशीला लिंग लिए हुए घूम रहे थे इतने दिनों
से ! क्यों मुझे इसके दर्शन नहीं करवाए? मैं कभी भी सुनील के साथ नहीं
करती ! अब मैं शायद तुम्हारे भैया के साथ भी नहीं कर पाऊँगी ऐसा, जैसा
सुख तुम्हारे लिंग ने मुझे दिया है, मैं विनोद का भी मुँह में लेती हूँ

पर उसकी इच्छा के कारण, पर तुम्हारा मैंने अपनी प्यास शांत करने के लिए
लिया है।” और फिर से उसका लिंग चूम लिया।

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थोड़ी देर तक ऐसे ही उसको मुँह में लेकर रखा, उसका लिंग फिर से तन गया,
मैंने कहा- सुशील, अब बस देर न करो, मुझे अपने लिंग की सैर करा दो ! मेरी
चूत बहुत प्यासी है, इसको भी थोड़ा अपने रस से सराबोर कर दो !

थोड़ी देर तक वो मेरी चूत चाटता रहा, मुझे असीम आनंद आ रहा था, मैं
आह..आह.. कर रही थी, मेरे मुँह से सीत्कारें निकल रही थी, और वो भी मस्त
था ! उसको भी जन्नत का सुख मिल रहा था !

वो बोला- भाभी, आज मुझे बहुत मजा आ रहा है, मैंने कभी इसके पहले चूत नहीं
देखी और आपकी जैसी खूबसूरत भाभी के साथ सेक्स करने के बाद मैं कभी भी
किसी के साथ सेक्स नहीं कर सकूँगा, आपका बहुत बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे
ये सब करने दिया।

मैंने कहा- अब मत तड़पाओ ! अपना लिंग मेरी चूत में डालो ! ..आह नहीं…
रहा जाता है अब !

मैं उसकी जीभ की हरकत से बहुत उत्तेजित हो गई थी और मैं झड़ने वाली थी और
वो कर रहा था !

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“आह …आह …आह मैं झड़ रही हूँ…..सुशील आह ..आह और मैं झड़ गई।” उसने
मेरा सारा रस पी लिया, अब उसको जोश चढ़ गया, वो बोला- क्या मजा है भाभी
आपकी चूत के रस का ! मैं अब पहली बार आपकी चूत में अपना डाल रहा हूँ !

वो मेरे दोनों जांघों के बीच आ गया और अपना लिंग डालने लगा। पर यह क्या !
वो निशाना चूक रहा था।

मैंने अपने हाथ से उसका लिंग पकड़ कर लिंग अंदर डलवा लिया, मुझे हल्का
दर्द का अहसास हुआ, मैं सिसक कर रह गई, मैं बोली- आह ! कितना सुंदर और
बड़ा है तुम्हारा सुशील ! मजा आ गया !

और उसने थोड़ी देर अंदर डाले रखा।

मैंने कहा- थोड़ा शुरू करो अब काम !

और इतना कहते ही उसने धक्के लगाना चालू कर दिया। मैं उसके लिंग का अंदर
तक अहसास कर रही थी और चरम आनंद को अनुभव कर रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा
था। वो बस जोर जोर से धक्के लगा रहा था और मैं आह …आह कर के उसके लिंग
के मजे ले रही थी !

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“काश सुशील, तुम पहले मिल जाते तो मुझे इतना नहीं तड़पना होता !”
सुशील बोला- भाभी तुमने भी कभी मेरे ऊपर ध्यान नहीं दिया, मैं तो दो साल
से आपको चोदने का सोच रहा था !

“सच? तो क्या तुम 16 साल के थे तब से ही इतना सब जानते थे क्या?”

“हाँ भाभी, मैं सब जनता था ! मुझे 13 साल से ही सब जानकारी है, मैंने कई
सारी नंगी फिल्म देखी हैं, क्या आपने भी देखी है ऐसी फिल्म?
मैंने हाँ में सर हिला दिया।

“तो कल साथ देखते हैं।” और वो धक्कों की गति बढ़ाने लगा।

“यार सुशील तुम को देख कर ऐसा नहीं लगता कि तुम पहली बार ऐसा कर रहे हो
किसी के साथ? तुम तो किसी मर्द की तरह से मुझे चोद रहे हो ! मैं दो बार
झड़ गई हूँ !”

और यह कहने के साथ ही मैं एक बार और झड़ गई, मेरे झड़ने के साथ ही सुशील भी झड़ गया !

हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे, इतने में घंटी बज गई, मैंने कहा- कौन होगा इस वक्त?

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घड़ी में देखा तो 7 बज चुके थे ! हमने जल्दी से कपड़े पहने और मैं दरवाजे के पास गई। इतने में एक बार और घंटी बज गई। मैंने जल्दी से दरवाजा खोला,
सामने सुनील था।”अरे इतना टाइम क्यों लगा है दरवाजा खोलने में? मेरा लण्ड
खड़ा है तुमको चोदने के लिए !”

यह कहते हुए वो अंदर आया- अरे यह कौन है? और यहाँ क्या कर रहा है?
“यह सुशील है और अब यह सब जनता है हमारे बारे में ! और मैं इसके साथ अभी अभी सेक्स कर रही थी, मुझे बड़ा मजा आया इसके साथ सेक्स करने में !”
यह सुनते ही सुनील को गुस्सा आ गया, वो बोला- ये क्या कह रही हो तुम?

मैंने कहा- यह तुम्हारे और मेरे बारे में सब जान गया था और विनोद को कहनेकी कह रहा था तो मैंने इसको सेक्स करने दिया, पर अब से

यह भी हमारे साथ रहेगा !

“चलो ठीक है ! ग्रुप सेक्स ! चलो मजा आएगा !”

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सुशील ने कहा- भाभी, मैं घर हो आता हूँ ! माँ को कह आता हूँ कि विनोद भैया के यहाँ कोई नहीं है, भाभी को डर लग रहा है तो मैं वहीं सो जाऊँगा।
वैसे सुशील मुझसे इतना छोटा है कि कोई हम पर शक भी नहीं कर सकता है,

मैंने कहा- ठीक है !
उसके जाने के बाद सुनील ने मुझे जकड़ लिया- जान बहुत दिनों से प्यासा हूँ !
और मुझे जल्दी जल्दी नंगा किया और…

सुशील ने कहा- भाभी, मैं घर हो आता हूँ ! माँ को कह आता हूँ कि विनोद
भैया के यहाँ कोई नहीं है, भाभी को डर लग रहा है तो मैं वहीं सो जाऊँगा।
वैसे सुशील मुझसे इतना छोटा है कि कोई हम पर शक भी नहीं कर सकता है,
मैंने कहा- ठीक है !
उसके जाने के बाद सुनील ने मुझे जकड़ लिया- जान बहुत दिनों से प्यासा हूँ !
और मुझे जल्दी जल्दी नंगा किया और… अपना लिंग सीधा ही मेरी चूत में डाल
दिया। मैं फिर से जोश में आ गई, हम दोनों ने खूब मस्ती से सेक्स किया
करीब आधे घंटे में सुशील वापिस आ गया और वो सोफे पर बैठ गया !
रात के करीब 9 बजे थे, विनोद का फोन आया, बोला- क्या कर रही हो?

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मैंने कहा- कुछ नहीं यार ! बस टीवी देख रही थी।
वो बोला- क्या?
मैंने कहा- सेक्सी फिल्म जो तुम कल लेकर आये थे, वो !
वो बोला- चलो अच्छा है, तुम्हारा मन तो लग रहा है ना?
मैंने कहा- बहुत अच्छा मन लग रहा है। वैसे कब आरहे हो तुम?
विनोद बोला- यार, मुझे इसके बाद लन्दन जाना है तो क्या मैं यहीं से चला
जाऊँ? वैसे 7 दिन मैं आ जाऊँगा।
मैंने कहा- ठीक है, हो आना पर मेरे लिए क्या लाओगे गिफ्ट?
वो बोला- जान तुम जो कहो वो !
मैंने कहा- कुछ भी अच्छा सा !
“ठीक है।”
और फोन कट गया।
मैंने सुनील और सुशील को कहा- चलो मजे करो ! विनोद अब 7 दिन और बाहर
रहेगा। क्यों सुशील? खुश हो या नहीं?
वो मेरे पास आया- तो ख़ुशी मनाते हैं ! चलो अंदर !
और वो मुझे अपनी गोद में उठा कर अंदर ले गया। वैसे मैंने कुछ पहन तो रखा
नहीं था क्यूंकि सुनील सेक्स कर रहा था, सुनील का लिंग अभी भी सुस्त पड़ा
था।

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सुशील मुझे चूमने लगा, सुनील भी यह सब देख रहा था !
मैंने सुशील को कहा- अब से सात दिन तक कोई भी कपड़े नहीं पहनेगा ! उतारो
ये सब ! जब बाहर जाना हो तो ही पहनना !
और जैसे ही सुशील ने कपड़े उतारे, सुनील उसका लिंग देख कर दंग रह गया और
बोला- वाह, क्या लिंग है सुशील, तुम्हारा लिंग बड़ा सुंदर है। क्या मैं
हाथ लगा कर देख सकता हूँ?
और सुनील ने उसका लिंग छूकर आगे पीछे करने लगा। यह करने से सुनील का भी
लिंग कड़क होने लगा था।
मैंने सुशील का लिंग मुँह में ले लिया और कहा- लाओ यार, अब मुझे मजा करने दो !
सुशील काफी जोश में था और जैसे ही मैंने उसका लिंग मुँह में लिया, वो
धक्के मारने लगा।
सुनील ने आव देखा न ताव, मेरी चूत में अपना लिंग डालने का कोशिश करने लगा
और अंदर डाल कर बोला- क्या चूत है भाभी तुम्हारी ! मजा आता है ! अभी
तुमने सुशील का इतना बड़ा लिंग अंदर डलवाया था पर इसका असर नहीं हुआ,
वापस वैसे की वैसे हो गई जैसे पहली बार कर रहे हों।
“हाँ सुनील भाई ! वाकई ! तुम सच कह रहे हो !” सुशील बोला- बहुत मस्त चूत
है भाभी की ! मजा बहुत आता है !
मैं मस्ती से सुशील का लिंग मुँह में लेकर आनन्द ले रही थी क्यूंकि एक
साथ दो दो लिंग का मजा मुझे मिल रहा था। आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था
और बहुत किस्मत वाली होती है जिसको दो लिंग का मजा एक साथ मिलता है। और
मैं तो बस मजे करने के लिए ही बनी हूँ, ऐसा मुझे लग रहा था, आज तो मेरे
दिन भर से चुदाई चालू है।

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

सुनील ने जोर जोर से करना चालू कर दिया, बोला- भाभी, मैं तुम्हारी हॉट
चूत का सामना अब नहीं कर पाऊँगा, बाकी का काम अब
सुशील को करना होगा, तुम्हारी बाकी प्यास अब सुशील बुझाएगा। मैं इस मंजर
को देख कर बहुत उत्तेजित हो गया हूँ तो आज जल्दी झड़ रहा हूँ, मुझे माफ़
करना।
मैंने कहा- कोई बात नहीं, सुनील भाई, अभी मेरा सुशील है, आ जाओ तुम मेरे
मुँह में झाड़ना ! और सुशील तुम मेरी चूत की प्यास बुझा दो ! बहुत आग लगी
है और जब से मैंने तुम दोनों के लिंग एक साथ देख लिए है मैं परेशान हो
रही हूँ !
सुनील मेरे मुँह में धक्के मारने लगा और सुशील मेरी चूत में। मुझे मजा
आने लगा, मैं आह उह्ह करने लगी और झड़ गई !
वैसे सुनील मेरी चूत में था, तब तो झड़ने का बोल रहा था पर मुँह में वो
धक्के लगा रहा था और अभी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था और सुशील तो किसी
अंग्रेजी फिल्म के हीरो की तरह था, काफी मजबूत ! अभी उसका आधा काम भी
नहीं हुआ था, मुझे चरम आनन्द आ रहा था, मैं अपने मुँह से नहीं कह सकती कि
मैं किस सुख को भोग रही थी। मैं दो-दो लिंग को देख कर यों ही काफी मजे
में थी और फिर ऐसे लिंग जो झड़ने का नाम नहीं ले रहे हो तो क्या हाल हो,
कोई भी सोच सकता है।

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थोड़ी देर में सुनील मेरे मुँह में झड़ गया, मैं उसके साथ एक बार और झड़ गई
और सारा वीर्य पी गई।
मुझे अब और मजा आने लगा था, सुशील जोर जोर से कर रहा था, मैंने कहा-
सुशील, और जोर से ! और जोर से ! मजा आ रहा है। सुनील अब सारा का सारा माल
मेरे मुँह में निकाल कर हमारा खेल के मजे लेने लगा। मैं ये सब देख कर
बहुत खुश थी कि एक कर
रहा है, एक देख रहा है।
और अब सुशील बोला- अब मैं भी झड़ने वाला हूँ भाभी !
मैंने कहा- सुशील, मुँह में ही झड़ना ! मुझे तुम्हारे वीर्य का स्वाद
बहुत अच्छा लगता है।
और वो मुँह में आ गया और थोड़े धक्के लगाने के साथ झड़ गया, उसके वीर्य से
मेरा मुँह पूरा भर गया, मैं स्वाद ले लेकर अंदर उतारने लगी।
अब हम थक चुके थे और ऐसे ही सो गए। सुबह करीब सात बजे नींद खुली, मैंने
दोनों को उठाया, हम सब बिना कपड़ों के थे और सुशील का लिंग सुस्त भी काफी
बड़ा नजर आ रहा था।
मैं उसका लिंग हाथ में लेकर खेलने लगी, थोड़ी देर में उसका कड़क होने लगा
पर हम सब उठ कर फ्रेश होने के लिए चले गए, साथ
ही हम लोगों ने नहाने का सोचा और एक दूसरे को साबुन से नहलाया, दोनों ने
मिल कर मेरे बूब्स को खूब साबुन लगाया और दबाते रहे और चूत को साबुन से
रगड़ कर अच्छे से साफ कर दिया और मैंने दोनों के लिंग को खूब साबुन से
रगड़ कर साफ कर दिया। इस तरह करते रहने से दोनों के लिंग फिर से खड़े हो
गए और हमने बाथरूम में ही चुदाई चालू कर दी !

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

इस बार सुशील ने अपना लिंग मेरी चूत में डाल कर कहा- भाभी, चलो तुमको आज
अलग मजा देते हैं।
मैंने कहा- क्या?
तो वो बोला- दोनों लिंग एक साथ तुम्हारी चूत में डालते हैं।
मैंने कहा- नहीं सुशील ! ऐसा मत करना, मैं मर जाऊँगी।
सुशील ने कहा- सुनील भाई, आओ, अब तुम भी डालो !
सुशील ने पीछे से अपना लिंग मेरी चूत में डाल दिया और सुनील आगे से डालने
लगा पर सुशील के बड़े और मोटे लिंग के कारण नहीं जा सकता था। सुशील ने
अपना काम चालू कर दिया, सुनील चुपचाप उठा और मुँह में लग गया।
मुझे फिर से जोश चढ़ने लगा और सोचने लगी- काश विनोद इन दोनों को मुझे
चोदने की इजाजत दे दे तो क्या मजा आये ! विनोद के सामने इनसे चुदती रहूँ
रोज ! क्यूंकि अगर विनोद के सामने नहीं चुदूँ तो कभी-कभी ही मौका मिल
सकता था और मेरा हाल तो यह था कि मुझे जितना ज्यादा सेक्स मिल रहा था
उतनी ही प्यास बढ़ रही थी।
थोड़ी देर में मेरे हाथ-पैर कड़क हो गए, मैं झड़ गई।
सुशील बोला- भाभी, आप तो बहुत जल्दी झड़ गई?
मैंने कहा- मेरे राजा, मैं झड़ तो गई हूँ पर मेरे प्यास नहीं बुझी है। तुम
तो करते रहो।
मेरी चूत गीली होने से सुशील को और मजा आ गया और वो और जोश से करने लगा
और करीब 5 मिनट के बाद मैं फिर से झड़ गई और इस बार सुशील भी झड़ गया, वो
मेरी चूत में ही झड़ गया, मेरी चूत उसके वीर्य से भर गई।

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

वो उठा अपना लिंग मेरे मुँह में डाल कर बोला- साफ कर दो भाभी !
और सुनील से बोला- भैया, भाभी को अब तुम संभालो ! काफी हॉट है यार भाभी
तो ! विनोद भाई तो कुछ भी नहीं कर पक़ते होंगे अकेले !
तो मैंने कहा- हाँ सुशील, वो तो मेरी चूत में डालते ही झड़ जाते हैं।
और अब सुनील आ गया मुझे चोदने ! चूँकि सुशील का वीर्य से मेरी फ़ुद्दी
गीली थी तो सुनील का लिंग अंदर बाहर बहुत आराम से हो रहा था। वो बार बार
बाहर निकाल कर मेरे मुँह में अपना लिंग डाल रहा था तो मुझे मेरी चूत के
रस और सुशील के लिंग के रस का स्वाद मिला कर करवा रहा था, काफी अच्छा लग
रहा था। मैं फिर से कड़क होने लगी और झड़ गई।
थोड़ी देर में सुनील भी मेरी चूत में ही झड़ गया और आकर बोला- लो भाभी मजे
से चूस लो हम तीनों के रस का स्वाद !
हम फिर से नहाये और बाहर आ गए। कुछ खाना वगैरह का आर्डर दे दिया क्यूंकि
मैं बहुत थक गई थी !
साथ बैठ कर नाश्ता किया और सुशील बोला- भाभी, मैं घर जाता हूँ ताकि कोई
भी परेशानी न हो, और जरुरत के सामान भी ले आता हूँ।
मैंने कहा- ठीक है, पर सुनील तुम यहीं रहो अब सात दिन ! रोज सुशील चला
जायेगा और जो भी जरुरी सामान है लेकर आ जायेगा। सुनील को कोई परेशानी
नहीं थी तो उसको तो मजा आ गया। फिर हम रोज ऐसे ही मजे करते रहे और कब सात
दिन गुजर गए पता ही नहीं चला।…………………………………

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वैसे मैं सुशील के साथ तो जब चाहूँ सेक्स कर सकती थी पर तीनों को साथ
सेक्स करने का मौका अब जाने कब मिलने वाला था, यह नहीं पता था।
सुनील काफी भरी मन से घर जाने लगा और कहा- भाभी, मैं तुमसे अलग नहीं हो
सकता हूँ ! काश तुम मेरी बीवी होती !
“पर फिर मैं ऐसे ही किसी और से करती तो क्या तुमको बुरा नहीं लगता?”
वो बोला- नहीं भाभी, तुम्हारी यही अदा तो जान लेती है कि तुम दो दो लिंग
के मजे बहुत आराम से लेती हो ! जब मेरी शादी होगी तो मैं अपनी बीवी को
जरुर एक बार सुशील से चुदवाऊँगा। क्यों सुशील चोदोगे न मेरी बीवी को?
सुशील बोला- क्यों नहीं सुनील भाई !
सुनील चला गया, सुशील वहीं था, तब ही विनोद का फ़ोन आया- मैं आज आ रहा
हूँ, दो घंटे में पहुँच जाऊँगा।
मैंने कहा- ठीक है, आओ बहुत याद आ रही है आपकी !
और फोन रख दिया।
सुशील बोला- भाभी, मेरा एक दोस्त है रवि ! बहुत अच्छा है यार ! और उसका
लिंग भी बहुत सुंदर है, हम दोनों ने साथ साथ हस्तमैथुन किया है, मैंने
उसका लिंग देखा है। क्या तुम उसका लिंग देखना चाहोगी? कहो तो अगली बार जब
हम साथ हो तो उसको साथ लेकर आऊँ? वो कहता है कि यार तेरे पास वाली भाभी
क्या लगती है। तुमको बहुत चाहता है।
मैंने कहा- नहीं, मैं क्या रंडी हूँ जो सबसे चुदती रहूँगी ! ऐसी गलती मत करना !
वो बोला- प्लीज भाभी ! मैं उसको तुम्हारे साथ सेक्स के बारे में बता चुका
हूँ ! एक बार करवा लो ना ! बहुत मरता है वो तुम पर !

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मैंने कहा- ठीक है, देखेंगे ! पर अब तुम जाओ !
थोड़ी देर में विनोद आ गया !
मैंने उसको आते ही चूमा और कहा- विनोद, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी !
ऐसा दिखाया कि जैसे मैं बहुत अकेली थी।
वो बहुत खुश हुआ और बोला- कुछ परेशानी तो नहीं हुई ना?
मैंने कहा- नहीं, यह पास का लड़का सुशील काफी अच्छा है, बहुत मदद करता
है, मेरा सब काम कर देता है, और तुम्हारा दोस्त
सुनील, वो रोज आकर पूछता ही है, दोनों के कारण तुम्हारी ज्यादा कमी महसूस नहीं हुई।
वो बोला- चलो अच्छा है, कभी मिलाना मुझे भी सुशील से !
और सुनील को फोन लगा दिया, कहने लगा- यार सुनील, धन्यवाद, तुमने मेरे
पीछे से इसका मन रखा।
सुनील बोला- यह क्या कहने की बात है !
और फिर विनोद और मैं सेक्स करने में लग गए। विनोद ने अपना काम जल्दी पूरा
कर लिया और यह कह कर सो गया- मैं बहुत थक गया हूँ !
थोड़ी देर में विनोद आ गया !
मैंने उसको आते ही चूमा और कहा- विनोद, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी !
ऐसा दिखाया कि जैसे मैं बहुत अकेली थी।
वो बहुत खुश हुआ और बोला- कुछ परेशानी तो नहीं हुई ना?
मैंने कहा- नहीं, यह पास का लड़का सुशील काफी अच्छा है, बहुत मदद करता
है, मेरा सब काम कर देता है, और तुम्हारा दोस्त
सुनील, वो रोज आकर पूछता ही है, दोनों के कारण तुम्हारी ज्यादा कमी महसूस नहीं हुई।

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वो बोला- चलो अच्छा है, कभी मिलाना मुझे भी सुशील से !
और सुनील को फोन लगा दिया, कहने लगा- यार सुनील, धन्यवाद, तुमने मेरे
पीछे से इसका मन रखा।
सुनील बोला- यह क्या कहने की बात है !
और फिर विनोद और मैं सेक्स करने में लग गए। विनोद ने अपना काम जल्दी पूरा
कर लिया और यह कह कर सो गया- मैं बहुत थक गया हूँ !
अगले दिन विनोद उठा और कहने लगा- यार बहुत दिनों में कल सेक्स किया मजा आ
गया ! बहुत याद आ रही थी तुम्हारी ! मैंने इन दिनों में कई बार हस्तमैथुन
किया, पता नहीं मुझे कुछ दिनों से सेक्स का बहुत मन हो रहा था ! वैसे
तुम्हारा क्या हाल था इतने दिनों से क्या तुमको याद नहीं आई?
मैंने कहा- यार क्या बताऊँ तुमको कि मेरा क्या हाल था इतने दिनों से? मैं
ही जानती हूँ ! और तुम तो कल अपना काम निकाल कर सो गए, तुम्हारा तो हो
गया पर मैं तो अधूरी रह गई। विनोद, आज थोड़ा मजा दो ना !
विनोद- चलो आज करेंगे रात को ! पक्का, मैं तुमको आज बहुत चोदूँगा, तुम ये
न कह दो कि बस अब छोड़ दो, तब तक चोदता ही रहूँगा।
मैंने कहा- अगर ऐसी बात है तो मैं रात का इन्तजार करुँगी।
और मैंने उसका लिंग थोड़ा दबा दिया।
हमने खाना खाया और विनोद कहीं बाहर चला गया। मैंने सुनील को फोन लगाया और
कहा- यार सुनील भैया ! बहुत याद आ रही है, कल विनोद ने कुछ नहीं किया, बस
खुद का कर लिया, मैं तो प्यासी रह गई।

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सुनील- कोई बात नहीं भाभी, आप कहो तो हम आ जाते हैं आपकी सेवा में !
मैंने कहा- नहीं सुनील भैया, आज नहीं ! विनोद बाहर जायेगा, तब करेंगे।
सुनील- ठीक है भाभी, जल्दी मिलते हैं।
कह कर उसने फोन काट दिया।
रात को विनोद आया, हमने खाना खाया और वो मेरे कबूतर दबाने लगा, मुझे मजा
आने लगा। आज विनोद कुछ अलग अंदाज में था !
विनोद- जान, अंदर चलें !
और वो मुझे गोद में उठाकर अंदर आ गया, आते ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार
दिए और मेरी चूत चाटने लगा। मुझे लगा कि आज विनोद नहीं और कोई मेरे साथ
सेक्स कर रहा है, मैंने विनोद से कहा- अपने तो कपड़े उतारो !
उसने अपने कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों नंगे थे। मैं उसका लंड हाथ में
लेकर सहलाने लगी बिना उसके कहे !
वो मेरी चूत चाट रहा था।
हम अब 69 की अवस्था में आ गए, मैंने उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी तो
विनोद को मजा आने लगा।
मैंने कहा- विनोद अब डाल दो !
और उसने मेरी फ़ुद्दी में लंड डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा, मुझे मजा
आ रहा था !
पर थोड़ी देर में ही वो बोला- यार सुरभि, मैं तो बस गया !
कह कर उसने लंड निकाल लिया और मुँह में आ गया। मैंने उसका लण्ड अच्छे से
चूसा। थोड़ी देर में वो मेरे मुँह में झड़ गया।

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वैसे मुझे बहुत मजा आया था, हालाँकि उसने बहुत कम देर किया था पर फिर भी
नया तरीका मुझे पसंद आया। यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे
हैं।
मैंने कहा- विनोद तुम तो बहुत कम देर करते हो।
विनोद बोला- जान क्या करूँ, तुम्हारी चूत है ही इतनी गर्म कि मैं तो क्या
तुमको 2-2 मर्द भी शांत नहीं कर सकते। अगर यकीन न हो तो करके देख सकती हो
किसी के साथ !
मैंने कहा- यह क्या कह रहे हैं आप? मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ?
विनोद- यार, यह सच है कि मैं तुमको शांत नहीं कर सकता हूँ, तुम प्यासी रह
जाती हो ! मुझे पता है पर मैं क्या करूँ, कुछ तो तुम्हारी चूत बहुत हॉट
है कुछ मैं जल्दी झड़ जाता हूँ !
मैंने कहा- नहीं, जो भी है, जैसा भी है, सब ठीक है, मैं ऐसा नहीं करुँगी।
अगर किसी को पता लग गया तो बदनामी होगी।
विनोद- कुछ नहीं होगा जान ! एक बार तुम किसी के साथ सेक्स कर लो, जिंदगी
के मजे ले लो !
मैंने मना कर दिया और कहा- सो जाओ, देखेंगे ! अगर कभी जरुरत हुई तो
करेंगे कभी, फिर बाद में तुम ताना तो नहीं मरोगे ना कि तुमने किसी और के
साथ सेक्स किया है? या ऐसा-वैसा?
विनोद- नहीं जान, मैं ही तुमको आज कहता हूँ ! तुम प्लीज मेरे लिए किसी के
साथ सेक्स कर लो ! मैं बहुत कोशिश करके भी तुमको चरम तक नहीं पहुँचा सकता
हूँ !
और वो इतना कहते हुए मेरे उरोज़ दबाने लगा।
मैंने कहा- क्या इरादा है? दोबारा करोगे क्या?
वो बोला- हाँ ! आज मैं कोशिश करूँगा कि तुमको चरम तक पहुँचा दूँ !
और एक बार और हम सेक्स करने लगे।

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विनोद- मैं ही तुमको आज कहता हूँ ! तुम प्लीज मेरे लिए किसी के साथ सेक्स
कर लो ! मैं बहुत कोशिश करके भी तुमको चरम तक नहीं पहुँचा सकता हूँ !
और वो इतना कहते हुए मेरे उरोज़ दबाने लगा।
मैंने कहा- क्या इरादा है? दोबारा करोगे क्या?
वो बोला- हाँ ! आज मैं कोशिश करूँगा कि तुमको चरम तक पहुँचा दूँ !
और एक बार और हम सेक्स करने लगे।
विनोद ने आज जादू करने का मन बना लिया था, उसने मुझे दोबारा मुझे
उत्तेजित कर दिया, मेरी चूत को मसल कर रख दिया और अपनी जबान से मेरी चूत
साफ करने लगा मुझे मजा आने लगा ! मैं पागल हो गई।
मैंने कहा- विनोद, क्या करने का इरादा है आज? काफी मजा आ रहा है।
विनोद- यार सुरभि, मुझे पता है कि कई दिनों से मैंने तुम्हारे साथ ठीक से
सेक्स नहीं किया है, तो तुमको मैं अच्छे से मजा देना चाहता हूँ !
मैं- विनोद मैं ऐसे ही तुम्हारे साथ सेक्स करके काफी अच्छा महसूस करती
हूँ, तुम चिंता न करो।
विनोद- नहीं सुरभि, मुझे पता है मेरी जान, तुम कहती नहीं हो तो क्या हुआ,
पर मुझे लगने लगा है कि मैं तुम्हारे साथ ठीक से सेक्स नहीं करता हूँ,
तुम जिद न करो और किसी के साथ सेक्स कर लो मेरी जान ! चलो ऐसा करो, सुनील
के साथ कर लो ! वो भी कुंवारा है, उसका भी काम हो जायेगा और तुम्हारा भी
! तुम कहो तो मैं बात करूँ उससे?

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मैंने कहा- नहीं मुझे नहीं करना किसी के साथ कोई सेक्स-वैक्स !
पर जब विनोद खुद ऐसा कह रहे हों तो मेरे अंदर से एक अलग सी गुदगुदी होनी
ही थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं विनोद के सामने ही सुनील से सेक्स
कर रही हूँ और जैसा मैंने भगवान से माँगा था कि काश विनोद मुझे इजाजत दे
दे खुद के सामने सुनील के साथ सेक्स करने का !बस मैं ऊपरी तौर पर मना
करती रही, दिखावा करती रही कि विनोद को ऐसा लगे कि मैं अच्छी औरत हूँ।
खैर इन सब बातों के साथ-साथ विनोद ने तक मुझे काफी हद तक चरम तक पहुँचा
ही दिया था, एक तो वो जुबान से मेरी चूत को मजा दे रहा था और ऐसी बात
करके मुझे और ज्यादा रोमांचित कर रहा था। मैं उसकी इस बात की दीवानी हो
रही थी, मुझे नशा सा छा रहा था।
मैंने विनोद को कहा- विनोद, मैं झड़ रही हूँ शायद !
और उसने हूँ कहा और मेरी चूत में जबान और अंदर तक डाल दी, वो मेरा सारा रस पी गया।
अब बारी मेरी थी, मैंने उसके लिंग को अपने मुँह में ले लिया और बहुत मन
से अन्दर-बाहर करने लगी। वो आह उह्ह करने लगा।
मैंने कहा- विनोद, क्या ऐसा करना अच्छा होगा? सुनील भैया क्या समझेंगे?
वो क्या सोचेंगे हमारे बारे में?
मैंने जानबूझ करके नाटक किया।
विनोद- कुछ नहीं ! वो मरता है तुम पर ! मुझे कई बार ऐसा लगा उसकी हरकतों
से ! कई बार उसके मुँह से निकल भी गया है कि भाभी बहुत सुंदर हैं। एक बार
मैंने कहा कि क्या इरादा है सुनील? तो वो झेंप सा गया था !

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मैंने कहा- अच्छा फिर क्या बोला वो…?
अचानक विनोद के फोन की घंटी बजी, उसने फोन उठाया, मैं उसका लिंग मुँह में
लेकर आगे पीछे कर रही थी, वो मस्त हो रहा था, उसने फोन उठाया।
मैंने पूछा- किसका फोन है?
विनोद- हाँ सुनील, क्या बात है…?
“कुछ नहीं, बहुत दिनों बाद आया हूँ तो मजे कर रहा हूँ !”
“आह, धीरे करो !” वो मुझ से बोला- निकल जायेगा तुम्हारे मुँह में !
मैंने धीरे से कहा- क्या बात करते हो? तुम सुनील के सामने?
खैर सुनील सारा माजरा समझ गया और फोन काट दिया यह कह कर कि- बाद में बात
करते हैं। यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं।
मैं विनोद से लड़ने लगी- क्या करते हैं आप भी? सुनील भैया क्या समझेंगे?
विनोद- कुछ नहीं यार ! सब करते हैं, हम भी कर रहे थे, उसमें कौन सी बड़ी
बात है? चलो मैं तुमको एक बात बता दूँ, मुझे 10 दिनों के लिए मुंबई जाना
होगा। सॉरी यार, पर अगर मैं आते तुमको ही यह सब नहीं बता सकता था, नहीं
तो तुम नाराज हो जाती।
मैं अपना काम कर रही थी, मतलब मुँह से उसके लिंग को चूसने का काम !
विनोद चरम पर आ गया था मेरे सर को पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगा और जोर
जोर से आह उह्ह करने लगा। मैं समझ गई कि अब वो झड़ने वाला है, मैंने भी
अपनी गति बढ़ा दी।

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उसने अपना सारा पानी मेरे मुँह में निकाल दिया, मैं सारा पानी गटक गई,
मुझे आज बहुत अच्छा लगा था, मेरे दिमाग में आगे होने वाली बात चलने लगी
थी कि कल सुनील-सुशील दोनों के साथ सेक्स करने को मिलेगा ! बस यही सब सोच
सोच कर मेरा हाल बुरा हो रहा था।
विनोद- जान, आज मजा आ गया ! तुमने बहुत अच्छे से मुख मैथुन किया है, इससे
पहले ऐसा मजा कभी नहीं आया था।
मैंने कहा- इससे पहले तुमने भी कहाँ इतनी अच्छी बात की थी?
ऐसे ही बात करते करते हम सो गए बिना कपड़ों के ! विनोद को सुबह जल्दी जाना
था, उसने मुझे बस इतना ही कहा- अपना ख्याल रखना !
और वो दरवाजा लॉक करके चला गया। मैं देर तक सोती रही।
सुबह उठ कर फ्रेश होकर जैसे ही बाहर आघंटी बजी, दरवाजा खोला तो दूध वाला था।
दूध लिया, बाहर देखा तो सुशील मेरी तरफ़ ही देख रहा था, मैंने उसको कहा-
सुशील, चाय पीनी हो तो आ जाओ !
वो आ गया, उसने सारी औपचारिकताएँ की- नमस्ते भाभी ! भैया क्या सो रहे हैं?
मैंने कहा- नहीं, मुंबई गए हैं 10 दिनों के लिए !
इतना सुनते ही सुशील की तो बांछें खिल गई, उसने मुझे गोद में उठा लिया और
कहने लगा- मतलब दस दिन के लिए आप मेरी बीवी हो !
और मुझे अपना लंड पकड़ा दिया। मैं भी कहाँ देर करने वाली थी, जल्दी से उसका लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी।

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मैंने कहा- चाय पी लेते हैं, फिर करेंगे। कौन सी जल्दी है यार ! सुशील अब
दस दिन तक यही तो करना है, चलो सुनील को भी कह देते हैं।
सुशील ने मना कर दिया- नहीं भाभी, सुनील भाई को ना बुलाओ, मैं रवि को
बुला लेता हूँ, मजा आ जाएगा।
मैंने पहले ना-नुकर की, फिर मान गई, मुझे भी तो नया लिंग देखना था, पर
मैंने कहा- यार सुशील, तुम चाहे तो रवि को बुला लो पर सुनील को भी बुला
लेते हैं ना ! क्या दिक्कत है तुमको? अगर वो भी रहेगा तो मजा ज्यादा आएगा
! दो से तीन भले !
सुशील मान गया, बोला- चलो बुला लेंगे पर पहले रवि को आ जाने दो। आज हम
दोनों के साथ करना, कल तीनों मिल कर करेंगे।
मैं भी मान गई- ठीक है, जैसा तुम ठीक समझो।वो मुझे चूमने लगा जैसे कोई
प्रेमी अपनी प्रेमिका से बरसों बाद मिला हो।
मैंने कहा- इतनी क्या जल्दी है, चाय बनाते हैं, पीते हैं, फिर करेंगे !
मैंने चाय बनाई, हम बैठ कर बात करने लगे, चाय पीने लगे, वो मेरे कबूतर
दबा रहा था, धीरे धीरे वो मुझे गर्म कर रहा था और साथ साथ अपने कपड़े भी
उतार रहा था।
थोड़ी देर में ही हम दोनों नंगे हो गए। उसने मेरी फ़ुद्दी में अपनी जीभ डाल दी।
थोड़ी देर बाद मैंने कहा- मुझे भी तो अपने लौड़े का स्वाद चखाओ !
और हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए, मैं उसका लिंग मुँह में लेकर काफी
अच्छे से चूस रही थी और वो मेरी चूत को खूब मजा दे रहा था। उसका लिंग
मेरे गले तक आ रहा था जो मुझे काफी अच्छा महसूस करा रहा था।

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दस मिनट तक ऐसे ही करने के बाद सुशील उठा और मेरे उरोज दबाता हुआ मेरी
योनि में अपना लंड डालने लगा और एक ही झटके में उसने पूरा लंड अंदर उतार
दिया।
मैं जोर से चिल्ला उठी- अआह आह धीरे सुशील ! मारोगे क्या?
उसने मेरे होंट अपने होंटों में भर लिए और मुझे जोर जोर से चोदने लगा। आज
उसका जोश काफी हद तक था, उसके झटके मुझे पागल कर रहे थे, मैं हर झटके से
कराह उठती।
खैर मुझे काफी मजा आ रहा था, वो मेरे वक्ष बहुत जोर जोर से मसल रहा था,
बार बार अपना पूरा लण्ड बाहर निकालता और मुझे ऊपर से नीचे तक चूमता था और
फिर जोर से डालता था।
मैं झड़ रही थी उसको कस कर पकड़ कर- बस सुशील, अब और नहीं ! आज तो तुम क्या
कर रहे हो ! ऐसा तो कोई मंजा हुआ खिलाड़ी भी नहीं कर सकता है !
मैं तीन बार झड़ चुकी थी।
सुशील बोला- भाभी, मैं अब झड़ने वाला हूँ !
और इतना कहते ही मेरे मुँह के पास आ गया, अपना लिंग मेरे मुँह में डाल
दिया और जोर जोर से आगे पीछे करने लगा, मुझे पूरा हिला कर रख दिया, कोई 5
मिनट तक मुझे ऐसे ही करता रहा और जोर से पिचकारी छोड़ी और आह उह्ह करता
हुआ झड़ने लगा। आज उसके लण्ड से इतना पानी निकला था कि मेरा पूरा मुँह भर
गया। मैं सारा का सारा वीर्य धीरे धीरे करके अपने अन्दर उतारने लगी और
फिर उसका लिंग मुँह में लेकर साफ करने के बहाने बची हुए 2-4 बूंद भी पी
गई।
उसका लिंग जब तक छोटा नहीं हो गया, मैं उसको चूसती रही फिर हमने खूब देर
तक मुँह में मुँह डाल कर प्यार किया।

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

मैंने कहा- सुशील आज तो तुमने जादू कर दिया, कल तुम्हारे भैया ने भी बहुत
देर तक किया पर ऐसा मजा नहीं आया। आज क्या हुआ था तुमको?
सुशील- भाभी मुझे तीन दिन हो गए थे, रोज तुम्हारे सपने देखता था। मुझे
आपसे बहुत प्यार हो गया है, मैं आपके बिना नहीं रह सकता हूँ। आँखें बंद
करते ही आपके चुच्चे नजर आते हैं आपकी यह चूत नजर आती है, क्या मस्त चूत
है आपकी, कोई भी पागल हो जाये ! मैंने रवि को बताया तो वो बोला कि एक बार
बस एक बार अगर भाभी को मजा नहीं आया तो कभी भी नाम नहीं लूँगा उनका ! आज
रात को बुला लूँ ना उसको?
मैंने कहा- हाँ बुला लेना ! मुझे तुम्हारी ख़ुशी देखनी है, अगर तुम ऐसे
खुश हो अपनी भाभी को और एक दोस्त से चुदवा कर, तो ठीक है, मैं तुम्हारी
ख़ुशी के लिए उसके साथ भी करने के लिए तैयार हूँ।
फिर सुशील चला गया यह कह कर कि शाम को मिलते हैं भाभी !
रवि के साथ मुझे भी जिज्ञासा थी कि कैसा होगा रवि का लिंग? वो कैसे
करेगा? जैसा सुशील ने बताया था कि उसका लिंग उससे भी बड़ा है तो मुझे काफी
उत्तेजना हो रही थी, मैं शाम होने का इन्तजार करने लगी !
सोचते हुए कब आँख लग गई मुझे पता ही नहीं लगा !
मेरी नींद करीब शाम सात बजे खुली, मैंने उठ कर देखा, तो बाहर अँधेरा हो
चुका था, मैं सुशील और रवि का इन्तजार कर रही थी। काफी वक्त गुजर गया,
मैं ऐसे ही टीवी देखने लग गई !
करीब 8 बजे सुशील का फोन आया- भाभी, मै सॉरी कहता हूँ, अचानक पापा-मम्मी
के साथ गाँव में शादी में आना पड़ा, मैं आपसे कहने भी आया था, मैंने

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

डोर-बेल बजाई पर लाइट नहीं थी तो मैंने कई आवाज लगाई। शायद आप नींद में
थी तो…. आपको पता नहीं लगा होगा।
मैं- ऐसा कैसे कर सकते हो तुम सुशील? मैं तुम्हारे इन्तजार में आधी हो
रही हूँ और तुम मजे से शादी में चले गए?
सुशील- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ, बस दो
दिन की बात है, फिर भी हमारे पास 8 दिन रहेंगे सुहागरात मनाने को।
मैंने कहा- चलो ठीक है, आते ही मिलना !
और मैंने फोन रख दिया। मैं काफी उदास हो गई, मुझे तो दो जवान लंड के सपने
आ रहे थे, वो चकनाचूर हो गए थे।…………………………………

खैर मैंने अपने मन पर काबू किया और सुनील को फोन लगाया, मैंने उससे
गरमजोशी से कहा- सुनील भैया, खुश खबरी ! विनोद बाहर गए हैं।
सुनील- अरे वाह क्या बात है ! मजा आ गया, कितनी देर बाद मिलने का है?
मैंने कहा- तुम्हारा घर है, मैं तुम्हारी हूँ, जब मन हो, आ जाओ ! मैं
तुम्हारे इन्तजार में हूँ, कब आ रहे हो?
सुनील- बस आधे घंटे में हाजिर होता हूँ, और हाँ, खाना मत बनाना, मैं साथ
लेता आऊँगा।
सुनील आ गया, आते ही मैंने गले से लगाया, उसने मुझे चूमा और बोला- भाभी,
खाना ठंडा हो जायेगा, पहले खा लेते हैं।
मैंने हाँ में सर हिलाया और रसोई में से बर्तन ले आई। सुनील ने मेरी मदद
की खाना लगाते हुए !
सुनील ने पूछा- सुशील कब आएगा? मैं उसका भी खाना लाया हूँ।
मैंने कहा- नहीं, वो बाहर गया है अपने पापा के साथ, दो दिन हम ही रहेंगे।
सुनील- चलो कोई बात नहीं, मुझे ही डबल ड्यूटी करनी है मेमसाब !
मैंने कहा- हाँ, और इतने दिनों की भी कसर पूरी करनी है। वैसे सुशील आज
सुबह अपनी ड्यूटी कर गया हैl

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सुनील- क्या मतलब? क्या विनोद सुबह ही चला गया था?
मैंने कहा- हाँ, वो तो मुझे सोया छोड़ गए थे। सुशील को मैंने चाय के लिए
बुलाया तो वो चाय भी पी गया और मुझे भी रगड़ गया।
नाराज होते हुए सुनील- तो मुझे क्यों नहीं बुलाया?
मैंने कहा- चिंता न करो, विनोद 10 दिन में आयेंगे, 10 दिन मैं तुम्हारी
बीवी हूँ, जैसे चाहो करो, मजे करो ! नाराज न होइये जनाब !
हमने खाना ख़त्म किया और खाने के बाद, सेक्स मूवी सुनील लेकर आया था, वो
लगा दी। हम देखने लगे और वो मेरे कबूतर दबाने लगा, उसमें क्या मस्त सीन आ
रहा था, एक लड़का तीन लड़कियाँ, एक लड़की उसका लण्ड चूस रही थी और एक लड़की
के वो दबा रहा था और तीसरी लड़की ने अपनी चूत उस लड़के के मुँह में दे रखी
थी। काफी मजेदार सीन था। सुनील बोला- काश, ऐसा हो जाये तो मजा आ जाये
!”क्या कहते हो? ऐसा तीन लड़कियों के साथ सेक्स करोगे?”
सुनील ने कहा- हां !
मैंने कहा- ठीक है, तुम्हारी यह इच्छा मैं पूरी करूँगी, तीन तो नहीं पर
दो के साथ तो करवा सकती हूँ ! एक तो मैं और एक मेरी सहेली है सुनीता,
काफी सुंदर है, गोरी है, उसके चूचे अगर तुम देख लोगे तो पागल हो जाओगे,
क्या फिगर है उसका।
सुनील- अच्छा, सच सच बताओ कि क्या तुम ऐसा करोगी? अगर ऐसा किया न भाभी,
तो मैं हमेशा के लिए आपका गुलाम हो जाऊँगा, आपके हर आदेश की पालना होगी।
मैंने कहा- सच सुनील ! 3-4 दिन में ही मैं ऐसा कर दूंगी, वो इसलिए कि
उसको भी सेक्स की जरुरत है, उसका पति के किसी और से सम्बन्ध हैं तो वो
उसके साथ बहुत कम सेक्स करता है और करता भी है तो उसको पूरा मजा नहीं
देता है।
सुनील- तुमने तो कहा भाभी सुनीता खूबसूरत है? फिर भी उसका पति उसके साथ
सेक्स क्यों नहीं करता है?

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

मैंने कहा- सुनील भैया, खूबसूरती के मायने सभी जगह अलग अलग होते हैं उसके
पति की नजर में वो नहीं है खूबसूरत।
इसी तरह हम बात करते रहे, मूवी देखते रहे, वो अब तक मुझे पूरा नंगा कर
चुका था और खुद भी पूरा नंगा हो चुका था।
मैंने आज ही शेव की थी तो मेरी चूत चिकनी हो रही थी, वो देख कर खुश हुआ,
बोला- भाभी, क्या बात है? चिकनी की है आज तो आपने !
मैंने उसका लिंग मुँह में ले लिया, वो मेरी चूत सहलाता हुआ मुँह से जादू
बिखेरने लगा और हम 69 हो गए। में उसका लिंग जोर जोर से चूस रही थी, वो भी
दीवाने की तरह मेरी चूत को जुबान से रगड़ रहा था। बस ऐसा लग रहा था कि हम
पहली बार मिले हों, खूब जोश से सेक्स का मजा ले रहे थे।
अचानक मेरे फोन की घंटी बजी।
“अरे ! विनोद का फोन !”
मै- हेलो विनोद ! पहुँच गए?
विनोद- हाँ, अभी पहुँचा ही हूँ ! कैसी हो?
मैं- ठीक हूँ।
विनोद- तुम्हारी आवाज इतनी भारी कैसे हो रही है? क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं सेक्स मूवी देख रही थी तो बस.. सेक्स का मन… आह !
विनोद- यार मत तड़पाओ खुद को ! सुनील को बुला लो, मजे करो।
मैंने कहा- हाँ, अब यही रह गया है !
और अचानक मैं झड़ने को हुई, मेरे मुँह से आह निकल गई।
और मेरा पानी निकल गया।
और विनोद ने कहा- क्या हुआ जान…?
मैंने कहा- चलो सो जाते हैं, कल बात करेंगे।
और फोन रख दिया।

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सुनील से मैंने कहा- विनोद कह रहा था कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स कर लूँ,
अब उसको कैसे बताऊँ कि मैं तुम्हारे ही साथ हूँ।
अब सुनील ने अपना लंड डाल मेरी गीली चूत में घुसा दिया और जोर जोर से
झटके देने लगा।
और मैं आह उह्ह करती रह गई- सुनील, मजा आ रहा है, और जोर से करो ! और जोर से !
उसने तूफान सी तेजी ला दी चुदाई में और हम दोनों खूब जोर जोर से आह उह कर
रहे थे। यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं।
सुनील झड़ने के कगार पर आया तो मैंने कहा- मेरे मुँह में आ जाओ !
और उसने मेरे मुँह में भी वो ही तूफानी चुदाई चालू कर दी। थोड़ी देर में
वो झड़ गया, मैं उसका रस पी गई, उसकी आखिरी बूंद भी निचोड़ना चाह रही थी,
खूब देर तक उसके लंड को मुँह में लेकर चूसती रही।
वैसे मैं आपको एक बात बता दूँ कि कुछ समय से मैं वीर्य के स्वाद की
दीवानी हो गई थी।
जब मैंने टाइम देखने के लिए फोन उठाया तो पता चला कि मेरा फोन तो चालू ही
रह गया था और शायद विनोद ने बात सुन ली है।
मैं डर गई, मैंने सुनील को बताया और अपना फोन बंद कर दिया।

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मैंने कहा- अब क्या होगा होगा सुनील?
सुनील- कुछ नहीं उसी ने तो इजाजत दी है ना तुमको ! कह देना आज ही बुलाया था !
और मेरा दोस्त है वो, जब मेरी शादी होगी तो मेरी बीवी के साथ कर लेगा।
फिर हम ऐसे ही बात करते हुए सो गए। रात को बीच में एक बार और किया, सुबह
देर तक सोते रहे।
उठते ही सुनील ने कहा- अपनी सहेली सुनीता से बात करना, आज मजा करेंगे यार !
जब मैंने टाइम देखने के लिए फोन उठाया तो पता चला कि मेरा फोन तो चालू ही
रह गया था और शायद विनोद ने बात सुन ली है।
मैं डर गई, मैंने सुनील को बताया और अपना फोन बंद कर दिया।
मैंने कहा- अब क्या होगा होगा सुनील?
सुनील- कुछ नहीं उसी ने तो इजाजत दी है ना तुमको ! कह देना आज ही बुलाया था !
और मेरा दोस्त है वो, जब मेरी शादी होगी तो मेरी बीवी के साथ कर लेगा।
फिर हम ऐसे ही बात करते हुए सो गए। रात को बीच में एक बार और किया, सुबह
देर तक सोते रहे।
उठते ही सुनील ने कहा- अपनी सहेली सुनीता से बात करना, आज मजा करेंगे यार !
मैंने नाश्ता बनाया और हमने मिल कर खाया।
सुनील के दिमाग में तो सुनीता चल रही थी, उसने कहा- सुनीता को फोन लगाओ
ना ! कुछ बहाना बना कर बात करो ना !
मैंने कहा- क्या सुनील भैया ! बेसब्रे न होइए, मैं वादा करती हूँ कि वो
तुम्हारे साथ सेक्स करेगी, बस थोड़ा सब्र करो।

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सुनील- भाभी, यही तो नहीं होता ! बस मुझे आप दोनों के साथ सेक्स करना है
पर कैसे होगा भाभी सब?
मैं- तुमको चिंता की जरुरत नहीं है, मैं सब कुछ कर लूंगी, जब मैं कह रही
हूँ तो कोई कारण होगा। कह रही हूँ ना कि अभी फोन लगाती हूँ उसको।
और मैंने सुनीता को फोन लगाया, पहले इधर उधर की बात की फिर पूछा- जीजू कहाँ हैं?
वो बोली- नहीं है यहाँ ! होगा वही मेरी सौत के यहाँ !
मैं- कब आयेंगे?
सुनीता- पता नहीं।
मैं- तू यहाँ आ सकती है क्या मेरे यहाँ 2-3 दिन के लिए? विनोद नहीं हैं,
बाहर गए हैं, मजा करेंगे।
सुनीता- हाँ जरूर यार ! मैं बस उनको फोन करके बोल देती हूँ कि मैं
तुम्हारे यहाँ जा रही हूँ, शाम को 4-5 बजे तक मिलते हैं।
मैंने सुनील को खुशखबरी सुनाई- सुनीता आ रही है, 2-3 दिन यहीं रुकेगी,
मजा करते हैं।
सुनील- और वो नहीं मानी तो क्या होगा भाभी?
मैं- तुम चिंता मत करो सुनील भैया ! बस तुम देखो कि तुम्हारी भाभी क्या करती है।
और हम लोग नहाने चले गए, एक दूसरे को खूब रगड़ कर नहलाया, उसने मेरी चूत
पर साबुन लगाया और खूब अच्छे से साफ की। मैंने उसके लंड को रगड़ रगड़ कर
साफ किया। ऐसा करते हुए हमारा मन भटक गया और हमने बाथरूम में ही सेक्स
किया, उसने मेरे कबूतर दबा दबा कर वो हाल कर दिया कि मुझे कहना पड़ा- धीरे
यार !
उसने देर न करते हुए से मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझे खड़े खड़े ही
खूब चोदा। थोड़ी देर में ही मैं झड़ गई पर सुनील अब भी कर रहा था बिना रुके
हुए ! सुनील की रफ़्तार और तेज हो गई।
मैंने सुनील को कहा- सुनील भैया, मुँह में ही डालना माल !

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उसने हामी भर दी, झटके से लंड बाहर निकाला, मुँह में आ गया और मुँह को
चोदने लगा। थोड़ी देर में वो झड़ गया, मेरे मुँह में अपने वीर्य की गरम तेज
धार छोड़ दी, मैं सारा वीर्य गटक गई।
सुनील- भाभी, आपको कैसा लगा मेरा माल? आप अपने आप ही बड़े मजे से पीती
हैं। क्या बात है ! आपकी यह अदा मुझे अच्छी लगती है।
मैं- भैया, मुझे पता नहीं तुम्हारे साथ सेक्स करने के बाद से वीर्य अच्छा
लगने लगा है, वैसे मैं विनोद का भी लेती थी मुँह में, पर इतने शौक से
नहीं ! वैसे सबसे खुशबूदार और अच्छा माल सुशील का लगा, उसके बाद
तुम्हारा, उसका लण्ड कितना बड़ा है ना?
सुनील- हाँ भाभी, मुझे देख कर बहुत अच्छा लगा, मन हुआ कि मैं हाथ लगा कर देख लूँ।
मैंने शाम की योजना बताई- तुम चले जाना सुनीता के आने से पहले ! मैं
अकेले में उससे सेक्सी बात करते हुए उसको सारी बात बताऊँगी, फिर मैं
तुमको फोन करुँगी।
चार बजे सुनीता आ गई, मैंने उसका स्वागत किया, चाय पी और बैठ कर बात करने लगे।
मैंने उससे पूछा- राकेश तेरे साथ अब सेक्स करता है या नहीं?
उसने मना कर दिया- नहीं, वो बहुत बुरा है, महीने में एक दो बार करता है।
मैंने कहा- तो तुम किसी किसी और का सहारा क्यों नहीं लेती हो? मैं तो
करती हूँ इनके एक दोस्त के साथ !
सुनीता- मेरी ऐसी किस्मत कहाँ? मुझे तो कोई नहीं मिलता।
मैंने कहा- मैं तुम्हारी मदद करूँ अगर तुम चाहो तो?
सुनीता- सच? किससे, कैसे?

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मैंने कहा- सुनील जिसके साथ मैं करती हूँ।
सुनीता- पर क्या वो मानेगा?
मैंने कहा- क्यों नहीं ! मेरी बात नहीं टाल सकता है वो !
और मैंने सुनील को फोन लगाया, बोला- सुनील, मेरे घर आ जाओ !
सुनील आ गया। मैंने उन दोनों का परिचय करवाया। खाना बना हुआ था, हमने साथ
बैठ कर खाना खाया।
बात करते हुए मैंने सुनील से कहा- सुनीता मेरी अच्छी दोस्त है, इसके पति
सेक्स नहीं करते हैं ठीक से इसके साथ !
सुनील- अरे इतनी खूबबसूरत बीवी के साथ सेक्स नहीं करता है? आप बहुत
खूबसूरत हैं सुनीता जी ! आप जैसी बीवी मेरी होती तो मैं कम से कम 4-5 बार
रोज सेक्स करता।
मैं- तो अब क्या इरादा है?
सुनीता- हे सुरभि, क्या बात करती है, मुझे शर्म आती है।
सुनील सुनीता के हाथ पर हाथ हुए बोला- सच सुनीता जी, मैंने आपसे ज्यादा
खूबसूरत औरत नहीं देखी।
सुनील आ गया। मैंने उन दोनों का परिचय करवाया। खाना बना हुआ था, हमने साथ
बैठ कर खाना खाया।
बात करते हुए मैंने सुनील से कहा- सुनीता मेरी अच्छी दोस्त है, इसके पति
सेक्स नहीं करते हैं ठीक से इसके साथ !
सुनील- अरे इतनी खूबबसूरत बीवी के साथ सेक्स नहीं करता है? आप बहुत
खूबसूरत हैं सुनीता जी ! आप जैसी बीवी मेरी होती तो मैं कम से कम 4-5 बार
रोज सेक्स करता। यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं।
मैं- तो अब क्या इरादा है?
सुनीता- हे सुरभि, क्या बात करती है, मुझे शर्म आती है।

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सुनील सुनीता के हाथ पर हाथ हुए बोला- सच सुनीता जी, मैंने आपसे ज्यादा
खूबसूरत औरत नहीं देखी।
हमने खाना खत्म किया और कमरे में बैठ कर बात करने लगे। मैंने सुनील के
लंड पर हाथ रख दिया। सुनीता यह सब देख रही थी, सुनील का लंड कड़क हो गया
उसने मेरे वक्ष दबाना चालू कर दिए, सुनीता सब देख देख कर गर्म हो रही थी।
मैंने सुनील की जिप खोल दी और लंड बाहर निकाल लिया। सुनीता उसे देख कर आह
किये बिना नहीं रह सकी।
मैंने कहा- सुनीता, ऐसे दूर से आह करने से कम नहीं चलेगा ! आओ यहाँ।
वो बिना किसी संकोच के पास आ गई आते ही सुनील ने सुनीता को किस किया और
उसके वक्ष दबाये।
सुनील- वाह ! क्या बूब्स है सुनीता जी आपके ! मजा आ गया, आपका गोरा बदन
और ये छोटे छोटे से चूचे 30 नम्बर के होंगे ! और इतने कठोर जैसे पहले कभी
किसी ने नहीं छुआ हो ! आपका संगमरमरी बदन जैसे दूध हो ! इतनी गोरी हैं
आप, मैंने ऐसे क्या पुण्य किए थे जो आप जैसे दो दो खूबसूरत बलाएँ मेरे
साथ हैं और दोनों मेरे साथ सेक्स करने को आतुर हैं। वो भी एक साथ !
फिर सुनील सुनीता के एक एक करके सारे कपड़े उतारने लगा और साथ मई वो भी
नंगा हो रहा था। मैं देख रही थी कि वाकई सुनीता का बदन काफी सुंदर था,
उसके वक्ष काफी ठोस थे और छोटे भी, जैसे अभी अनछुए हों।
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने सुनीता के वक्ष दबा दिए और उसके मुँह में मुँह
डाल कर उसको प्यार करने लगी।
सुनील उसकी गोरी चूत चाट रहा था, मैं उसके बूब्स दबा रही थी, सुनीता को
काफी मजा आ रहा था, वो आह उह कर रही थी।
अचानक सुनीता चिल्ला उठी- बस बस ! अब नहीं रुक जाता ! मैं जा रही हूँ !

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और आह उह्ह करते हुए झड़ने लगी, सुनील उसका सारा पानी चाट चाट कर साफ कर रहा था।
अब सुनील उठा और अपना लंड सुनीता के मुँह के पास ले गया।
सुनीता ने कहा- छीः !
मैंने कहा- सुनीता, एक बार ले लो ! फिर मजा न आये तो कभी मत करना !
उसने मन मार कर मुँह में ले लिया तो थोड़ी देर में उसको अच्छा लगाने लगा।
मैंने पूछा- क्यों सुनीता? मजा आया ना मुँह में लेकर?
सुनीता ने हाँ में सर हिला दिया और जोर जोर से सुनील का लिंग अन्दर बाहर
करने लगी। इधर सुनील मेरी फ़ुद्दी को मजे दे रहा था। यह कैसा मंजर था
बिल्कुल सेक्सी मूवी जैसा ! अब मेरी भी बारी थी झड़ने की, मैं भी जोश में
झड़ गई, सुनील ने मेरा माल भी चाट कर साफ कर दिया।
उधर सुनीता के मुँह में सुनील भी तेजी से करने लगा तो मुझे लगा कि अब वो
झड़ने वाला है तो मैंने कहा- मेरे मुँह में डालना अपना सारा माल !
पर सुनील को तो सुनीता कुछ ज्यादा ही भा गई थी, उसने अपना सारा माल
सुनीता के मुँह के हवाले कर दिया।
मैंने सुनीता को बोला- अंदर ले लो ! मजा आ जायेगा।
सुनीता ने ऐसा ही किया।
मैंने कहा- क्यों सुनीता? कैसा लगा इसका माल? और आज का प्रोग्राम?
अब तक सुनीता काफी खुल चुकी थी, बोली- मजा आ गया ! और यह भी अच्छा लगा
माल ! बस इसका हाल बुरा है !
उसने अपनी चूत की तरफ इशारा किया।

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मैंने कहा- बस, अब इसकी ही बारी है !
और मैंने सुनील का लंड मुँह में ले लिया, उसको चूसने लगी, कभी सुनीता की
चूत का रस ले लेती, कभी सुनील लंड का रस ले लेती। थोड़ी देरमें सुनील फिर
से तैयार हो गया तो मैंने कहा- अब देर न करो सुनील ! इसको पहले शांत कर
दो !
सुनील को भी बस सुनीता ही दिख रही थी, उसने आव देखा न ताव, सुनीता की चूत
में लंड डाल दिया। सुनीता सिसक कर रह गई क्यूंकि उसके होंठ मेरे होंठ में
थे, मैं उसके बूब्स दबा रही थी। क्या नज़ारा था ! बस मजा ही मजा !
सुनील को मस्ती सूझी, उसने मुझे भी पास लेटने का इशारा किया। जैसे ही मैं
पास आई, उसने सुनीता की चूत से निकाल कर मेरी चूत में डाल दिया। यह कहानी
आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं।
थोड़ी देर मेरे साथ करने के बाद फिर सुनीता की चूत में ! और ऐसे वो करता रहा।
हम दोनों इस खेल में दो दो बार झड़ चुकी थी, अब बारी सुनील के झड़ने की थी,
मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और हिलाने लगी। उसकी पिचकारी छुट गई,
सुनीता भी पास आ गई और थोड़ा उसके मुँह में भी डलवाने का इशारा कर दिया,
दोनों ने थोड़ा-थोड़ा वीर्य अपने मुँह में लिया और गटक गई।
फिर हम लेटे लेटे बात करने लगे, मैंने कहा- कल और मजा आएगा, कल सुशील भी आ जायेगा।
सुनीता- अब यह सुशील कौन है?
मैंने कहा- यहीं पास में रहता है, काफी अच्छा लड़का है और हम तीनों खेल चुके हैं।
सुनील- हाँ सुनीता जी, काफी अच्छा लड़का है और उसका लंड काफी सुंदर और बड़ा
है, आपको आज से ज्यादा मजा आएगा, बहुत अच्छे से चोदन करता है।
और उसकी तारीफ करते हुए हम तीनों कब सो गए पता ही नहीं चला।
फिर हम लेटे लेटे बात करने लगे, मैंने कहा- कल और मजा आएगा, कल सुशील भी आ जायेगा।
सुनीता- अब यह सुशील कौन है?
मैंने कहा- यहीं पास में रहता है, काफी अच्छा लड़का है और हम तीनों खेल चुके हैं।
सुनील- हाँ सुनीता जी, काफी अच्छा लड़का है और उसका लंड काफी सुंदर और बड़ा
है, आपको आज से ज्यादा मजा आएगा, बहुत अच्छे से चोदन करता है।
और उसकी तारीफ करते हुए हम तीनों कब सो गए पता ही नहीं चला।
तीनों बिना कपड़ों के थे, रात को सुनील की नींद खुली तो वो सुनीता को फिर
चोदने की तैयारी में था, सुनीता भी इसके लिए जैसे तैयार थी, पलंग हिलने
से मेरी नींद खुली तो मैंने कहा- सुनील क्या बात है, काफी मर्दानगी आ रही
है?

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सुनील- क्या करूँ भाभी ! आप दो दो हसीनाओं के बीच होने के बाद भी
मर्दानगी जोश नहीं मारेगी तो कब मारेगी ! और फिर सुनीता की सुन्दरता मुझे
पागल कर रही है, मैं आपको तो फिर भी कभी भी रगड़ लूँगा पर इनको चोदने का
मौका कब मिलने वाला है पता नहीं और यह कभी मेरे साथ सेक्स का हाँ भरे या
नहीं?
सुनीता- क्या बात करते हैं? सुनील जी आपके साथ जो मजा आया है शायद कभी
ऐसा मजा नहीं आया था और आज से मैं आपकी गुलाम हूँ, आप जब भी आदेश करेंगे,
मैं आपके नीचे बिछने के लिए तैयार हूँ, बस आप चोदते रहे, कभी आपका लंड
मेरे अन्दर से बाहर ना निकले, ऐसा मन करता है।
मुझे कुछ नहीं सूझा, मैं अपने हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी तो सुनीता ने
मुझे इशारा करके अपने पास बुला कर मेरी चूत अपनी जुबान से रगड़ने लगी,
मुझे मजा आने लगा।
इधर सुनील के धक्के तेज हो रहे थे, उसके धक्के से सुनीता की जुबान भी तेज
चल रही थी और हम दोनों सुनीता और मैं साथ साथ झड़ गए। सुनील ने सुनीता की
चूत से बाहर निकाल कर लण्ड मेरी चूत में डाल दिया और तेज तेज प्रहार करने
लगा।
थोड़ी देर में मैं फिर झड़ गई। सुनील ने फिर अपना लंड बाहर निकाल कर सुनीता
की चूत में डाल दिया और उसकी सेवा करने लगा। थोड़ी देर में सुनीता की चूत
में ही सुनील झड़ गया तो मैं उससे लड़ते हुए बोली- मुँह में क्यों नहीं
दिया?
और मैं सुनीता की चूत चाटने लग गई। दोनों के रस का स्वाद और भी मजेदार
था। मैंने थोड़ा सा रस मुँह में लेकर सुनीता को भी चखाया, सुनीता को भी
मजा आ गया, बोली- वाह सुरभि ! मजा आ गया ! तुम्हारी वजह से मेरा जीवन
धन्य हो गया ! सुनील जी, थैंक्स !
सुनील- आप जैसे खूबबसूरत औरत पाकर मैं धन्य हो गया, कल सुशील मैं आप और
भाभी सभी मिल कर और ज्यादा मजा करेंगे।

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मैंने बीच में कहा- तुम दोनों के लिए एक और सरप्राइज है, वो कल ही पता
लगेगा और इतना मजा आएगा कि बस…
दोनों आश्चर्य से मेरी ओर देखने लगे और पूछने लगे तो मैंने कहा- यह तो कल
ही पता चलेगा।
सुनील और सुनीता बस पूछते रहे पर मैंने नहीं बताया।
खैर रात को हम सो गए, अगले दिन तो सुनीता अकड़ गई थी, उसकी इतनी ज्यादा
चुदाई पहली बार हुई थी।
शाम को सुशील का फोन आया- भाभी, मैं आ गया हूँ, क्या आदेश है मेरे लिए?
क्या करूँ क्या नहीं?
मैं- अरे सुशील, आ जाओ ना ! मैं कब से इन्तजार कर रही हूँ तुम्हारा !
सुशील- और रवि को..?
मैं- जरूर लेकर आओ ! और तुम्हारे लिए एक तोहफा भी है, शायद तुमको अच्छा
लगे, सब काम से निपट कर आना, बार बार जाने का काम मत रखना।
रात करीब आठ बजे सुशील आ गया। उस समय सुनील टीवी देख रहा था, उसने आते ही
सुनील से नमस्ते किया, सुनीता मेरे साथ रसोई में थी।
वो सीधा मेरे पास आया- भाभी, मैं आ गया !
ऐसा कहता हुआ आ ही रहा था कि सुनीता को देख कर ठिठक गया और नमस्ते भाभी
नमस्ते दीदी !
उसको लगा कि कोई मेरी ननद वगैरह कोई होगी।
सुशील- अच्छा भाभी, मैं यह कहने आया था कि कोई काम हो तो बोल देना, मैं आ
गया हूँ, और मैं अब चलता हूँ।
मैं- अरे सुशील, कहाँ जा रहे हो? रुको ! यह सुनीता है, मेरी सहेली ! और
तुम रवि को लेन वाले थे? क्या हुआ उसका?
सुशील- वो अब आएगा भाभी ! मैं उसको फोन करूँगा तब !
खाना बन चुका था, मैंने कहा- रवि को भी बुला लो, वो भी साथ खाना खा लेगा।

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सुशील ने उसको फोन लगाया, उसने कहा आता हूँ ! पाँच मिनट में पहुच जाऊँगा,
तुम्हारे फोन का ही इन्तजार था।
सुनील और सुनीता कुछ नहीं समझे थे, तब तक सुनील ने मुझे अंदर आने का
इशारा किया, हम दोनों अंदर गए, उसने पूछा- यह कौन है? और सब क्या है?
मैंने कहा- यह भी हमारी राजदार है और तुम लोग इसको भी भोग सकते हो।
सुशील ख़ुशी से उछल पड़ा- सच भाभी?
और उसने मुझे ख़ुशी से चूम लिया। घंटी बजी, यह रवि ही था, सुशील ने दरवाजा
खोला, रवि अंदर आ गया, वह इतने सब लोग देख कर घबरा गया- नमस्ते भाभी !
बोल कर एक तरफ बैठ गया। सुनील रवि को देख रहा था, वो मेरी तरफ आश्चर्य से
देख रहा था। मैंने कुछ नहीं बोला।
सुशील ने परिचय कराया- यह रवि है मेरा दोस्त ! और ये सुनील भैया हैं, और
ये सुनीता दीदी हैं।
थोड़ी देर में ही रवि हम सबमें घुलमिल गया। रात के 9.30 बज चुके थे, टीवी
चल रहा था, कुछ मजेदार देखते हैं !
माहौल को सेक्स की तरफ ले जाने के लिए मैंने सेक्सी फिल्म लगा दी, सब मजे
से देखने लगे, सब गर्म होने लगे।
सुनील ने सुनीता के कबूतर दबा कर कहा- क्या हो रहा है सुनीता जी? क्या हाल है?
सुशील मेरे पास आ गया और मेरे साथ मजे लेने लगा। रवि बैठा सब देख रहा था,
उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था तो वो टीवी देख रहा था।
मैंने सुशील से कहा- रवि को बुला लो, बेचारा अकेला बैठा है।
रवि मेरे पास आ गया, मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया, वो पूरी तरह से कड़क
हो रहा था, मैंने कहा- वाह रवि बाबू ! बिन कुछ करे इतना कड़क?
रवि बोला- क्या करूँ भाभी ! सब कुछ देख देख कर मेरा हाल बुरा है, मैंने
आज से पहले ये सब नहीं देखा था।
सुनील ने अब तक सुनीता को उपर से नंगा कर दिया था, उसके दूध बाहर आ चुके
थे, उस पर सुशील की नजर पड़ गई, सुशील बोला- वाह क्या कबूतर हैं सुनीता जी
के !
मैंने कहा- छू कर देखो और मजा आएगा।

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सुशील सुनीता के पास गया अब मैं और रवि रह गए थे। सुशील सुनीता के बूब्स
पर लग गया और रवि मेरे ! रवि मुझ पर मरता था, वो मुझे बेतहाशा चूम रहा था
और जोर जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था, मुझे मजा आ रहा था।
सुशील और सुनील ने सुनीता के एक एक स्तन पकड़ रखा था और दोनों दबा रहे थे।
मैंने पूछा- क्यों सुनीता, कैसा लग रहा है?
सुनीता बोली- मजा आ रहा है यार ! ऐसा लग रहा है कि मैं किसी अंग्रेजी
फिल्म की हिरोइन हूँ।
अब सुनीता का हाथ सुशील के लिंग पर जा पहुँचा था, वो भी धीरे धीरे सुशील
को नंगा कर रही थी, उसने उसका लिंग बाहर निकाल लिया और सुनील खुद ही नंगा
हो गया। सुनील का ध्यान सुशील के लिंग पर गया, उसने उसके लिंग को छू
लिया, बोला- सुशील, क्या मजेदार लिंग है तुम्हारा !
और आगे पीछे करने लगा। सुशील को मजा आया वो बोला- सुनील भैया, आपने रवि
का नहीं देखा न इसलिए ऐसा कग रहे हो, एक बार उसका देख लोगे तो मजा आ
जायेगा !
इतना कहते ही मैंने रवि की पैंट खींच दी और रवि को नंगा कर दिया। अब सबका
ध्यान रवि के ऊपर गया। सुनीता सुशील-रवि दोनों का लिंग बारी बारी देख रही
थी, उससे रहा नहीं गया, उसने कहा- सबके लिंग अलग अलग तरह के होते हैं, यह
मुझे आज पता लगा। जब भी यह बात होती थी कि सबके साथ अलग अलग मजा आता है
तो मैं नादान नहीं समझ सकती थी। अगर सुरभि तू नहीं मिलाती तो !
सुनीता ने सुनील का लिंग मुँह में ले लिया, मैंने रवि का ! सुशील अकेला
था तो सुनील ने उसको पास बुलाया और सुनील ने सुशील का लिंग मुँह में ले
लिया। सब मजे कर रहे थे।
थोड़ी देरमें रवि से नहीं रहा गया, उसने कहा- प्लीज भाभी, मुझे आपकी चुदाई
करनी है, फिर जितना चाहे चूस लेना। मुझ से नहीं रहा जाता है अब और !
वो मेरे मुँह से हट कर जल्दी से मेरी चूत पर आ गया। उसका सात इंच लम्बा,
पतला, एकदम सीधा लिंग था, काफी सुंदर और आकर्षक ! कोई भी देख कर मुँह में
लेने का मन बना ले।
उसने अंदर डालते ही बस…

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सुनीता ने सुनील का लिंग मुँह में ले लिया, मैंने रवि का ! सुशील अकेला
था तो सुनील ने उसको पास बुलाया और सुनील ने सुशील का लिंग मुँह में ले
लिया। सब मजे कर रहे थे।
थोड़ी देर में रवि से नहीं रहा गया, उसने कहा- प्लीज भाभी, मुझे आपकी
चुदाई करनी है, फिर जितना चाहे चूस लेना। मुझ से नहीं रहा जाता है अब और
!
वो मेरे मुँह से हट कर जल्दी से मेरी चूत पर आ गया। उसका सात इंच लम्बा,
पतला, एकदम सीधा लिंग था, काफी सुंदर और आकर्षक ! कोई भी देख कर मुँह में
लेने का मन बना ले।
उसने अंदर डालते ही बस… चुदाई चालू कर दी उसके झटके काफी तेज थे जैसे
उसने कभी चूत देखी ही ना हो।
मैं झड़ने लगी- रवि ! आह ! मजा आ गया आह…
आह करती हुए मैं झड़ने लगी।
उधर सुनीता का हाल बुरा था, उसने कहा- तुम दो दो होते हुए भी मेरी चूत को
प्यासा छोड़ा हुआ है? कोई तो करो !
सुशील ने देर न करते हुए अंदर डाल दिया, सुनील ने सुनीता के मुँह में डाल
दिया, सब काम में व्यस्त थे, बस कमरे में आह उह्ह की आवाज आ रही थी, इतना
मोहक नजारा था कि कोई भी देख ले तो बिना कुछ करे ही उसका पानी निकल जाये।
थोड़ी देर में सुनीता आह की आवाज के साथ अकड़ गई और झड़ने लगी।
रवि के झटकों की गति और तेज हो गई, मैंने कहा- कोई भी कही नहीं निकलेगा !
सभी मेरे मुँह में ही अपना वीर्य डालेंगे।

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रवि ने कहा- आह भाभी ! मैं आ रहा हूँ।और वो मेरे मुँह में आ गया और झड़ने
लगा। उसकी धार इतनी तेज थी कि मेरे गले तक जा पहुँची। आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद उसके
पानी का ! कह नहीं सकती।
उधर रवि झटके लगा रहा था, मेरा पूरा मुँह उसके वीर्य से भर गया, मैं मजे
से सारा का सारा गटक गई।
अब सुशील की बारी थी- मैं क्या करूँ भाभी?
मैंने कहा- आ जाओ मेरे राजा मेरे मुँह में !
वो भी आ गया और झटकों के साथ मेरे मुँह में वीर्य की बारिश करने लगा।
क्या स्वाद बन गया था अब रवि का और सुशील का मिल कर ! मजा आ रहा था।
उधर सुनील सुनीता के मुँह में झटके लगा रहा था, वो वहीं झड़ गया और सुनीता
ने भी सारा वीर्य गटक लिया और सुनीता और मैं मुँह से मुँह मिला कर एक
दूसरे को एक दूसरे के मुँह में रखे हुए वीर्य का स्वाद चखाने लगी।
थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से दौर शुरू हुआ, मैंने रवि का लिंग मुँह
में ले रखा था, थोड़ी देर में ही उसका खड़ा होने लगा। यह देख कर सुनीता ने
भी सुशील का लिंग मुँह में ले लिया और सुनील का हाथ से मैंने पकड़ लिया।
अब सुनील ने मेरी चूत में लिंग डाल दिया और आराम से लेट गया, बोला- आज
रात भर मैं यह एक ही दौर करूँगा।
थोड़ी देर में रवि ने सुनीता की चूत में लिंग डाल दिया और धीरे धीरे हिलने
लगा। सुशील का लिंग सुनीता के मुँह में था। फिर रवि सुनीता के मुँह में
पहुँच गया, सुशील मेरे पास आ गया। सुनील सुनीता की चूत में !

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

बस ऐसा ही चलता रहा, इसी खेल में करीब एक घंटा ही गुजर गया, सुनीता और
मैं तीन बार झड़ गए। अब बारी उन तीनों की थी, वो भी अब करीब आ चुके थे,
सुनील तो सुनीता की चूत में ही झड़ गया, सुशील और रवि दोनों का उबाल एक
साथ आया था तो सुशील सुनीता के मुँह में और रवि मेरे मुँह में झड़ने लगा।
हमने इस बार वीर्य अंदर नहीं गटका बल्कि एक दूसरे के मुँह में डाल कर
उसका मिक्स स्वाद बनाया और आधा आधा दोनों ने पी लिया।
आज मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा था और इसका कारण था कि तीन अलग अलग
आकार के लिंग घुसे थे इस मेरी चूत में, जिनमें रवि का तूफान बहुत तेज था।
सुनीता का भी यही हाल था।
खैर हमने ऐसे 3 दिन मजा किया और फ़िर सुनीता अपने घर जाने की बात करने
लगी, उसने सबको धन्यवाद दिया, फ़िर दोबारा इस खेल में फिर शामिल होने का
वादा किया, उसके बाद सुनीता चली गई।
अब मैं अकेली और वो तीन शेर ! अभी विनोद को आने में पाँच दिन और थे तो
रवि सुशील और सुनील के साथ मैंने खूब मस्ती की। अब सारे लिंग मुझ अकेली
को ही झेलने थे।
सुनीता के जाते ही पहले तो हमने आराम किया फिर से सेक्स का खेल शुरू हो गया।
रवि और सुशील तो हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहते हैं, हम सभी नंगे थे,
मैंने रवि का लिंग कड़क देख उसको छू लिया, वो मेरे बूब्स दबाने लगा। उधर
सुशील मेरी चूत चाटने लगा और सुनील ने अपना लिंग मेरे मुँह के हवाले कर
दिया।
रवि का लिंग सबसे बड़ा था तो मैंने कहा- चलो, मैं तुम तीनो के लिंग नापती हूँ।
मैंने इंच-टेप लिया और रवि का सात इंच, सुशील का लगभग साढ़े छः इंच और
सुनील का साढ़े पाँच इंच !
सुनील को शर्म आई।

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रवि का सबसे सुंदर लिंग था, मैंने कहा- सुनील तुम मेरे सबसे पुराने आशिक
हो, तुम्हारा सबसे बढ़िया है, पर रवि का सबसे बड़ा है और सुंदर भी है, एकदम
सीधा लिंग है, उसके बाद सुशील का भी काफी अच्छा है।
और सुनील दोनों के लिंग छू कर देखने लगा और आगे पीछे करने लगा। उसने रवि
का लिंग मुँह में ले लिया तो रवि को मजा आने लगा। सुशील ने सुनील का मुँह
में ले लिया और मैंने सुशील का लिंग मुँह में लिया काफी देर तक हम लोग
ऐसे ही मजे करते रहे। उसके बाद रवि नीचे लेट गया, उसने मुझे अपने ऊपर
लिटा लिया और मेरी चूत में लिंग डाल दिया, फिर हाथ लगा कर देखा मेरी चूत
को और बोला- सुनील भैया, आप ऊपर से डाल दो !
मैं बोली- नहीं नहीं ! मेरी फट जाएगी !
वो बोला- नहीं, जगह है भाभी !
और सुनील ने भी अपना लिंग मेरी चूत में डाल दिया। क्यूंकि दोनों के लिंग
मोटे नहीं थे तो आराम से चले भी गए। मुझे अदम्य आनन्द आया, मैंने कभी
कल्पना नहीं की थी कि मेरी चूत में दो दो लिंग डलेंगे।
उधर सुशील मेरे मुँह को चोद रहा था झटके चालू थे मेरे बूब्स को वो रगड़
रहे थे, मेरा इस्तेमाल वो रण्डी की तरह कर रहे थे पर मुझे काफी मजा आ रहा
था।
“सुशील, तू भी आ जा ! तीनों ही डालेंगे भाभी की चूत में !”
मैंने कहा- कैसे, कहाँ से डालोगे?
तो वो बोला- मजाक कर रहा था !
रवि ने लिंग बाहर निकाला तो सुनील का भी निकल गया। अब वो मेरे मुँह में आ
गया अब सुशील ने डाल दिया और सुनील ऊपर से मेरी चूत में पेलने लगा। अब
सुनील फिर मेरे मुँह में आ गया और रवि ने ऊपर से मेरी चूत में डाल दिया।
अबकी बार दोनों बड़े लिंग मेरी चूत में थे तो मेरा चिल्लाना वाजिब था,
मेरी चूत फट सी गई थी और वो बस जोर जोर से चुदाई कर रहे थे। उनका निकलने
का नाम नहीं ले रहा था। मेरा करीब पाँच बार पानी निकल गया।
कोई एक घंटे बाद शुरुवात सुनील से हुई, उसका निकलने लगा, वो आह उह्ह करता
हुआ वो मेरे मुँह में झडने लगा और मैं जोश में पूरा गटकती गई।

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रवि ने कहा- हटो सुनील भैया, मैं भी गया।
और वो दौड़ कर मेरे मुँह में आ गया और अपना पानी से मेरा मुँह भरने लगा।
मैं स्वाद ले लेकर उसको गटकने लगी। सुशील अभी भी झटके मार रहा था और वो
भी अब थक गया था और आह उह्ह करता हुआ मेरे मुँह में आया और झड़ने लगा।
मैंने उसका भी वीर्य गटक लिया और तीनों को बड़े प्यार से चूमा, कहा- मजा आ
गया ! आज की चुदाई मुझे हमेशा याद रहेगी। मैंने कभी नहीं सोचा था ख़ी मेरी
चूत में दो दो लंड अंदर घुसेंगे। वाह, थैंक्स सुशील ! रवि के साथ सेक्स
करने का मजा ही अलग है !
और इसी तरह हमने और पाँच दिन में करीब 15 बार सेक्स किया होगा, मेरी चूत
काफी बड़ी हो गई थी क्यूंकि दो दो लंड डाले जा रहे थे।
विनोद के आने का समय हो चला था हमने आखिरी बार और सेक्स किया और सब अपने
अपने घर चले गए।
विनोद आ गया और आते ही बोल पड़ा- ओह्ह सुरभि ! सबसे पहले तो मेरा हाल बुरा
है थकान उतारनी है।
मैं समझ गई, मैंने उसका लिंग बाहर निकाला और मुँह से रगड़ रगड़ कर आगे पीछे
करने लगी। उसने मेरी चूत में हाथ डाला, मेरी चूत काफी गीली हो रही थी
क्यूंकि अभी अभी मैंने तीनों के साथ चुदाई की थी और मेरी चूत का छेद भी
बड़ा हो रहा था तो विनोद समझ तो गया पर उसने कुछ भी नहीं समझने का नाटक
किया।
मैंने भी उसको खूब मजे से मुख मैथुन किया, विनोद को मजा आ गया, बोला-
सुरभि तुम जैसा मुख मैथुन कोई नहीं कर सकता है। और वो मेरे मुँह में झड़ने
लगा। मैं उसका सारा माल पी गई।
विनोद बोला- मजा आ गया ! पर सॉरी यार सुरभि, तुम प्यासी रह गई हो। चलो
खाना खाने के बाद करते हैं आराम से, आज खूब चोदूँगा मैं तुमको।
जिंदगी चलती रहती है, आगे भी और कोई अच्छी घटना हुई तो जरुर बताऊँगी
क्यूंकि मेरे जीवन में सेक्स का स्थान बहुत ऊपर है। आगे जो भी होगा समय
समय पर आपको जरुर लिखूँगी।…………………………………

आअह्ह्ह!! लण्ड का स्वाद – Mastram Hindi Sex Kahani

 

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